50 प्रतिशत शिक्षकों को पता ही नहीं, बच्चों को किस कक्षा में कितना पढ़ाना है जरूरी

 


 रायपुर। अब तक शिक्षक बच्चों का मूल्यांकन करते आ रहे थे, अब पहली बार उन्होंने स्वमूल्यांकन किया है। एक लाख 75 हजार शिक्षकों में से 50.9 प्रतिशत ने खुद को सभी मानदंडों पर उत्कृष्ट होने का ग्रेड दे दिया है। हालांकि बाकी 32 प्रतिशत शिक्षकों ने यह माना है कि उनको इसकी पूरी जानकारी नहीं है कि किस कक्षा में बच्चों को कितना पढ़ाना है। यानी यह नहीं पता कि बच्चों को कितना आना चाहिए। करीब 10 हजार शिक्षक ऐसे हैं जिन्होंने पूरी तरह से पठन-पाठन की प्रक्रिया से खुद को अनजान बताया है। इस रिपोर्ट कार्ड के आने के बाद शिक्षा विभाग की चिंता बढ़ गई है। जल्द ही ऐसे शिक्षकों के लिए विभाग वेबिनार करने वाला है। प्रशिक्षण के माड्यूल में भी बदलाव किया जा रहा है।

इन मानकों पर हुआ था मूल्यांकन

स्कूली शिक्षा में गुणवत्ता लाने के लिए पहली से 12वीं तक की कक्षाओं में पढ़ाने वाले शिक्षकों से स्वमूल्यांकन करने को छह मानक तय किए गए थे। इसमें शिक्षकों में विषय का ज्ञान, बच्चों को सिखाने की क्षमता, शाला विकास, खुद का विकास, सीखने की क्षमता तथा पारस्परिक संबंध समेत 40 बिंदुओं पर मूल्यांकन किया गया था। शिक्षकों से कई तरह के रोचक सवाल पूछे गए थे, जैसे-इस विषय में मुझे ज्ञान नहीं है, इस विषय को पढ़ाने से पहले किस तरह की तैयारी करते हैं, आदि ।

इन टूल्स से हुआ था आकलन

राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (एससीईआरटी) के संचालक राजेश सिंह राणा ने बताया कि 30 अप्रैल से तीन मई तक शिक्षकों का स्वमूल्यांकन कराया था। सेल्फ असेसमेंट टूल छत्तीसगढ़ नाम के आकलन उपकरण से शिक्षकों का स्वमूल्यांकन कराया गया था। उसके परिणाम के आधार पर शिक्षकों को प्रशिक्षण देने का वार्षिक कैलेंडर तैयार किया गया है।

शिक्षा विभाग के प्रमुख सचिव डा. आलोक शुक्ला ने कहा, शिक्षकों से वेबीनार के जरिए सीधी बात करेंगे। उनकी समस्या समझेंगे फिर उसके आधार पर रणनीति तय करेंंगे।

शिक्षकों का खुद का आकलन

स्तर प्रतिशत

उत्कृष्ट 50.9

बहुत अच्छा 16.7

अच्छा 12.8

कमजोर 17.8

उदासीन 1.2