विश्व पर्यावरण दिवस पर स्वरुपानंद महाविद्यालय में विभिन्न कार्यक्रम का आयोजन

 भिलाई।

असल बात न्यूज़।।

विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर स्वामी श्री स्वरुपानंद सरस्वती महाविद्यालय, भिलाई के माईक्रोबायोलॉजी विभाग, एनएसएस, रेडक्रॉस एवं गणित विभाग द्वारा विविध कार्यक्रमों का आयोजन किया गया।

विद्यार्थियों ने पर्यावरण जागरुकता को लेकर विभिन्न बिन्दुओं में सर्वे किया पर्यावरण के प्रति अपने भावनाओं एवं विचारों को निबंध एवं पोस्टर के माध्यम से व्यक्त किया। लोगों को जागरुक करने हेतु विद्यार्थियों ने वीडियो बनाया। पर्यावरण संरक्षण में व्यक्तिगत योगदान और जागरुकता से संबंधी ई-प्रश्नोत्तरी का भी आयोजन किया गया। 

महाविद्यालय द्वारा प्लास्टिक की बॉटल में प्लास्टिक पन्नी और रेपर को भरकर इन बॉटलो की सहायता से ट्री गार्ड एवं टेबल बनाया गया तथा स्टॉफ एवं विद्यार्थियों ने संकल्प लिया कि वे प्लास्टिक रेपर एवं झिल्ली को बॉटल में भरकर उसे पुनः उपयोग में लायेंगे जिससे पर्यावरण को सर्वाधिक क्षति पहुॅंचाने वाले कारक प्लास्टिक पुनः उपयोग किया जाता है। 

ग्लोबल वार्मिंग, जल संरक्षण, मृदा संरक्षण, जैवविधिता, वन्यजीवन संरक्षण, जलवायु परिवर्तन, जनसंख्या विस्फोट, जैसे चुनौतियों से निपटने के लिये विश्व पर्यावरण दिवस प्रत्येक वर्ष 5 जून को नए थीम के साथ मनाया जाता है। इस वर्ष पच्चास वर्ष पुराने अर्थात प्रथम थीम ”केवल पृथ्वी“ की पुनः पुनारावृत्त किया गया है।

माईक्रोबायोलॉजी विभाग की विभागाध्यक्ष डॉ. शमा अ. बेग ने छात्रों को अपने कार्बन पद चिन्ह कर पर्यावरण का संरक्षण करने हेतु सुझाव दिये जैसे अपनी जीवन शैली में बदलाव करना, पैदल चलना, साईकिल का प्रयोग करना क्योंकि औसत वाहन प्रति मील 404 ग्राम कार्बन डाइऑक्साईड उत्सर्जित करता है। हवाई यात्रा की जगह रेल यात्रा, शावर की जगह बाल्टी का उपयोग, डिब्बा बंद सामग्री का प्रयोग कम, रिसाईक्लिंग पर मान, ऊर्जा खपत कम करने के उपाय अपना कर हम पर्यावरण संरक्षण में अपनी भूमिका निभा सकते है।

राष्ट्रीय सेवा योजना अधिकारी श्री दीपक सिंह ने कहा कि आज जब संपूर्ण विश्व पर्यावरण प्रदुषण की समस्या से जूझ रहा है तो राष्ट्रीय सेवा योजना इकाई द्वारा पर्यावरण संरक्षण जागरुकता लाने के उद्देश्य से विविध कार्यक्रम एवं प्रतियोगिताओं का आयोजन कराया जा रहा है। 

महाविद्यालय के मुख्य कार्यकारी अधिकारी डॉ. दीपक शर्मा ने कहा कि प्रत्येक व्यक्ति अपने जीवन में एक पेड़ लगाकर और उसे संरक्षित रख कर पर्यावरण संरक्षण में महत्वपूर्ण योगदान दे सकता है।

महाविद्यालय की प्राचार्य डॉ. हंसा शुक्ला ने कहा कि पर्यावरण संरक्षण के लिये अपनी दिनचर्या में थोडा परिवर्तन कर हम अतुलनीय सहयोग प्रदान कर सकते है जैसे जरुरत न होने पर लाईट, पंखा चालू न करें, आस-पास का काम पैदल या साईकल से जाकर पूरा करे, पब्लिक ट्रांसपोर्ट का उपयोग करे, प्रत्येक वर्ष एक पेड़ लगाकर उसकी देखभाल करें। 

डॉ. शमा ए. बेग ने बताया कि गूगल फार्म की सहायता से सर्वे किया गया जिसका उद्देश्य लोगों का पर्यावरण संरक्षण के प्रति रुझान की जानकारी प्राप्त करना था। सर्वे में विभिन्न महाविद्यालय के शिक्षकों एवं विद्यार्थियों ने भाग लिया जैसे स्वरुपानंद महाविद्यालय भिलाई, कल्याण महाविद्यालय भिलाई, साईं महाविद्यालय भिलाई, शासकीय विद्यालय थनौद, शंकराचार्य टेक्टिनल कैम्पस जुनवानी, शासकीय स्कूल जेवरतला, साईंस कॉलेज दुर्ग, जंजगिरी स्कूल आदि ने भाग लिया। सर्वे से स्पष्ट हुआ कि पर्यावरण संरक्षण में महिलाओं की प्रतिभागिता चौरान्वे प्रतिशत, चालीस प्रतिशत लोगों के घरों में रेन वाटर, हार्वेस्टींग सिस्टम है, बत्तीस प्रतिशत घरों में रेन वाटर, हार्वेस्टींग सिस्टम नही है जिसमें से सताईस प्रतिशत लोग वाटर, हार्वेस्टींग सिस्टम लगवाने के लिये इच्छुक है। सौ प्रतिशत लोगों ने वृक्षारोेपण किया है सैंतीस प्रतिशत लोगों ने लगभग दस वृक्ष लगाये है। प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिता में छात्रों एवं शिक्षकों ने रुचिपूर्वक भाग लिया।

पोस्टर प्रतियोगिता में विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्व भाग लिया। शिक्षा विभाग से अंशु एक्का, युक्ति साहू, इरेन्द्र मोहिते, भारती चंद्रा, बबली यादव, रोशनलाल, गिरिजानंद, इंदु साहू, कामिनी वर्मा, पंकज कुमार, विशाखा, प्रमोद वर्मा, रोमिका मनकर, मेघा खैरवार, विवेक ठाकुर, पूनम चौव्हान एवं माईक्रोबायोलॉजी की बीएससी द्वितीय वर्ष की छात्रा अनीषा सिंग के पोस्टर उत्कृष्ट रहे। निबंध प्रतियोगिता में डेनिस कुमार, दीपेश्वरी सिन्हा, पुरुषोत्तम साहू, अंशु एक्का, श्याम सुंदर पटनायक ने भाग लिया। 

वीडियो मेंकिंग प्रतियोगिता में प्रथम स्थान इन्द्रजीत यादव एमएससी चतुर्थ सेमेस्टर गणित, द्वितीय स्थाप संदीप कुूमार एमएससी चतुर्थ सेमेस्टर ने प्राप्त किया।

कार्यक्रम को सफल बनाने में डॉ. अभिलाषा शर्मा सहायक प्राध्यापक शिक्षा एवं कुमारी जानकी जंघेल सहायक प्राध्यापक गणित ने विशेष सहयोग प्रदान किया।