नवजात शिशुओं की बचेगी निमोनिया से जिंदगी, जब तुरंत देंगे ध्यान,जीरो से 5 वर्ष तक के बच्चों को" निमोनिया" से बचाने विशेष कार्यक्रम, लक्ष्मण दिखने पर तुरंत इलाज शुरू कर देने से बचाया जा सकता है हर तरह की परेशानियों से

 दुर्ग, पाटन ।

असल बात न्यूज़।।

लापरवाही, समय पर इलाज नहीं मिलने की वजह से देश में जीरो से 5 वर्ष तक के नवजात शिशुओ की निमोनिया जैसी बीमारी से प्रतिवर्ष बड़ी संख्या में मौत हो जाती है। स्वास्थ्य केंद्रों में निमोनिया से बचाव के लिए दवाइयां तो उपलब्ध है लेकिन संक्रमित शिशु को यह दवाइयां समय पर नहीं मिल पाती जिसकी वजह से उन्हें मौत के मुंह में जाने से से रोक पाना कठिन हो रहा है। इस बीमारी से बचाव के लिए लोगों में जागरूकता का अभाव  है। राज्य में अब निमोनिया से नवजात शिशुओ की जिंदगी  बचाने के लिए जागरूकता अभियान शुरू किया जा रहा है। इसी कड़ी में दुर्ग जिले के पाटन विकासखंड में "सांस " इनिशिएटिव एवं नवजात शिशु सप्ताह के अवसर पर विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। उम्मीद की जा रही है ऐसे कार्यक्रम आयोजित होने  से ग्रामीण जन में जागरूकता बढ़ेगी और नवजात शिशु की जान बचाई जा सकेगी।

वरिष्ठ चिकित्सा विशेषज्ञ बताते हैं कि नवजात शिशुओं में निमोनिया कई कारण से हो सकते हैं। सबसे बड़ा कारण सामने आया है कि जन्म लेने के समय कतिपय असावधानी तथा सावधानी बरतने के बावजूद भी नवजात शिशु  के शरीर में मुख तथा नाक के रास्ते  से गंदा पानी प्रवेश कर जाता है। इससे धीरे-धीरे संक्रमण फैलने लगता  है और यह निमोनिया का रूप ले लेता है। ऐसे संक्रमित बच्चों को सांस लेने में परेशानी होने लगती है। समय पर संक्रमित शिशुओं को समुचित इलाज नहीं मिलता तो यह उनके लिए जानलेवा बन जाता है। बहुत सारे नवजात शिशुओं की  मौत हो जाने का बहुत बड़ा कारण यह भी  है। विशेषज्ञ कहते हैं यह संक्रमण बहुत मामूली होता है लेकिन धीरे धीरे बढ़ता जाता है। और एक समय यह जानलेवा साबित होने लगता है। दिक्कत यह है कि ऐसी बीमारी , संक्रमण को लेकर समाज में गंभीरता नहीं है। कई तरह की कुरीतियां भी समाज  में व्याप्त है। कई जगह इसे दैवीय प्रकोप माना जाता है। ऐसे में नवजात शिशु  के बचाव के लिए समुचित उपाय नहीं किए जाते। जबकि संक्रमण के फायदे की शुरुआत के दौरान समझे ध्यान दिया जाए तो नवजात शिशुओ की जिंदगी पूरी तरह से बचाई जा सकती हैं। छत्तीसगढ़ अंचल के विभिन्न इलाकों में ऐसे संक्रमण का लक्षण दिखने पर इस बीमारी को डाबा कहा जाता है। इसके इलाज में भी लापरवाही बरती जाती है।

निमोनिया का संक्रमण फैलने पर बच्चों में इसके लक्षण तुरंत नजर आने लगते हैं। सांस, धड़कन तेज चलाती है। इसी समय लक्ष्मण देखकर बच्चों को पर्याप्त उपचार मिल जाए तो उनकी जिंदगी के लिए कोई खतरा नहीं रहता। पाटन विकासखंड के डॉ आशीष शर्मा बताते हैं, हमारे यहां मितानिन स्तर पर निमोनिया से बचाव के लिए दवाइयां उपलब्ध कराई गई हैं। मितानिने नवजात शिशु पर नजर रखती हैं। निमोनिया का संक्रमण दिखने पर मितानिनों को इसकी जानकारी दी जाए तथा उनसे समुचित दवाई लेकर और निर्देशों का पालन कर बच्चे की जान बचाई जा सकती हैं।

