रहवासी क्षेत्र में फर्नीचर उद्योग बंद करने की मांग

 

दुर्ग ।

असल बात न्यूज़।।

जनदर्शन में आम नागरिक कलेक्टर डॉ. सर्वेश्वर नरेंद्र भुरे के समक्ष् अपनी भिन्न-भिन्न प्रकार की समस्याएं लेकर उपस्थित हो रहे हैं। रहवासी इलाके में फर्नीचर दुकान द्वारा उद्योग स्तर पर निर्माण कार्य को लेकर जिसमें आवेदक ने बताया कि वह भिलाई खुर्सीपार की निवासी हैं और उसके घर के पास एक फर्नीचर की दुकान है। जिसमें बड़े स्तर में प्रतिदिन फर्नीचर निर्माण का कार्य किया जाता है। जिससे दिन रात लकड़ी के कार्य से उसके बुरादे हवा के मानक स्तर को निम्न बना रहे हैं और फर्नीचर पर किए जा रहे पेंट से भी आस-पास रहने वाले लोगों को स्वास्थ्य से संबंधित दिक्कतें आ रही है। दुकान में निर्मित फर्नीचरों को सड़क में रख दिया जाता है, जिससे सड़क का चौड़ीकरण भी प्रभावित हो रहा है। इसकी शिकायत नगर निगम भिलाई एवं पुलिस थाने में भी की जा चुकी है, जिस पर अभी तक कोई कार्यवाही नहीं हुई है। कलेक्टर ने आवेदन को विधि पूर्ण कार्यवाही के लिए संबंधित अधिकारी को प्रेषित किया।

मृत्यु के पश्चात् अंतिम संस्कार की प्रक्रिया के लिए जमीन की मांग को लेकर सतनामी समाज से एक आवेदक आज कलेक्टर के समक्ष् पहुंचा। आवेदक ने कलेक्टर को सतनामी समाज की परंपरा से अवगत कराते हुए बताया कि उनके समाज में मृत्यु के पश्चात् शव को मिट्टी दी जाती है अर्थात् शव को जमीन में दफनाया जाता है। यह परंपरा उनके समाज में आदि-अनादि काल से चली आ रही है। इसके लिए आवेदक ने नगर निगम भिलाई के महापौर परिषद की बैठक में भी समाज की ओर से ये पक्ष रखा था। जिसमें सतनामी समाज को शमशान के लिए जमीन आबंटित करने का निर्णय लिया गया था। परंतु वर्तमान में यह राजस्व प्रकरण न्यायालय अतिरिक्त तहसीलदार भिलाई के अंतर्गत प्रक्रियाधीन है। सतनामी समाज की परंपरा व आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए आवेदक ने कलेक्टर को शीघ्र जमीन आबंटन के लिए निवेदन किया। कलेक्टर ने मामले का संज्ञान लेते हुए संबंधित अधिकारी को प्रकरण प्रस्तावित कर दिया। 

कलेक्टर के समक्ष् इंदिरा मार्केट पार्किंग स्थल के पास की दुकान का मामला आया। जिसमें आवेदक ने बताया कि मार्केट में दुकान नं. इ-13 उसने अपने चिकन के दुकान के लिए एलॉट कराई थी। जिस पर पहले से ही अन्य व्यक्ति ने कब्जा कर रखा था। इसके लिए आवेदक ने बताया कि न्यायालय की शरण में गया था। जहां उच्च न्यायालय बिलासपुर ने आवेदक के पक्ष पर फैसला दिया। परंतु वर्तमान में भी कब्जाधारी ने दुकान पर कब्जा कर रखा है। जबकि उच्च न्यायालय के आदेश में कब्जाधारी को दुकान नंबर 29 आबंटित की गई है। अपनी दुकान को लेने के लिए आवेदक विगत कई वर्षों से प्रयास कर रहा है। आवेदक ने कलेक्टर से अपील की है कि अवैध कब्जाधारी को हटाकर आवेदक को दुकान पर कब्जा दिलाया जाए। कलेक्टर ने मामले का संज्ञान लेते हुए नगर निगम आयुक्त को मामले के शीघ्र निराकरण के लिए आवेदन प्रेषित किया है। इसके अलावा कलेक्टर के समक्ष् विधवा पेंशन और शराब दुकान हटाने से संबंधित कुल 38 आवेदन आए थे।