डीएपी न उपलब्ध होने पर अनुशंसित मात्रा में अन्य उर्वरकों का उपयोग कर सकते हैं किसान

 कृषि विभाग ने फसलवार उर्वरक उपयोग के मात्रा की अनुशंसा 

रायपुर ।

असल बात न्यूज़।। 

      00  कृषि संवाददाता

रबी सीजन के बाद खरीफ सीजन में भी रासायनिक खादों की कमी की समस्या जारी रहने की आशंका बनी हुई है। पिछले महीनों के दौरान राज्य में रासायनिक खादों  का जगह जगह पर  भंडारण करने की कोशिश की गई है लेकिन माना जा रहा है कि मांग के अनुरूप इसकी आपूर्ति में कमी पैदा हो सकती है। ऐसे हालात पैदा होने पर कृषि विभाग ने किसानों को डीएपी उर्वरक जगह अन्य उर्वरक का इस्तेमाल करने की सलाह दी है।

खरीफ 2022 के लिए राज्य की मांग की अनुरूप डीएपी उर्वरक की कम आपूर्ति के मद्देनजर कृषि विभाग ने राज्य के किसानों को डीएपी के बदले अन्य उर्वरकों के उपयोग की सलाह दी गई है। कृषि विभाग ने इसके लिए किसानों को फसलवार अन्य उर्वरकों के उपयोग की अनुशंसित मात्रा की जानकारी देते हुए कहा है कि किसान डीएपी की उपलब्धता सुनिश्चित न होने पर अनुशंसित मात्रा में अन्य उर्वरकों का उपयोग इसके विकल्प के रूप में कर सकते हैं। 
कृषि विभाग के अपर संचालक श्री एस.सी. पदम ने बताया कि धान एवं मक्का फसल के लिए अनुशंसित पोषक तत्व एन पी के-40ः24ः16 (नाईट्रोजन 40 फास्फोरस 24, पोटाश 16) किलोग्राम प्रति एकड मात्रा आपूर्ति के लिए यूरिया एक बारी (50कि.ग्रा.) एनपी के (20ः20ः0ः13) दो चोरी (100 कि.ग्रा.) एवं पोेटाश (27कि.ग्रा.) अथवा यूरिया (65 कि.ग्रा.) एवं एन.पी.के (12ः32ः16) दो बोरी (100 कि.ग्रा.) एवं सिंगल सुपर फॉस्फेट (50 कि.ग्रा.) अथवा यूरिया दो बोरी (100 कि.ग्रा). सिंगल सुपर फास्फेट तीन बोरी (150 किग्रा) एवं पोटाश 27 किलोग्राम का प्रयोग किया जा सकता है। उन्होंने किसानों को इसके साथ ही वर्मी कम्पोस्ट कम से कम क्विंटल प्रति एकड की दर से उपयोग करने की सलाह दी है। 
इसी तरह खरीफ दलहनी फसलों के लिए अनुशंसित पोषक तत्व एनपीके 8ः20ः8 (नाइट्रोजन 8. फास्फोरस 20. पोटाश 8) कि.ग्रा. प्रति एकड मात्रा की आपूर्ति के लिए यूरिया 18 कि.ग्रा., पोटाश 14 कि.ग्रा. एवं सिंगल सुपर फास्फेट ढाई बोरी (125 कि.ग्रा.) अथवा यूरिया 5 कि.ग्रा. एनपीके (12ः32ः16) एक बोरी (50 कि.ग्रा.), पोटाश 14 कि.ग्रा. सिंगल सुपर फास्फेट 25 कि.ग्रा. साथ ही वर्मी कपोस्ट कम से कम एक क्विंटल प्रति एकड की दर से उपयोग किया जाना चाहिए।
खरीफ की तिलहनी फसलों के लिए अनुशंसित पोषक तत्व एन. पी. के. (8ः20ः8) (नाइट्रोजन 8. फास्फोरस 20 पोटाश 8 (सोयाबीन एवं मूंगफली) किग्रा. प्रति एकड़ आपूर्ति के लिए यूरिया (17 कि.ग्रा.), पोटाश (13 कि.ग्रा.) एवं सिंगल सुपर फास्फेट (125 कि.ग्रा) के साथ वर्मी कम्पोस्ट कम से कम 1 निवंटल प्रति एकड़ की दर से उपयोग करे। रामतील अनुशंसित पोषक तत्वों की मात्रा (12ः12ः8) किग्रा नत्रजन, स्पूर एवं पोटाश प्रति एकड में पोषक तत्वों की पूर्ति के लिए यूरिया 26 कि.ग्रा., सिंगल सुपर फारफेट 25 कि.ग्रा. म्यूरेट आफ 13 कि.ग्रा. का प्रयोग किया जा सकता है, इसके साथ ही किसानों को वर्मी कम्पोस्ट एक क्विंटल प्रति एकड़ की दर से उपयोग करने की सलाह दी गई है। 
गन्ना फसल के लिए अनुशंसित पोषक तत्व एन.पी.के 120ः32ः24 (नाइट्रोजन 120, फास्फोरस 32. पोटाश 24) कि.ग्रा. प्रति एकड मात्रा आपूर्ति के लिए यूरिया पांच बोरी 5 बोरी (250 कि.ग्रा.), एन.पी के (12ः32ः16) दो बोरी (100 कि.ग्रा.) एवं पोटाश (14 कि.ग्रा.) अथवा यूरिया (260 कि.ग्रा.), सिंगल सुपर फास्फेट चार बोरी (200 कि.ग्रा.) एवं पोटाश 40 कि.ग्रा. अथवा यूरिया (200 कि.ग्रा.), एन. पी. के (20ः20ः0ः13) 03 बोरी (150 कि.ग्रा) एवं पोटाश 40 कि.ग्रा. का प्रयोग किया जा सकता है। इसके साथ ही वर्मी कम्पोस्ट कम से कम एक क्विंटल प्रति एकड की दर से उपयोग करने की सलाह किसानों को दी गई है। 



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