रंभा तीज का व्रत, कुंवारी कन्याओं के लिए भी फलदायी

 


सौंदर्य और सौभाग्य का व्रत रंभा तीज इस बार आज यानी 2 जून को है. ज्येष्ठ माह के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को पड़ने वाला यह व्रत जातक के जीवन में प्रेम और सौभाग्य लाता है. ऐसी मान्यता है कि यह व्रत सुहागिन स्त्रियों के साथ साथ कुंवारी कन्याओं के लिए भी विशेष रूप से फलदायी है.

रंभा तृतीया इसलिए फलदायी है कुंवारी कन्याओं के लिए

इन दिन कुंवारी कन्याएं मनभावन पति के लिए व्रत रखती हैं। वहीं सुहागिन महिलाएं पति की लंबी आयु और अच्छे स्वास्थ्य के लिए व्रत रखती हैं. मान्यता है कि इस व्रत को रखने से संतान सुख भी मिलता है. रंभा तृतीया के दिन माता पार्वती के साथ भगवान शिव की पूजा की जाती है. इसके साथ ही मां लक्ष्मी की पूजा करने का विधान है.

रंभा तृतीया / रंभा तीज पूजा शुभ मुहूर्त

ज्येष्ठ माह के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को पड़ने वाला यह व्रत जातक के जीवन में प्रेम और सौभाग्य लाता है. यह व्रत आज यानी 2 जून को रखा जाएगा.

तृतीया तिथि का आरंभ- 1 जून बुधवार की रात में 09 बजकर 47 मिनट से
तृतीया तिथि समापन- 3 जून, शुक्रवार की रात 12 बजकर 17 मिनट पर

रंभा तृतीया की पूजा विधि

आज के दिन ब्रह्म मुहूर्त में उठकर सभी कामों से निवृत्त होकर स्नान आदि कर लें
व्रत और पूजा का संकल्प लें
अब स्वच्छ आसन में बैठकर एक चौक में साफ कपड़ा बिछाकर मां पार्वती और भगवान शिव की मूर्ति स्थापित करें
सबसे पहले जल अर्पित करें. इसके बाद भगवान शिव को सफेद चंदन लगाएं और माता पार्वती को सिंदूर लगाएं
मां पार्वती और भगवान शिव को फूल, अक्षत, हल्दी, मेहंदी आदि सभी सामग्री चढ़ा दें
अब भोग लगा दें
इसके बाद घी का दीपक और धूप जलाकर आरती आदि कर लें

इस मंत्रों का करें जाप

  • ॐ दिव्यायै नमः।

  • ॐ वागीश्चरायै नमः।

  • ॐ सौंदर्या प्रियायै नमः।

  • ॐ योवन प्रियायै नमः।

  • ॐ सौभाग्दायै नमः।

  • ॐ आरोग्यप्रदायै नमः।

  • ॐ प्राणप्रियायै नमः।

  • ॐ उर्जश्चलायै नमः।

  • ॐ देवाप्रियायै नमः।

  • ॐ ऐश्वर्याप्रदायै नमः।

  • ॐ धनदायै धनदा रम्भायै नमः।