राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग की टीम ने दुर्ग में देखा सड़क पर रहने वाले बच्चों का हाल

 

दुर्ग ।

असल बात न्यूज़। 

राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग के सदस्यों की टीम ने दुर्ग जिले में छत पर रहने वाले बच्चों की जानकारी ली है। सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशानुसार टीम के सदस्यों में यहां दौरा किया है।

 राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग नई दिल्ली की इस टीम  में राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग के सलाहकार द्वय सुश्री अंशु शर्मा एवं सुश्री पूजा पुठेना शामिल थी। टीम के द्वारा जिला कार्यालय महिला एवं बाल विकास विभाग के प्रेरणा सभा कक्षा में जिला प्रशासन के विभिन्न सहयोगी विभागों के अधिकारियों की बैठक ली।

 बैठक में श्री विपिन जैन जिला कार्यक्रम अधिकारी महिला एवं बाल विकास विभाग, श्री जागेश्वर कौशल डिप्टी कलेक्टर, श्री संजय पुढीर, उप पुलिस अधीक्षक, डॉ जी एस ठाकुर मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी, श्री सुरेंद्र पांडे शिक्षा विभाग, श्री रमेश प्रधान श्रम पदाधिकारी, श्रीमती प्रीति डांगरे प्रभारी जिला बाल संरक्षण अधिकारी और अन्य अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित थे।

आयोग की टीम के द्वारा सर्वप्रथम विभागवार बच्चों के संरक्षण एवं सुरक्षा हेतु किए जा रहे कार्यों की जानकारी ली। श्रम पदाधिकारी द्वारा या अवगत कराया गया कि दुर्ग जिले में बालश्रमिकों के चिन्हांकन एवं बाल श्रम की रोकथाम हेतु नियमित रूप से अभियान चलाकर कार्यवाही की जा रही है, उन्होंने यहां भी अवगत कराया कि दुर्ग जिले में कलेक्टर डॉ. सर्वेष्वर नरेंद्र भुरे के निर्देश पर स्ट्रीट चिल्ड्रन के संरक्षण एवं रोकथाम हेतु टीम बनाकर प्रतिदिन अभियान चलाकर ऐसे बच्चों की पहचान एवं संरक्षण का कार्य किया जाता है। आयोग की टीम के द्वारा उपरोक्त प्रयास की सराहना करते हुए इसे देश के अन्य जिलों में भी लागू करने हेतु सुझाव दिए। शिक्षा विभाग द्वारा अवगत कराया गया कि जिले में कोविड-19 के दौरान माता-पिता को खोने वाले 900 से अधिक बच्चों को महतारी दुलार योजना के तहत पंजीकृत करते हुए उन्हें लाभान्वित किया जा रहा है। पुलिस विभाग द्वारा अवगत कराया गया कि मुस्कान अभियान के अंतर्गत गुमशुदा 10 बच्चों को खोज कर उनके परिवार के सुपुर्द किया गया तथा अभिव्यक्ति अभियान के तहत संकटग्रस्त बच्चों की मदद भी की जा रही है। मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी द्वारा अवगत कराया गया कि जिले में प्रत्येक शुक्रवार को दिव्यांग प्रमाण पत्र बनाया जाता है तथा रेस्क्यू किया गया बच्चों की तत्काल जांच कर, उन्हें आवश्यक चिकित्सकीय सुविधा उपलब्ध कराई जाती है। बैठक में जिला कार्यक्रम अधिकारी के द्वारा अवगत कराया गया कि जिले में 18 वर्ष से कम उम्र के बच्चों के लिए नशा मुक्ति केंद्र ना होने के कारण परेशानियां आती है, जिस पर आयोग की टीम के द्वारा प्रस्ताव भेजकर समुचित कार्यवाही करने का आश्वासन दिया गया। बैठक में आयोग की टीम के द्वारा बाल स्वराज पोर्टल पर समस्त स्ट्रीट चिल्ड्रन को पंजीकृत करने की जानकारी दी गई। इस दौरान बाल संरक्षण हेतु विभिन्न विभागों के मध्य बेहतर आपसी संबंधों की स्थिति की आयोग के द्वारा सराहना की गई तथा जिला प्रशासन के सहयोग से बाल संरक्षण हेतु चलाए जा रहे विभिन्न कार्य की भी प्रशंसा की गई। बैठक उपरांत आयोग के द्वारा एनसीसी तथा एनएसएस के बच्चों जिला बाल संरक्षण की टीम के सदस्यों तथा पुलिस विभाग के साथ टीम बनाकर जिले के शनि मंदिर , रेलवे स्टेशन पहुंचकर स्ट्रीट चिल्ड्रन का सर्वे भी किया। आयुक्त द्वारा शासकीय बालगृह का भी निरीक्षण किया गया तथा वहां निवासरत बच्चों से बातचीत भी की गई। साथ ही आयोग के सदस्यों के द्वारा किशोर न्याय अधिनियम के प्रावधानों के संबंध में संबंधित विभागों के मैदानी कर्मचारियों को निरंतर प्रशिक्षण प्रदान करने के सुझाव भी दिए।