राज्यपाल को झीरम घाटी जांच आयोग की रिपोर्ट सौंपी गई, कांग्रेस की है कई आपत्तियां, झीरम षड्यंत्र की नए सिरे से जांच करने तक की मांग

 

रायपुर ।

असल बात न्यूज।।

झीरम घाटी कांड की जांच कर रही न्यायिक आयोग के द्वारा रिपोर्ट अपनी रिपोर्ट राज्यपाल को सौंपी जाने के बाद प्रदेश में आरोप-प्रत्यारोप का दौर शुरू हो गया है। न्यायिक आयोग ने अपनी यह रिपोर्ट कल राज्यपाल को सौंपी है। प्रदेश कांग्रेस ने इस पर कहा है कि झीरम नरसंहार के लिए गठित न्यायिक आयोग द्वारा अपनी रिपोर्ट सरकार के बदले राज्यपाल को सौंप कर तय एवं मान्य प्रक्रिया का उलंघन किया  गया है। 

राज्यपाल सुश्री अनुसुईया उइके को झीरम घाटी जांच आयोग की रिपोर्ट सौंपी गई है। यह रिपोर्ट आयोग के सचिव एवं छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय के रजिस्ट्रार (न्यायिक) श्री संतोष कुमार तिवारी ने सौंपी। यह प्रतिवेदन 10 वाल्यूम और 4184 पेज में तैयार की गई है। यह आयोग छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश श्री प्रशांत कुमार मिश्रा के अध्यक्षता में गठित किया गया था। श्री मिश्रा छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश भी थे तथा वर्तमान में आंध्रप्रदेश उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश है। झीरम घाटी की घटना 25 मई 2013 को हुई थी।

 इस घटना की जांच के लिए आयोग का गठन 28 मई 2013 को किया गया था। उल्लेखनीय है कि बस्तर के झीरम घाटी में नक्सलियों ने तत्कालीन कांग्रेस विधायक श्री नंदकुमार पटेल के काफिले पर हमला किया था। जिसमें श्री नंदकुमार पटेल, श्री महेन्द्र कर्मा सहित अन्य लोग शहीद हो गए थे। इस घटना में पूर्व केंद्रीय मंत्री श्री विद्याचरण शुक्ल गंभीर रूप से घायल हुए थे। जिनका बाद में इलाज के दौरान निधन हो गया था। 

प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष मोहन मरकाम की झीरम कांड  पीड़ित परिवार के साथ आज प्रेसवार्ता ली और उन्होंने कहा है कि झीरम नरसंहार के लिए गठित जस्टिस प्रशांत मिश्र आयोग की ओर से रिपोर्ट सरकार के बदले राज्यपाल को सौंपना ठीक संदेश नहीं दे रहा है।सामान्यतया जब भी किसी न्यायिक आयोग का गठन किया जाता है तो आयोग अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंपती है।

उन्होंने इस दौरान के सवाल भी उठाए हैं और पूछा है कि   जब आयोग का गठन किया गया था तब इसका कार्यकाल 3 महीने का था तीन महीने के लिए गठित आयोग को जांच में 8 साल कैसे लग गया ? आयोग ने हाल ही में यह कहते हुए सरकार से कार्यकाल बढाने की मांग की थी कि जांच रिपोर्ट रिपोर्ट तैयार नही है इसमें समय लगेगा ।जब रिपोर्ट तैयार नही थी आयोग इसके लिए समय मांग रहा था फिर अचानक रिपोर्ट कैसे जमा हो गयी ?यह भी शोध का विषय है।ऐसा क्या है जो सरकार से छुपाने की कोशिश की जा रही है?


उन्होंने कहा है कि झीरम देश ही नहीं दुनिया का सबसे बड़ा राजनैतिक हत्या कांड था । इस हमले की पीछे की पूरी सच्चाई सामने आनी ही चाहिए ।कांग्रेस , हमेशा ही इस नरसंहार के षडयंत्र की जांच की मांग करती रही है।

उन्होंने इस दौरान कई आपत्तियां की है तथा कहा है कि कांग्रेस पार्टी राज्य सरकार से मांग करती है कि यदि झीरम कांड के व्यापक जांच के लिए एक वृहत न्यायिक जांच आयोग का गठन कर जीरम की षड्यंत्र की नए सिरे से जांच करवाया जाय । प्रदेश की जनता इस मामले के पीछे के षड्यंत्रकारियों को बेनकाब होते देखना चाहती है।