सुशासन से बदल रहा है भारत, लोगों के सपनों को अब पंख लग गए हैं -निवर्तमान राष्ट्रपति कोविंद

 


नई दिल्ली।
असल बात न्यूज़।।

भारत के राष्ट्रपति,श्री राम नाथ कोविंद को संसद के केंद्रीय कक्ष में गरिमापूर्ण  समारोह में आज विदाई दी गई।इस अवसर पर बोलते हुए राष्ट्रपति श्री कोविंद  ने कहा कि वह भारत के लोगों के उन्हें राष्ट्रपति के रूप में देश की सेवा करने का अवसर देने के लिए सदा आभारी हैं।राष्ट्रपति ने कहा कि वह मिट्टी के घर में पले-बढ़े हैं, लेकिन अब बहुत कम बच्चों को छप्पर वाले घरों में रहना पड़ता है। अधिक से अधिक गरीब लोग पक्के घरों में स्थानांतरित हो रहे हैं ।आम भारतीयों के सपनों को अब पंख लग गए हैं। यह सुशासन से संभव हुआ है, 

  उन्होंने कहा कि अपने कार्यकाल के दौरान उन्होंने विभिन्न मंचों पर सांसदों और अन्य क्षेत्रों के लोगों के कई प्रतिनिधिमंडलों से भी मुलाकात की। इस दौरान उन्हें प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी और उनकी मंत्रिपरिषद के सदस्यों के साथ काम करने का अवसर भी मिला। उन्होंने उन्हें जो विशेष सम्मान दिया है, उसके लिए उन्होंने उन सभी का धन्यवाद किया। उन्होंने उपराष्ट्रपति श्री एम. वेंकैया नायडू और लोकसभा अध्यक्ष श्री ओम बिरला को भी धन्यवाद दिया कि उन्होंने जिस तरह से संसद की कार्यवाही संचालित की है और उसकी महान परंपराओं को जारी रखा है। 

राष्ट्रपति ने कहा कि हमारे संविधान के अनुच्छेद 79 में राष्ट्रपति और दोनों सदनों से मिलकर संसद के गठन का प्रावधान है। इस संवैधानिक प्रावधान को ध्यान में रखते हुए और इसमें अपनी भावना जोड़ते हुए, वे राष्ट्रपति को संसदीय परिवार के अभिन्न अंग के रूप में देखते हैं। किसी भी परिवार की तरह इस संसदीय परिवार में भी मतभेद होना लाजमी है; कि आगे कैसे बढ़ना है, इस बारे में अलग-अलग विचार होंगे। लेकिन हम एक परिवार हैं और राष्ट्र हित हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है। राजनीतिक प्रक्रियाएं पार्टी संगठनों के तंत्र के माध्यम से संचालित होती हैं, लेकिन पार्टियों को एक पक्षपातपूर्ण दृष्टिकोण से ऊपर उठना चाहिए और आम आदमी और महिला के लिए क्या आवश्यक है, 'राष्ट्र पहले' की भावना के साथ विचार करना चाहिए कि क्या अच्छा है, । 

राष्ट्रपति ने कहा कि  जब हम पूरे देश को एक परिवार के रूप में देखते हैं, तो हम यह भी समझते हैं कि मतभेद कभी न कभी पैदा होते ही हैं। इस तरह के मतभेदों को बातचीत के जरिए शांतिपूर्ण और सौहार्दपूर्ण ढंग से सुलझाया जा सकता है। नागरिकों और राजनीतिक दलों के पास विरोध सहित  कई संवैधानिक रास्ते खुले हैं। आखिरकार, हमारे राष्ट्रपिता ने उस उद्देश्य के लिए सत्याग्रह के हथियार का इस्तेमाल किया। लेकिन उन्हें दूसरे पक्ष की भी उतनी ही चिंता थी। नागरिकों को अपनी मांगों के लिए दबाव बनाने का विरोध करने का अधिकार है, लेकिन यह हमेशा शांतिपूर्ण गांधीवादी सांचे में होना चाहिए। 

राष्ट्रपति ने कहा कि सार्वजनिक सेवा में  हाशिए पर रहने वाले लोगों के जीवन स्तर को ऊपर उठाने के लिए अभी बहुत कुछ किया जाना बाकी है। देश धीरे-धीरे लेकिन निश्चित रूप से डॉ. अम्बेडकर के सपनों को साकार कर रहा है। पीने का पानी लाने के लिए मीलों पैदल चलकर हमारी बहनें-बेटियां अतीत की बात होती जा रही हैं, क्योंकि हमारा प्रयास है कि हर घर में नल से पानी मिले। हमने हर घर में शौचालय भी लगवाए हैं, जो स्वच्छ और स्वस्थ भारत के निर्माण की नींव रख रहे हैं। सूर्यास्त के बाद लालटेन और दीया जलाने की यादें भी फीकी पड़ रही हैं क्योंकि लगभग सभी गांवों को बिजली कनेक्शन उपलब्ध करा दिया गया है। 

राष्ट्रपति ने कहा कि जैसे-जैसे बुनियादी जरूरतों का ध्यान रखा जा रहा है, वैसे-वैसे आकांक्षाएं भी बदल रही हैं। आम भारतीयों के सपनों को अब पंख लग गए हैं। यह सुशासन से संभव हुआ है, जो कि बिना किसी भेदभाव के आगे बढ़ा रहा है। यह चौतरफा प्रगति बाबासाहेब अम्बेडकर की कल्पना के अनुरूप है।