जिन्हें "सेल्फ टेस्ट" में, संक्रमित होने का पता चल रहा है, उनकी संख्या क्या आंकड़ों में आ रही है ?

रायपुर, दुर्ग, बिलासपुर।
असल बात न्यूज़।। 

चिंतन विश्लेषण/ जिंदगी बचाने के लिए 

        00  अशोक त्रिपाठी

जिले और राज्यों के पास कोरोना संक्रमितो के जो आंकड़े हैं, क्या वह गलत भी हो सकते हैं ? संक्रमितों की संख्या क्या बहुत अधिक है और उसके पूरे आंकड़े नहीं आ रहे हैं ? क्या सारे आंकड़े एकत्र नहीं हो पा रहे हैं ? कई ऐसे तथ्य सामने आ रहे हैं जिससे लग रहा है कि जो आंकड़े आ रहे हैं सामने हैं वह गलत हो सकते हैं। ऐसे हालात में ऐसी भी आशंका जाहिर की जा रही है कि हर जगह कोरोना संक्रमितो की संख्या ज्यादा हो सकती है, कोरोना से मृत लोगों की संख्या भी ज्यादा हो सकती है। असल में दूसरी लहर में लोगों ने कोरोना के संक्रमण से जिस तरह से संक्रमितों की तड़प तड़प कर, लाखों रुपए खर्च हो जाने के बावजूद, 'जान' जाते देखा है उससे लगभग सभी लोगों में दहशत है। सबसे बड़ी बात लोग इलाज के लिए हॉस्पिटल नहीं जाना चाहते। आम बोलचाल में यह भी कहा जाने लगा है कि जो इलाज के लिए हॉस्पिटल गया वह ही वापस लौट कर नहीं आया जिन्होंने घर में उपचार कराया वे लोग बच गए। इन सब हालात के चलते कोरोना के संक्रमण के छुपाने की प्रति बढ़ गई  है, लोग संक्रमित हो जाने की आशंका हो जाने पर उसका मान्यता प्राप्त संस्थानों में टेस्ट कराने से हिचकते हैं अथवा बचना चाहते हैं। लोग अपने संक्रमित हो जाने  को "रिकॉर्ड" में लाने से बचना  चाहते हैं। क्योंकि लगता है कि उनका संक्रमण रिकॉर्ड में आ जाने के बाद कई सारी दिक्कतें आ जाएगी। सबसे बड़ी बात कि लोग कंटेनमेंट जोन में आने से बचना चाहते हैं। ऐसे और कई सारे कारण हैं जिससे लोगों में अपने संक्रमण को छुपाने के प्रति दिख रही है। दूसरी बात अब ही मान्यता प्राप्त संस्थानों में टेस्ट कराने के बजाय सेल्फ टेस्ट की प्रवृत्ति बढ़ती जा रही है। सेल्फ टेस्ट की सुविधा उपलब्ध हो गई है। यह स्वाभाविक है कि जिन्हें" self-test" से संक्रमित होने का पता चल रहा है उनके रिकॉर्ड सरकारी आंकड़ों में नहीं आ रहे हैं। इन सब से लग रहा है कि कोरोना के सही आंकड़े सबके सामने नहीं आ रहे हैं। अब सवाल उठ रहा है कि सही और सारे आंकड़े सामने नहीं आ रहे हैं तो इससे आम लोगों समाज को क्या नुकसान हो सकता है। यह एक अहम महत्वपूर्ण सवाल है। 

कोविड-19 की पहली लहर, दूसरी लहर के बाद आम लोगों ने कोरोना के बारे में बहुत कुछ समझा है बहुत कुछ सीखा है। लोगों को यह साफ-साफ समझ आ गया है कि यह काफी आक्रमक है, जानलेवा है, खतरनाक साबित हो सकता है। एक बड़ा वर्ग बन गया है जो कि बिना किसी दूसरे प्रयासों के  कोरोना की गाइड लाइन का स्वयंमेव  पालन कर रहा है। ऐसे वर्ग को आप 24 घंटे corona की गाइडलाइन का पालन करते देख सकते हैं। वही हालत ऐसी भी है कि कोरोना से संक्रमित होने की आशंका मात्र से लोगों में अनजानी घबराहट बेचैनी शुरू हो जाती है। एक तनाव पैदा होता दिखता है। संक्रमित में ही नहीं, उसके पूरे परिवार में उथल-पुथल  शुरू हो जाती है, तनाव पैदा हो जाता है। लोग हॉस्पिटल जाकर टेस्ट करने से बचना चाहते हैं तो वहीं निजी अस्पताल में जाकर दवाइयां लेने की कोशिश की जाती है अथवा मेडिकल स्टोर से ही दवाई लगा कर ठीक होने की कोशिश की जाती है। यह सब हो रहा है तो आप समझ सकते हैं कि ऐसे संक्रमितो का रिकॉर्ड, सरकारी आंकड़ों में तो नहीं ही आएगा। असल में ऐसा ही, हो रहा है। कहा जा रहा है कि जिलों व राज्यों के पास इसी वजह से अभी जो संक्रमितों के जो आंकड़े हैं उनकी संख्या काफी कम है। सही आंकड़े आने पर यह संख्या काफी बढ़ सकती है। एक वरिष्ठ स्वास्थ्य विशेषज्ञ से यह पूछे जाने पर कि कोविड-19 के संक्रमितों के सारे आंकड़े सामने नहीं आ रहे हैं तो उससे क्या नुकसान हो सकता है उन्होंने कहा कि प्रदेश तौर पर यह ठीक दिख रहा है। लेकिन जब आंकड़े सटीक होते हैं सही होते हैं तो ऐसे में वैश्विक महामारी अथवा ऐसी ही आपात स्थितियों से निपटने के लिए जो योजना बनाई जाती है उसके परिणाम भी अच्छे आते हैं। अथवा योजनाओं और नीतियों के फेल होने का डर बना रहता है। 

