कोरबा में प्रदेश सरकार पर लगाए गरीबों का पेट काटने के आरोप

 


 कोरबा। केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने राज्य सरकार पर गरीबों का पेट काटने का आरोप लगाते हुए कहा कि केंद्र से भेजे गए रुपयों का जमकर दुरुपयोग किया जा रहा है। गोबर खरीदी और गौठान योजना भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ गई है। नरवा, गरवा, घुरवा और बारी के नाम पर बंदरबांट किया जा रहा है। 23000 गोठान बनाए गए हैं इसके बावजूद मवेशियों का जमावड़ा सड़कों पर लगा हैं। मनरेगा में पारदर्शिता नहीं बरती जा रही है। सरकार गरीबों का पेट काटने का भी काम कर रही। परिवार के प्रत्येक सदस्यों को पांच-पांच किलो चावल प्रदान किया जाना है। पर यहां एक ही परिवार को पांच किलो चावल दिया जा रहा हैंं। मंत्री गिरीराज सिंह यहां पत्रकारों से चर्चा कर रहे थे। उन्होंने अन्य कई मुद्दों पर यहां अपनी बात रखी।

गौरतबल है कि ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज मंत्री गिरिराज सिंह कोरबा प्रवास पर है। इस उन्होंने जिला पंचायत के सभाकक्ष में केंद्र सरकार की योजनाओं की समीक्षा की। इस दौरान पूर्व गृहमंत्री व रामपुर के विधायक ननकीराम कंवर ने ग्राम पंचायतों को केंद्र सरकार की ओर से प्रदान किए जाने वाले 15वें वित्त की राशि को गोठनों में खर्च कर दिए जाने का मसला उठाया। केंद्रीय मंत्री गिरिराज ने बैठक में उपस्थित जिला पंचायत के सीईओ नूतन सिंह से पूछा कि ग्राम पंचायतों के विकास कार्यों के लिए प्रदान की गई राशि का उपयोग क्यों किया जा रहा। सीईओ ने जवाब देते हुए कहा कि ग्राम पंचायत के सरपंच अपनी अपनी स्वेच्छा से गोठनों के विकास कार्यों में राशि खर्च कर रहे हैं। इस बीच बैठक में उपस्थित जिला पंचायत सदस्य प्रीति कंवर ने 15 वें वित्त की राशि कई ग्राम पंचायतों को प्रदान नहीं किए जाने की बात कही। मंत्री ने सीईओ से कहा दस्तावेज पर तो आप लोग लीपापोती कर चुके हैं अब यहां तो कम से कम सही बोलें। मंत्री ने कहा गायों के संरक्षण व संवर्धन के लिए गांव-गांव में गोठान तो खोल दिए गए हैं पर अभी रास्ते में मैंने देखा कि सड़कों पर गाय झुंड लगाकर बैठे थे।

प्रधानमंत्री आवास का भी लक्ष्य के अनुरूप निर्माण कार्य व आवंटन नहीं होने पर निराशा व्यक्त की। मंत्री ने राष्ट्रीय आजीविका मिशन योजना के तहत महिला सशक्तिकरण क्षेत्र मैं चल रहा है कार्यों में लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों का वेतन रोकने के निर्देश बैठक में उपस्थित पंचायत विभाग के सचिव अब्दुल कैसर हक को दिए।