ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार का माध्यम बनेंगे एग्री बिजनेस इन्क्यूबेशन केन्द्र: डाॅ. सेंगर

 

रफ्तार-एग्री बिजनेस इन्क्यूबेशन प्रशिक्षण का दीक्षांत समारोह सम्पन्न


रायपुर ।

असल बात न्यूज़।।

  इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय द्वारा कृषि के क्षेत्र में उद्यमिता विकास को बढ़ावा देने के लिए कृषि एवं संबंधित क्षेत्रों में स्टार्टअप स्थापित करने हेतु रफ्तार-एग्री बिजनेस इन्क्यूबेशन सेन्टर योजना के तहत संचालित कोहर्ट 3.0 ;ब्वीवतज 3ण्0द्ध के आॅनलाइन प्रशिक्षण कार्यक्रम का दीक्षान्त समारोह आयोजित किया गया।

 दीक्षान्त समारोह के मुख्य अतिथि इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय के कुलपति डाॅ. एस.एस. सेंगर थे। डाॅ. सेंगर ने सफल प्रशिक्षणार्थियों को प्रमाणपत्र वितरित किये और उनके उज्ज्वल भविष्य के लिए शुभकामनाएं दीं। इस अवसर पर इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय के कुलसचिव, श्री जी.के.निर्माम, निदेशक विस्तार डाॅ. आर के बाजपेयी, अधिष्ठाता छात्रकल्याण डाॅ. डाॅ. जी.के. श्रीवास्तव, कृषि अभियांत्रिकी महाविद्यालय, रायपुर के अधिष्ठाता डाॅ. वी.के. पाण्डेय, सह संचालक अनुसंधान डाॅ. विवेक त्रिपाठी एवं सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्रालय के सहायक संचालक डाॅ. के.के. गोयल उपस्थित थे। रफ्तार-एग्री बिजनेस इन्क्यूबेशन सेन्टर योजना के तहत अभिनव (प्री सीड) और उद्भव (सीड स्टेज) कार्यक्रम के अंतर्गत 38 स्टार्टअप्स सम्मिलित हुए थे।

दीक्षान्त समारोह को संबोधित करते हुए डाॅ. एस.एस. सेंगर ने कहा कि भारतवर्ष की 70 प्रतिशत जनसंख्या ग्रामीण क्षेत्रों से आती है जहां की मुख्य आजीविका कृषि एवं संबंधित क्षेत्रों पर आधारित है। इन ग्रामीण क्षेत्रों में बेरोजगारी की वजह से युवाओं की पलायन की समस्या वृहद होती जा रही है। उन्होंने कहा कि रफ्तार-एग्री बिजनेस इन्क्यूबेशन सेन्टर योजना के तहत इन्ही ग्रामीण क्षेत्रों में उद्यमियों के विकास पर जोर दिया जा रहा है जिससे ग्रामीण क्षेत्रों मंे रोजगार उत्पन्न हो सके। इस  योजना का लाभ समाज के सभी वर्गो को होना चाहिए एवं सुदूर अंचल तथा आदिवासी ग्रामीण क्षेत्र भी इससे लाभान्वित होने चाहिए। डाॅ. सेंगर ने उद्यमियों से आव्हान किया कि वे खाद्य प्रसंस्करण इकाई की सहायता से कृषकों एवं उत्पादकों को उनके उत्पादों का उचित मूल्य प्रदान करने के क्षेत्र में हर संभव प्रयास करें। एग्री इन्क्यूबेशन सेन्टर के मुख्य कार्यपालन अधिकारी डाॅ. हुलास पाठक ने राबी योजना के तहत संचालित अभिनव एवं उद्भव कार्यक्रमों की झलकियां प्रस्तुत की। इस अवसर पर रफ्तार-एग्री बिजनेस इन्क्यूबेशन सेन्टर योजना के अर्धवार्षिक संवाद पत्र वार्ता का विमोचन किया गया। उद्यमियों द्वारा प्रशिक्षण के दौरान प्राप्त अनुभव साझा किये गये। डाॅ. के.के. गोयल ने उद्यमियों सेे आव्हन किया कि वे अपने उद्यमों को पेटेन्टस, ट्रेडमार्क एवं सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्रालय में पंजीयन करवाएं। उन्होंने प्रतिभागियों को सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्रालय की योजनाओं का लाभ लेने के लिए प्रोत्साहित किया। राबी योजना के सहायक प्रबंधक श्री अभिजीत शर्मा ने अतिथियों के प्रति आभार व्यक्त किया। 

उल्लेखनीय है कि इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय में रफ्तार-एग्री बिजनेस इन्क्यूबेशन सेन्टर में स्टार्टअप की स्थापना के इच्छुक नवाचारी उद्यमियों को ढ़ांचागत सुविधाएं, तकनीकी सहयोग एवं मार्गदर्शन, कौशल उन्नयन प्रशिक्षण दिया जा रहा है जिससे कि हितग्राहियों को नये उद्योग-व्यवसाय स्थापित करने में मदद मिलेगी। उन्हें वित्तीय व्यवस्था तथा मार्केट लिंकेज उपलब्ध कराने हेतु भी आवश्यक सहयोग एवं मार्गदर्शन दिया जाता है। एग्री बिजनेस इन्क्यूबेशन सेन्टर द्वारा कृषि संबंधित स्टार्टअप को बढ़ावा देने के लिए दो कार्यक्रम अभिनव 3.0 एवं उदभव 3.0 शुरू किये गये हैं। अभिनव कार्यक्रम के तहत युवाओं से कृषि एवं संबंधित क्षेत्रों में ऐसे नवाचारी विचार आमंत्रित किये जा रहे हैं जिस पर आधारित स्टार्टअप उद्योग शुरू किया जा सकते हैं। चयनित नवाचारी विचारों के लिए पांच लाख रूपये की प्रोत्साहन राशि दी जाती है। इसी प्रकार उदभव कार्यक्रम के तहत उन उद्यमियों से प्रस्ताव आमंत्रित किये गये हैं जिनका कम्पनी के रूप में पंजीयन हो चुका है जिनके पास स्टार्टअप संबंधी कोई प्रारंभिक उत्पाद उपलब्ध है जिसका वे व्यवसायीकरण करना चाहते हैं। चयनित प्रस्तावों के व्यवसायीकरण हेतु पच्चीस लाख रूपये की वित्तीय सहायता उपलब्ध करायी जाती है।