प्रधानमंत्री आवास योजना हेतु पैसा नहीं मिलने, प्रोटोकॉल के विपरीत नियम, पेसा अधिनियम पर लापरवाही तथा सहायक परियोजना अधिकारी की पुनः नियुक्ति से व्यथित होकर विभाग से हट गए मंत्री टी एस सिंहदेव

 रायपुर ।

असल बात न्यूज़।। 

       00 विशेष रिपोर्ट 

राज्य के वरिष्ठ मंत्री टीएस सिंहदेव ने अपने एक विभाग पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग से आज सनसनीखेज तरीके से  इस्तीफा दे दिया है।उन्होंने मुख्यमंत्री भूपेश बघेल को एक मार्मिक पत्र लिखकर विभाग से अलग होने के बारे में जानकारी दी है। इस पत्र से पता चलता है कि वे पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के मंत्री रहने के दौरान प्रधानमंत्री आवास के लिए पैसा नहीं मिलने, प्रोटोकॉल के विपरीत नियम, पेसा अधिनियम पर लापरवाही तथा सहायक परियोजना अधिकारी संविदा की पुनः नियुक्ति से काफी व्यथित चल रहे थे जिसके बाद  विभाग से अलग होने के बारे में मुख्यमंत्री को उन्होंने पत्र लिखा है। उनके इस तरह से अचानक विभाग से अलग होने के बारे में मुख्यमंत्री को पत्र लिखने से छत्तीसगढ़ की राजनीति में हलचल मच गई है तथा तरह-तरह के कयास लगाए जा रहे हैं और अटकलबाजियों का दौर शुरू हो गया है।

वरिष्ठ नेता श्री श्री देव छत्तीसगढ़ की राजनीति में काफी प्रभावशाली वरिष्ठ नेता माने जाते हैं। वे राजपरिवार से ताल्लुक रखते हैं तथा यह माना जाता है कि 3 साल पहले उन्होंने छत्तीसगढ़ में कांग्रेस को सत्ता में वापस लाने के लिए कड़ी मेहनत की है तथा योजना बनाई थी। लेकिन प्रदेश में कांग्रेस की सरकार बन जाने के बाद वे लगातार  नाराज नजर आते रहे। वरिष्ठ मंत्री टीएस सिंह देव ने अपने विभाग से इस्तीफा दे दिया है तो सबसे पहला सवाल यही उठ रहा है कि मुख्यमंत्री के द्वारा क्या उसे स्वीकार कर लिया जाएगा। अभी इसकी पुष्टि तो हो गई है कि श्री सिंहदेव ने मुख्यमंत्री को विभाग से अलग होने के संबंध में पत्र भेजा है। लेकिन उनका इस्तीफा स्वीकृत कर लिया गया है अथवा स्वीकृत नहीं किया गया है, इसकी पुष्टि फिलहाल नहीं हो पाई है। यह कहा जा रहा है कि यदि श्री सिंहदेव  का इस्तीफा स्वीकार कर लिया जाता है तो राज्य की राजनीति में नए समीकरण बनने के हालात पैदा हो सकते हैं। 

मुख्यमंत्री भूपेश बघेल को भेजे गए इस पत्र में वरिष्ठ मंत्री श्री सिंह ने सबसे पहले छत्तीसगढ़ में प्रधानमंत्री आवास योजना की स्थिति के बारे में उल्लेख किया है। उन्होंने भावुक होते हुए पत्र में लिखा है कि प्रदेश में, वर्तमान सरकार के कार्यकाल में बेघर लोगों के लिए एक भी आवास नहीं बनाया जा सका। हमारे घोषणापत्र में कांग्रेस की घोषणा पत्र में बेघर लोगों को आवास दिलाने की बात का महत्वपूर्ण तरीके से उल्लेख किया गया था लेकिन इस पर काम नहीं हो सका। उन्होंने इसी पत्र में शिकायती लहजे में इस विषय पर कहा है कि प्रदेश के आवास विहीन लोगों को आवास उपलब्ध कराने के बारे में उन्होंने कई बार चर्चा की तथा राशि आवंटन के बारे में कहा लेकिन राशि उपलब्ध नहीं कराई जा सकी। इससे प्रदेश के लगभग आठ लाख आवासविहीन लोगों के लिए आवास नहीं बनाया जा सका।

पत्र में इसके बाद उन्होंने विभाग के कार्यों के लिए भारत साधक मंत्री की जगह मुख्य सचिव को अंतिम निर्णय लेने वाला अधिकारी बनाए जाने को प्रोटोकाल के विपरीत बताते हुए उसका उल्लेख किया है। उन्होंने पत्र में लिखा है कि मुख्यमंत्री समुद्र ग्रामीण विकास योजना के कार्यों की अंतिम स्वीकृति के लिए रूल्स आफ बिजनेस के विपरीत मुख्य सचिव की अध्यक्षता में सचिवों की एक समिति गठित की गई। कार्यों की स्वीकृति हेतु मंत्री के आंदोलन के उपरांत अंतिम निर्णय मुख्य सचिव की समिति के द्वारा लेने की प्रक्रिया बनाई गई जो कि प्रोटोकॉल के विपरीत और सर्वथा अनुचित है। इस पर उनके द्वारा बार-बार लिखित में आपत्ति दर्ज कराई गई। किंतु आज पर्यंत इस व्यवस्था को नहीं सुधारा जा सका।