बिलासपुर में सर्कल कबड्डी: चार मैच जीतकर खिताब पर हिसार हरियाणा का कब्जा

 


बिलासपुर। अखिल भारतीय सर्कल कबड्डी पुरुष प्रतियोगिता में सबसे अधिक चार मैच जीतकर गुरु जंबेश्वर विश्वविद्यालय हिसार (हरियाणा) ने खिताब पर कब्जा किया। प्रतियोगिता में चौधरी रणबीर सिंह विश्वविद्यालय जींद हरियाणा को द्वितीय और चौधरी देवी लाल वि सिरसा हरियाणा की टीम तृतीय स्थान पर रही।

अटल बिहारी वाजपेयी विश्वविद्यालय की मेजबानी में अखिल भारतीय सर्कल कबड्डी पुरुष प्रतियोगिता का आयोजन शासकीय ई. राघवेंद्र राव विज्ञान महाविद्यालय सीपत रोड मैदान में किया गया था। रविवार को अंतिम दिन फाइनल मुकाबला हुआ।

फाइनल में चार टीमों ने भाग लिया। संचालक शारीरिक शिक्षा प्रो. सौमित्र तिवारी ने बताया कि गुरु जंबेश्वर विश्वविद्यालय हिसार (हरियाणा), चौधरी रणबीर सिंह विश्वविद्यालय जींद हरियाणा व चौधरी देवी लाल विश्वविद्यालय सिरसा हरियाणा के साथ अटल बिहारी वाजपेयी विश्वविद्यालय की टीम आमने सामने थी।

दिनभर में कुल छह मैच खेले गए। सर्वाधिक मैच जीतने वाली टीम को क्रमश: विजेता घोषित किया गया। गुरु जंबेश्वर विश्वविद्यालय हिसार (हरियाणा) ने सबसे अधिक चार मैच जीतकर खिताब पर कब्जा करने के साथ प्रथम स्थान हासिल किया। तीन मैच जीतकर चौधरी रणबीर सिंह विश्वविद्यालय जींद हरियाणा दूसरे स्थान पर रही।

जबकि दो मैच जीतकर चौधरी देवी लाल विवि सिरसा हरियाणा तीसरे नंबर पर रही। अटल बिहारी वाजपेयी विश्वविद्यालय की टीम एक भी मैच नहीं जीत सकी। फिर भी बेहतर प्रदर्शन और अनुशासन के मद्देनजर टीम को चौथे क्रम में स्थान दिया गया। प्रतियोगिता को लेकर खिलाड़ियों में जबरदस्त खुशी झलक रही थी। बारिश के बाद भी खेल को लेकर खिलाड़ियों का जोश और जुनून देखने लायक था।

समापन समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में संसदीय सचिव रश्मि आशीष सिंह उपस्थित रहीं। खिलाड़ियों को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि इस प्रतियोगिता में खेल की जीत हुई है। देश के सात बड़े विश्वविद्यालय से पहुंची टीम के खिलाड़ियों ने शानदार खेल भावना से मैच खेला। बिना किसी विवाद के आयोजन को सफल बनाया।

इस अवसर पर विशिष्ट अतिथि के रूप में नगर विधायक शैलेष पांडेय, बेलतरा विधायक रजनीश सिंह मौजूद थे। अध्यक्षता कुलपति आचार्य एडीएन वाजपेयी ने की। प्रतियोगिता को सफल बनाने में कुलसचिव प्रो. सुधीर शर्मा, अधिष्ठाता छात्र कल्याण डा.एचएस होता, सहायक कुलसचिव परीक्षा प्रदीप सिंह एवं विभिन्न महाविद्यालयों के क्रीड़ा अधिकारियों की महत्वपूर्ण भूमिका रही।