रासायनिक खाद की कमी और महंगे दाम पर बेचे जाने से प्रशासनिक महकमे में हड़कंप, रायपुर जिले में 27 दुकानों को दी गई नोटिस, जिले के कलेक्टर ने सहकारी सोसायटियो को मार्कफेड के गोदामों से तत्काल उठाव करने का दिया निर्देश

 रायपुर।

 असल बात न्यूज़।।

00 विशेष संवाददाता । 

भले ही पूरे प्रदेश में जगह-जगह से रासायनिक खादों की कालाबाजारी तथा उसे अधिक दामों पर बेचे जाने की शिकायतें आ रही हैं लेकिन जो आंकड़े बता रहे हैं मार्कफेड के गोदामों में अभी भी रसायनिक खादों का पर्याप्त भंडारण है। विभिन्न सोसाइटी में भी रासायनिक खाद पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध है लेकिन जहां यह खाद उपलब्ध नहीं हैं वहां सोसाइटी प्रबंधन के द्वारा इसका स्टॉक मंगाया नहीं जा रहा है। फिलहाल लगभग सभी जिलों में महंगे दाम पर रासायनिक खाद बेचने तथा इसकी कृत्रिम कमी को रोकने मिशन मोड पर कार्रवाई शुरू की एक कर दी गई है। एक मजेदार बात यह भी है कि रबी के सीजन में रसायनिक खादों की बहुत अधिक बीमार नहीं रहती है लेकिन अभी आश्चर्यजनक तरीके से इसकी डिमांड काफी बढ़ गई है। जगह जगह से इसे काफी महंगे दामों में बेचने की शिकायतें सामने आ रही हैं।ऐसी शिकायतों से लगभग सभी जिलों में प्रशासनिक महकमे में हड़कंप मचा हुआ है। 

रायपुर जिले से मिली जानकारी के अनुसार यहां रासायनिक खादों को महंगे दामों पर बेचने कृत्रिम कमी तथा अन्य अनियमितताओं के मामले में लगभग 25 खाद विक्रेताओं को नोटिस दी गई है। खाद की कमी की शिकायतें जगह-जगह से रोज ही मिल रही हैं। फरवरी महीने में यह शिकायत काफी बढ़ गई है।उक्त खाद विक्रेताओं की दुकानों में  रेट लिस्ट नहीं लगी होने, स्टॉक रजिस्टर कंप्लीट नहीं होने, फिजिकल स्टॉक और रजिस्टर के आंकड़ों से सही मिलान नहीं होने, तथा बेची गई सामग्री के बिल बुक में किसानों के हस्ताक्षर नहीं होने की अनियमितताएं पाई गई है जिसके बाद उन दुकानों को नोटिस दी गई है। कृषि विभाग के द्वारा ऐसी निजी दुकानों में अपने कर्मियों को भी तैनात किया गया है जोकि रसायनिक खाद किस मूल्य पर बेचा जा रहा है और कितनी मात्रा में उपलब्ध है ? इसके लगातार निगरानी कर रहे हैं। रसायनिक खाद की कमी के चलते इतनी हड़कंप पहली बार मुझे दिख रही है तथा इतनी अधिक माथापच्ची हो जा रही है। वह भी तब  जबकि अभी रबी फसल के सीजन के समय रसायनिक खादों की बहुत अधिक मांग नहीं है। विभागीय टीम छापे के लिए पहुंच रही है तो दुकानदार छापे से बचने के लिए दुकान बंद कर  इधर उधर निकल जा रहे हैं। विभागीय अधिकारियों ने इसका भी तोड़ निकाल लिया है और जिन दुकानों से शिकायतें प्राप्त हो रही हैं वहां विभागीय कर्मियों को तैनात कर दिया गया है। 

दुर्ग जिले में भी रासायनिक खाद के कमी की शिकायतें चारों तरफ से आ रहे हैं और यहां भी कार्रवाई की गई है लेकिन रायपुर जिले में तो सभी चारों ब्लॉक में मिशन मोड में कार्रवाई शुरू कर दी गई है। जिन दुकानों में रसायनिक खाद का स्टाक पाया जा रहा है वहां सभी  जरूरतमंद किसानों को इस की आपूर्ति की जा रही है। विभागीय अधिकारियों ने बताया है कि इस समय यूरिया और डीएपी की मांग ही अधिक रहती है। रायपुर जिले में 126 समितियों में रासायनिक खाद के पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध होने की जानकारी सामने आ रही है जबकि 30 समितियों में यूरिया नहीं होने की जानकारी सामने आई है। जिले के कृषि विभाग के वरिष्ठ अधिकारी श्री कश्यप ने हमें बताया है कि सभी सोसाइटी  को निर्देश दिया जा रहा है कि वहां रासायनिक खाद की पर्याप्त मात्रा में उपलब्धता सुनिश्चित हो सके। अधिकारियों ने बताया कि कुछ दुकानदारों को महंगे दर पर रसायनिक खाद बेचते पकड़ा गया है लेकिन ऐसे दुकानदारों का कहना है कि उन्होंने अजीत धाम पर इसकी खरीदारी की है इसलिए महंगे दामों पर बेच रहे हैं। रसायनिक ख्वाबों की कमी तथा इसे महंगे दर पर बेचने जाने के मामले में अब जिले के कलेक्टर भी गंभीर नजर आ रहे हैं। पता चला है कि रायपुर जिले में कलेक्टर के द्वारा सभी सोसाइटी यों को मार्कशीट के गोदामों से रसायनिक खाद का उठाव करने को कहा गया है।

सरकारी सेवा समितियों के द्वारा इस समय रसायनिक खादों का पर्याप्त भंडारण नहीं कि जाने के बारे में एक बात या सामने आ रही है कि इस समय रसायनिक खादों की मांग अधिक नहीं रहती। किसानों के द्वारा इसका पर्याप्त उठाव नहीं किया जाता। ऐसे में सोसाइटीयों के द्वारा इसका भंडारण की जाने से उनकी बड़ी राशि इसके पीछे जाने का खतरा बना रहता है। इसलिए इस सीजन में रासायनिक खादों के भंडारण की ओर अधिक नहीं दिया जाता है। अभी रासायनिक खादों की मांग एकाएक अधिक कैसे बढ़ गई है जिला प्रशासन के द्वारा इस पर भी सर्च कराया जा रहा है। 

प्राप्त जानकारी के अनुसार रायपुर जिले के आरंग, मंदिर हसौद, सिलतरा, तिल्दा, खरोरा, अभनपुर और नवापारा क्षेत्र में मार्कफेड के गोदामों में कुल 3 हजार 321 और 1 हजार 564 मीट्रिक टन डीएपी का भंडारण है। जिला प्रशासन के द्वारा समितियों को मांग के अनुसार इसका उठाव करने को कहा गया है।