बच्चों में निमोनिया के लक्षण में सर्दी खांसी,बुखार के साथ श्वसन का तेजी से चलना ( जन्म से 2 माह तक आयु के बच्चों में 60 प्रति मिनट से अधिक, 2माह से 1 वर्ष आयु के बच्चों में 50 प्रति मिनट से अधिक,  1वर्ष से 5 वर्ष से अधिक आयु के बच्चों  में 40 प्रति मिनट से अधिक) , छाती में पसली का धंसना आदि प्रमुख लक्षण हैं। यदि इन लक्षणों के साथ उल्टी होना, झटके आना, बेहोशी, भोजन/स्तनपान में अरुचि आदि हो तो गंभीर निमोनिया के लक्षण हैं।

बीएमओ डॉ आशीष शर्मा ने जन जागरण अभियान शिविर के उद्घाटन के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम के दौरान  बताया कि नवजात बच्चों एवं 5 वर्ष की आयु तक के बच्चों में *निमोनिया* बीमारी के कारण अनेक बच्चे अपना जीवन खो देते हैं। *SAANS* social Awareness and action to Neutralize Pneumonia Successfully अभियान के तहत समुदाय में विशेषकर छोटे बच्चों के माता पिता को निमोनिया के लक्षण की जानकारी पहुंचाना, बचाव के उपाय, एवं निमोनिया होने पर तत्काल नजदीक के उपस्वास्थ्य केंद्र स्तर पर, मितानिनों के पास तत्काल एंटीबायोटिक की प्रथम खुराक लेना, एवं उचित उच्च स्वास्थ्य केंद्र रेफेर कर समुचित उपचार के बारे में जागरूकता की जाएगी।

  सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पाटन में आयोजित विकास खंड स्तरीय कार्यक्रम में जनपद पंचायत पाटन के उपाध्यक्ष देवेंद्र चंद्रवंशी उपस्थित थे। इस अवसर पर अपने उद्बोधन में उन्होंने कहा कि   पर्याप्त देखरेख से निमोनिया से नवजात बच्चों की जान बचाई जा सकती है। बच्चों के  स्वास्थ्य की सुरक्षा के लिए आयुर्वेदिक जन जागरण अभियान को माता पिता, परिवार के साथ साथ, मितानिनों, स्वास्थ्य विभाग , पंचायत विभाग, महिला बाल विकास विभाग एवं शिक्षा विभाग एवं अन्य विभाग तथा जनप्रतिनिधियों के समन्वय एवं सहयोग से सफलता मिल सकेगी।

सीडीपीओ महिला बाल विकास विभाग  सुमित गंडेचा ने इस अवसर पर बताया कि विभाग के द्वारा नवजात शिशुओं की जिंदगी सुरक्षा के लिए निमोनिया नहीं तो बचपन सही कार्यक्रम चलाया जा रहा है। इसमें  आँगनवाड़ी कार्यकर्ताओं के माध्यम से मितानिनों एवं ग्रामीण स्वास्थ्य संयोजकों को  साथ सांस प्रोग्राम की  गतिविधियां की जानकारी दी जा रही है। 

बीईटीओ श्री बी एल वर्मा ने बताया कि बच्चों को समग्र टीकाकरण सारणी के अनुसार पेंटावैलेंट, पीसीवी, मिसल्स आदि उपलब्ध सभी वैक्सीन भी निमोनिया से बचाव करती है। बच्चों का पूर्ण एवं सम्पूर्ण टीकाकरण समय पर करवाएं।

बीपीएम श्रीमती पूनम साहू ने अभियान प्रबंधन की जानकारी दी। श्रीमती चंद्रकांता साहू ने प्रसव के दौरान प्रसूता माता एवं नवजात देखभाल एवं जन्म के एक घंटे के भीतर स्तनपान पर व्याख्यान दिए। कार्यक्रम में विकासखंड पाटन के चिकित्सक,पर्यवेक्षकगण, बीडीएम श्री टीमन साहू, श्री लक्ष्मीनारायण, श्री विवेक,श्री जीवन श्री कृष्ण कुमार यादव आदि अधिकारी कर्मचारी उपस्थित थे।