स्वरूपानंद महाविद्यालय में भारत कोकिला सरोजिनी नायडु की जयंती पर निबंध लेखन का आयोजन

 

भिलाई ।

असल बात न्यूज़।।

स्वरूपानंद महाविद्यालय की महिला सेल व शिक्षा विभाग के संयुक्त तत्वाधान में भारत कोकिला सरोजिनी नायडू की जयंती के अवसर पर महिला स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों पर निबंध लेखन का आयोजन किया गया |

कार्यक्रम के उद्देश्यों पर प्रकाश डालते हुए कार्यक्रम की संयोजिका सहायक प्राध्यापक उषा साहू  ने कहा विद्यार्थियों को महिला स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों के जीवन से संबंधित तथ्यों की जानकारी प्रदान करना तथा देशभक्ति की भावना जागृत करना है।

बी.एड. रीतु विश्वकर्मा ने निबंध में सरोजिनी नायडू के प्रति अपने विचार व्यक्त करते हुये लिखा कि उन्होंने गांधी जी के साथ अनेक सत्याग्रहों में भाग लिया। भारत छोड़ो आंदोलन में वह जेल गयी, अपने प्रखर व्यक्तित्व के कारण वह राष्ट्रीय कांग्रेस कानपुर अधिवेशन की प्रथम भारतीय महिला अध्यक्ष बनी। गांधी जी के स्वदेशी के समर्थ में उन्होंने खाद्यी पहनने का वत्र लिया। 

बी.एड. विद्यार्थी मेघा खैरवार ने निबंध में लिखा सरोजिनी नायडू स्वतंत्रता संग्राम सेनानी के साथ एक कवियित्री भी थी। इन्होंने अपनी कविताओं व भाषणों के माध्यम से देश जनता को आजदी के प्रति नई जागरुकता जगाई वे महान क्रांतिकारी व राजनीतिज्ञ थी। बी.एड. विद्यार्थी बबली यादव ने कहा सरोजिनी नायडू का व्यक्तित्व बड़ा प्रेरक रहा क्योंकि स्वतंत्रता संग्राम में योगदान देने के साथ रानीतिक, साहित्यक, समाज और महिला सशक्तिकरण में भी उनकी भूमिका उल्लेखनीय नजर आती है। विद्यार्थियों ने सरोजिनी नायडू के अलावा झांसी की रानी लक्ष्मीबाई,  भीकाजी कामा, सावित्रीबाई फुले, विजय लक्ष्मी पंडित,  दुर्गाबाई देशमुख, कैप्टन लक्ष्मी बाई सहगल, कमला नेहरू,  सुचेता कृपलानी,  अरूणा आसफ अली जैसे महान स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों के विषय में अपने विचार निबंध के माध्यम से व्यक्त किये | 

महाविद्यालय  के सीओओ डॉ दीपक शर्मा ने कहा  सभी विद्यार्थियों के लिए यह जानना जरूरी है कि हमारे देश के महिला स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों ने देश की आजादी के लिए किस प्रकार से अपना योगदान दिया |

महाविद्यालय की प्राचार्य डॉक्टर हंसा शुक्ला ने कहा कि भारत कोकिला सरोजिनी नायडू भारतीय समाज में फैली कुरीतियों के प्रति महिलाओं को जागृत किया वह सक्रिय स्वतंत्रता सेनानि होने के साथ एक अच्छी लेखिका भी थी।  उनके आह्वन पर महिलायें एकजुट होकर आजादी की लड़ाई में शामिल हुए  

महाविद्यालय के उपप्राचार्य डॉ अज़रा हुसैन ने कहा स्वतंत्रता सेनानी वह होता है जो अपने स्वयं के स्वार्थ को छोड़कर देश के हित के लिए कार्य करता है तथा अपनी मातृभूमि की स्वतंत्रता के लिए लड़ाई में भाग लेता है और अपने प्राणों की भी परवाह ना कर अपना घर परिवार सब छोड़ कर अपना जीवन अपनी मातृभूमि को समर्पित कर देता है |