एक जानकारी के अनुसार ओमीक्रान जिसके बहुत अधिक खतरनाक नहीं होने, अधिक जानलेवा नहीं होने का दावा किया गया है उसके संक्रमण के फैलाव से लोगों में इतनी अधिक चिंता नहीं है और लोग मेडिकल स्टोर से भी दवाई लेकर स्वस्थ होते दिख रहे हैं। महत्वपूर्ण बात यह भी है कि मेडिकल स्टोर्स में कोविड-19 के self-test उपकरण भी मिलने लगे हैं। जागरूक लोगों के द्वारा इनका बड़े पैमाने पर इस्तेमाल किया जा रहा है तथा ऐसे लोग इसी उपकरण से टेस्ट कर संक्रमित होने अथवा नहीं होने का पता कर रहे हैं। इससे टेस्ट के बाद जो संक्रमित मिलता है वह लोग करुण की जो दवाइयां बाजार में उपलब्ध है उन्हें
 खा रहे हैं तथा उससे ही उनके ठीक होने का दावा भी किया जा रहा है। ऐसे में यह स्वाभाविक है कि इन संक्रमितों की संख्या, आंकड़े सरकारी रिकार्ड में नहीं आने वाले हैं। और नहीं आ रहे हैं। यह भी कहा जा रहा है कि सेल्फ टेस्ट करने वालों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है जिनकी हॉस्पिटल में सरकारी रिकॉर्ड में संख्या दर्ज नहीं हो रही है। कहा जा रहा है कि यदि 20 हजार, लोग सरकारी आंकड़ों में संक्रमित हुए हैं तो कम से कम 10,000 लोगों की सेल्फ टेस्ट में पॉजिटिव रिपोर्ट आई है। यह आंकड़ा सरकारी रिकॉर्ड में कभी नहीं आने वाला है। क्योंकि इन लोगों ने  टेस्ट स्वयं किया है और दवाइयां लेकर स्वस्थ हुए हैं। अब यह अलग बात है कि स्वास्थ्य विभाग इस पर कितना ध्यान देता है कि इन लोगों को भी सरकारी आंकड़ों में आना चाहिए कि ये संक्रमित हुए थे। सही आंकड़े नहीं आने पर सारी रिपोर्ट असत्य होती जाएंगी।
यह बात भी सामने आई है कि कोविड-19 से जो पहली लहर में संक्रमित हुआ, वह दूसरी लहर में भी संक्रमित हो गया और अभी उसके तीसरी लहर में भी उसके संक्रमित होने की जानकारी सामने आई है।

ओ।मिक्रॉन वेरिएंट की राज्यवार स्थिति


क्रमांक

राज्य

ओमाइक्रोन मामलों की संख्या

छुट्टी दे दी गई/पुनर्प्राप्त/प्रवासित

1

महाराष्ट्र

1,738

932

2

पश्चिम बंगाल

1,672

22

3

राजस्थान Rajasthan

1,276

1,040

4

दिल्ली

549

57

5

कर्नाटक

548

26

6

केरल

536

140

7

उतार प्रदेश

275

6

8

तेलंगाना

260

47

9

तमिलनाडु

241

241

10

गुजरात

236

186

1 1

उड़ीसा

201

8

12

हरयाणा

169

160

13

आंध्र प्रदेश

155

9

14

उत्तराखंड

93

83

15

मेघालय

75

10

16

पंजाब

61

61

17

बिहार

27

0

18

जम्मू और कश्मीर (यूटी)

23

10

19

गोवा

21

21

20

झारखंड

14

14

21

मध्य प्रदेश

10

10

22

असम

9

9

23

छत्तीसगढ

8

8

24

अंडमान और निकोबार द्वीपसमूह

3

0

25

चंडीगढ़

3

3

26

लद्दाख

2

2

27

पुदुचेरी

2

2

28

हिमाचल प्रदेश

1

1

29

मणिपुर

1

1

 

कुल

8,209

3,109




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