लगातार बढ़ रही महंगाई ; रूस-यूक्रेन युद्ध का भारत पर कैसे पड़ रहा असर

 


 नई दिल्ली. यूक्रेन पर रूसी हमला तीन महीनों से अधिक से जारी है। रूस-यूक्रेन युद्ध की शुरुआत के बाद से तीन महीनों में विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPI) ने 1 लाख करोड़ रुपये भारतीय बाजारों से बाहर निकाले हैं। यह रकम पिछले नौ महीनों की संयुक्त निकासी से 50,000 करोड़ अधिक है। 

डॉलर की तुलना में रुपये का गिरना प्रमुख कारण

रिपोर्ट्स बताती हैं कि डॉलर की तुलना में रुपये में तेज गिरावट के पीछे FPI का पीछे हटना प्रमुख योगदान कारकों में से एक रहा है। IMF के मुताबिक रुपया 24 फरवरी को एक डॉलर के मुकाबले 75.3 से लगभग चार फीसद गिरकर 31 मई के अंत तक एक डॉलर के मुकाबले 77.7 हो गया। कमजोर रुपये ने आयात पर दबाव डाला है। कमजोर रुपये ने आयात को महंगा बना दिया है।

ब्रेंट क्रूड की कीमत में डेढ़ गुना की बढ़ोतरी

ब्रेंट क्रूड की कीमतें जो 2022 की शुरुआत में 80 अमेरिकी डॉलर प्रति बैरल के करीब थी, रूसी आक्रमण के बाद बढ़कर 128 डॉलर प्रति बैरल हो गई। NYSE के मुताबिक युद्ध शुरू होने के करीब तीन महीने बाद 31 मई को यह 122.8 डॉलर प्रति बैरल पर था। रूस-यूक्रेन युद्ध की तपिश अब भारत सहित दुनिया भर में महसूस की जा रही है। 

भारत को लगा जोर का झटका

मामले को लेकर यूनाइटेड नेशंस ग्लोबल क्राइसिस रेस्पोंस ग्रुप ने कहा है कि यूक्रेन में युद्ध, अपने सभी आयामों में, विकासशील देशों पर विशेष रूप से नाटकीय प्रभावों के साथ, पहले से ही कोविड और जलवायु परिवर्तन से प्रभावित विश्व अर्थव्यवस्था के लिए खतरनाक प्रभाव पैदा कर रहा है। सिर्फ भारत में खाद्य कीमतों और आपूर्ति को झटका नहीं लगा है। 45 देश गंभीर खाद्य असुरक्षा की ओर देख रहे हैं और कई अंतरराष्ट्रीय संगठनों की निगाहें इस दिशा में टिकी हुई हैं।

मुद्रास्फीति दर 7.8 फीसद पर

भारत में वार्षिक मुद्रास्फीति दर अप्रैल 2022 में बढ़कर 7.8 फीसद हो गई जो कि मई 2014 के बाद सबसे अधिक है, क्योंकि खाद्य मुद्रास्फीति लगातार सातवें महीने बढ़कर 8.4 फीसद हो गई। 31 मई को वनस्पति तेल की कीमत पिछले साल के इसी दिन की तुलना में 26.6 फीसद अधिक थी, गेहूं 14.3 फीसद अधिक थी, और सरसों तेल और चीनी पिछले वर्ष की इसी दिन की तुलना में 5.1 और 4.1 फीसद अधिक थी।