पुच्छी थोड़ा सा कट गया .. पतंग कटी तो भागे बच्चे... मकर संक्रांति के अवसर पर दिखा पतंग उत्सव का अलग-अलग रंग

 भिलाई दुर्ग।

 असल बात न्यूज़।। 

मकर संक्रांति पर्व के अवसर पर हमारा शहर भी  पतंग उत्सव के रंग में रंगा नजर आया। युवाओं खासतौर पर बच्चों में पतंगबाजी के प्रति विशेष उत्साह दिखा। पतंगबाजी करते जगह-जगह बच्चों की धमाचौकड़ी देखने को मिली। जगह-जगह पतंग उत्सव का  अपना अलग रंग नजर आया । पतंगबाजी शुरू हुई तो बच्चों ने जमकर पेंच भी लड़ाई। जब पतंग कट गई तो बच्चे चिल्लाए पुच्छी थोड़ा सा कट गया है... 

एक जमाना था जब मकर संक्रांति यानी स्थानीय बोलचाल की भाषा में तिल संक्रांति के दिन सुबह स्नान ध्यान कर प्रसाद, दही, चूरा, तिलवा आदि खाकर दिनभर पतंगबाजी होती थी। इसमें अमीर-गरीब सभी घरों के जवान बच्चे, बुजुर्ग उत्साह के साथ पतंगबाजी करते थे। रंग-बिरंगी पतंगें खुले आकाश में जब इठलाती-बलखाती नजर आती है तो लोग प्रफुल्लित हो जाते हैं। पतंग को लेकर कई गाने लिखे गए हैं, जिन्हें बच्चे, जवान, बुजुर्ग और बालिकाएं भी अपनी सहेलियों के साथ बरबस ही गा उठती हैं। पतंग कटने पर सामूहिक स्वर में कटी-कटी रे डोर पतंग की.. गीत गुनगुना कर खुशी भी व्यक्त करते थे, परंतु समय गुजरने के साथ-साथ अब मकर संक्रांति के दिन बड़े बुजुर्ग पतंगबाजी से दूर हो गए और परंपरा बच्चे ही निर्वहन करते दिख रहे हैं।  मकर संक्रांति के दिन यहां भी छोटे-छोटे बच्चों ने  रंग-बिरंगी पतंग उड़ाई और पतंगबाजी का मजा लिया।