हां, ये ED की सरकार है... महाराष्ट्र विधानसभा में फ्लोर टेस्ट के बाद देवेन्द्र फडणवीस ने बताया इसका मतलब


 

 महाराष्ट्र विधानसभा में एकनाथ सरकार की तरफ से सोमवार को बहुमत साबित कर दिया गया. विपक्ष में 94 वोट के बदले पक्ष में 164 वोट पड़. इसके बाद राज्य के उपमुख्यमंत्री देवेन्द्र फडणवीस ने विरोधियों पर करार पलटवार किया. उन्होंने कहा- लोग यह कहते हैं कि ये ईडी सरकार है. हां ये ईडी सरकार है, एकनाथ और देवेन्द्र का. केन्द्रीय एजेंसियों के बेजा इस्तेमाल के आरोपों पर पलटवार करते हुए फडणवीस ने ED का मतलब एकनाथ और अपना नाम लेकर उसके मायने बताये.

एक शिवसैनिक राज्य का बना सीएम

विधानसभा में बोलते हुए फडणवीस ने कहा कि एकनाथ शिंदे के तौर पर एक शिवसैनिक राज्य का मुख्यमंत्री बना है. उन्होंने कहा कि चुनाव पूर्व गठबंधन में बीजेपी-शिवसेना को साल 2019 में बहुमत मिला था. लेकिन, बहुमत को हमसे जानबूझकर ले लिया गया. उन्होंने उद्धव के उस कदम का हवाला दिया जब उन्होंने बीजेपी से अपना संबंध तोड़ते हुए कांग्रेस-एनसीपी के साथ जाकर सरकार बना ली थी, जो पिछले हफ्ते गिर गई.

शिवसेना के साथ फिर बनाई सरकार

पूर्व मुख्यमंत्री देवेन्द्र फडणवीस ने कहा कि एकनाथ शिंदे के सहयोग से एक बार फिर से हमने शिवसेना के साथ सरकार बनाई है.  मैं पार्टी आलाकमान के निर्देश के मुताबिक उपमुख्यमंत्री बना हूं. उन्होंने आगे कहा कि मैं घर बैठ जाता अगर मुझे पार्टी की तरफ से यह कहा जाता है. इसी पार्टी ने मुझे मुख्यमंत्री बनाया था. आज मैं यह कह सकता हूं कि इस सरकार में सत्ता को लेकर कोई मनमुटाव नहीं है. हम लगातार सहयोग करते रहेंगे.

फडणवीस ने विधानसभा में फ्लोर टेस्ट के बाद सदस्यों का आभार जताते हुए कहा, 'जिन सदस्यों ने इस प्रस्ताव के समर्थन में मतदान किया है उन सभी सदस्यों का मैं आभारी हूं.  1980 के शिंदे साहब में शिवसेना में सक्रिय तौर पर काम शुरू किया था. उन्होंने साधारण कार्यकर्ता के तौर पर कई जिम्मेदारियां उठाई और आज राज्य के मुख्यनमंत्री बने हैं. धर्मवीर आनंद दूबे ने 1984 में शिंदे साहब की कुसुमनगर साखा प्रमुख के तौर पर नियुक्ति की थी.

इसके बाद उन्होंने लगातार सामान्य इंसानों के हक के लिए लड़ाई लड़ी. शिंदे को कई बार जेल भी जाना पड़ा. लेकिन फिर भी पूरे मन से दूबे साहब ने जब भी आदेश दिया, उन्होंने सबकुछ छोड़कर जान की परवाह किए बिना जनसामान्य की सेवा के लिए हाजिर रहते थे.

फडणवीस ने कहा कि शिंदे लोगों की मदद करने की प्रवृति के कारण ही 2004 से लगातार 4 बार महाराष्ट्र विधानसभा में पहुंचे. उन्होंने कहा कि शिंदे ने भूतकाल में मेरे साथ मंत्री बन कर भी काम किया. लेकिन इसमें अहम ये है कि सीमा के मुद्दे पर जो आक्रामक आंदोलन हुआ था, एक तरह से उन्होंने नेता के तौर पर अपना दबदबा तैयार किया. 1996 में उन्होंने आंदोलन में संक्रिय तौर पर हिस्सा लिया और करीब 40 दिन जेल में थे. देखा जाए तो उनका राजनीतिक सफर 1997 में शुरु हुआ जब वो नगर सेवक चुने गए. उसके बाद जिला प्रमुख बने और 2014 में वह विरोधी पक्ष के नेता भी रहे. लेकिन उसके बाद हम फिर साथ आए और MSRDC के मंत्री के तौर पर उन्होंने कार्यभार स्वीकारा था.