आपरेशन राहुल: बेटा.. उठो.. यह आवाज ही नहीं, एक उम्मीद भी है

 


जांजगीर। राहुल..ओ राहुल..। राहुल बेटा... उठो...केला खा लो...फ्रूटी पी लो...राहुल.. ओ राहुल... मेरा अच्छा बेटा... आ जा..आ जा.. केला खा ले.. यह आवाज, महज कोई आवाज ही नहीं, एक उम्मीद भी है, जो बोरवेल में पिछले 65 घंटे से फंसे राहुल की ज़िंदगी से जुड़ा हुआ है। बोरवेल में गिरने के बाद एक कैमरा ही है, जो राहुल के भीतर होने और उसके मूवमेंट को कैद कर देखने वालों को राहत दे रहा है। राहुल अपनी गतिविधियों से सुकून का अहसास करा रहा है, वहीं इस सुकून के पीछे की एक वजह यह भी है कि राहुल कुछ देर के अंतराल में केला खा रहा है। जूस पी रहा है। सेब खा रहा है। राहुल जैसा भी है,जिस भी हालात में है। वह चिंता का विषय तो है, लेकिन रेस्क्यू सफल होने तक राहुल को खाने के लिए मजबूर करने में एनडीआरएफ के जवान बी. अनिल और कापसे एलबी, आरके पांडा का भी बहुत बड़ा योगदान है। यहां दो दिन से बोरवेल के आसपास तक यह मार्मिक आवाज गूंज रही है।

भले ही एनडीआरएफ के जवान बी. अनिल आंध्रप्रदेश से और कापसे एलबी महाराष्ट्र से हैं, लेकिन इन दोनों के द्वारा बोरवेल के बाहर कैमरे का न सिर्फ वायर संभालकर राहुल की हर गतिविधि को बाहर प्रदर्शित किया जा रहा है, बोरवेल से पानी को निकाला जा रहा है..अपितु आवाज लगा-लगा कर वे दोनों राहुल तक केला, जूस सहित अन्य सामग्रियां पहुंचा रहे हैं।