राज्य में पेट्रोल पर वैट कम करने की चर्चाओ के बीच वाणिज्य कर मंत्री टी एस सिंह देव ने व्यवसायिक संगठनों के साथ बैठक की , कई महत्वपूर्ण सुझाव आए हैं सामने

 *जीएसटी मंत्री श्री टी एस सिंहदेव ने नवीन विश्राम भवन में की व्यावसायिक संगठन प्रतिनिधियों के साथ बैठक

*राजस्व कमी की पूर्ति हेतु कर की दर का युक्ति-युक्त करण समेत व्यवसायी और शासन के मध्य सामंजस्य पर हुई विस्तृत चर्चा

रायपुर ।

असल बात न्यूज।।

राज्य में पेट्रोल पर वैट कम करने की चर्चा के बीच वाणिज्य कर मंत्री टी एस सिंह देव ने आज यहां व्यवसायिक संगठनों के साथ बैठक की तथा  विभिन्न मुद्दों पर चर्चा की।

 इस बैठक में राजस्व कमी की पूर्ति हेतु कर की दर का युक्ति-युक्त करण करने के लिए व्यावसायिक संगठनों के प्रतिनिधियों के सुझाव आमंत्रित किये, जिसमें 6 सत्रों में छत्तीसगढ़ चेम्बर ऑफ कामर्स एण्ड इण्डस्ट्रीज रायपुर, कंफेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स, रायपुर आयरन एण्ड स्टील ट्रेड एसोसिऐशन, छत्तीसगढ़ स्टील रि-रोलर्स एसोसिऐशन, छत्तीसगढ़ आयरन एण्ड स्टील एजेन्ट एसोसिऐशन, छत्तीसगढ़ मिनी स्टील प्लांट एसोसिऐशन, रविभवन व्यापारी संघ, छत्तीसगढ़ कम्प्यूटर एण्ड मीडिया डीलर्स एसोसियेशन, छत्तीसगढ़ इलेक्ट्रानिक्स ट्रेडर्स एसोसियेशन, छत्तीसगढ़ मोबाईल एसोसियेशन, डुमरतराई बिजनेस डेवलपर्स, डूमरतराई व्यापारी कल्याण महासंघ, रायपुर एफएमसीजी डिस्ट्रब्यूटर एसोसिएशन, रायपुर टिम्बर मर्चेन्ट एसोसिएशन, रायपुर प्लायवुड ट्रेडर्स एसोसिएशन, छत्तीसगढ़ टिम्बर व्यापारी संघ, मार्बल एण्ड टाईल्स व्यवसायिक संघ, रायपुर क्रशर संचालक एसोसिएशन, थोक अनाज व्यवसायी कल्याण संघ, रायपुर दाल मिल एसोसिएशन, छत्तीसगढ़ प्रदेश राईस मिलर्स एसोसियेशन के प्रतिनिधि आमंत्रित थे।

पहले सत्र में जीएसटी मंत्री श्री टी एस सिंहदेव ने व्यावसायिक संगठन के प्रतिनिधियों को संबोधित करते हुए कहा कि कोरोना आने के बाद अर्थव्यवस्था के ऊपर बड़ा प्रभाव पड़ा है, इस दरमियान जीएसटी कलेक्शन और टैक्स कलेक्शन का भार सीधा-सीधा राज्यों पर पड़ा ऐसे ही राज्यों को और विशेष करके छत्तीसगढ़ को बड़ा नुकसान हुआ जैसे कि अनुमान लगाते हैं कि जो वैट लगता था और अब जो जी.एस.टी. लग रहा है सामान्य दर टैक्स होने के बावजूद भी 5% वैट था और अभी 5% जी.एस.टी. है तो आधा आधा हिस्सा बंट जा रहा है। राज्य को अकेले 3 वस्तुओ (धान, कोयला और लौह) में ₹2500 करोड़ का नुकसान है। उन्होंने कहा कि आने वाले समय मे पेट्रोलियम प्रोडक्ट भी जीएसटी में आ सकते हैं। जीएसटी में आने के बाद अगर राज्य सरकार में अपना 25% वैट के हिसाब से आमदनी होनी है अगर 28% जीएसटी में रखा गया तो राज्य सरकार को 14% ही मिलेगा राजस्व मिलेगा बाकी 14% केंद्र सरकार रखेगी। हर तरफ से राज्यों को ही अपनी व्यवस्था देखनी पड़ेगी संतुलन और राज्य के लिए काम करने में पहुंच ज्यादा सीमाएं रखनी पड़ेगी और जीएसटी में आने के बाद भी छत्तीसगढ़ को बहुत ज्यादा व्यापक प्रभाव पड़ेगा। जीएसटी मंत्री श्री सिंहदेव ने आगे कहा कि प्रोटक्टेड इनकम का भी प्रावधान हट जाने से छत्तीसगढ़ में जीएसटी रेजीम का बहुत विपरीत प्रभाव पड़ा है और आने वाले समय में और पड़ सकता है क्षतिपूर्ति का भी प्रावधान हट जाएगा तो राज्य की आय अगर हर साल 7% बढ़ती है पिछले साल की तुलना में तो 7% मिलता है वह भी नहीं मिलेगा 9% बढ़ती थी तो 5% मिलता था  14% का जो गारंटी था वह भी नहीं मिलेगा। देश के लिए सभी के बीच में जो बात आई 5-6 स्लैब न्यूट्रल रेट 0%- 5% - 12% - 18% - 28%  पांच प्रकार के जो टैक्स रेट लागू हुए। पहले 2 सालों में तीसरे साल में कुछ हद तक रेवेन्यू लॉस हुआ क्षतिपूर्ति कुछ नहीं हुआ, एक बड़ा कारण यह है कि छूट जो कंज्यूमर को देने की बात उठी थी उसका पूरा भार कंजूमर पर ही आ रहा है गवर्नमेंट जो रेट लगाएगी वह कस्टमर देगा। उन्होने कहा कि अब बात यह हो रही है कि रेजीम अत्यधिक प्रोटेक्टेड इनकम का प्रावधान नहीं रह जाएगा और इस पर जीएसटी काउंसिल में चर्चा हो चुकी है। इसके उपरांत जीएसटी मंत्री श्री सिंहदेव ने कहा कि छत्तीसगढ़ में व्यवसायियों, शासन और नागरिको के लिए व्यवस्था को बेहतर बनाने की दिशा में प्रतिनिधियों के विचार अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि व्यावसायिक संगठन प्रतिनिधियों के सुझावों का सहयोग लेने के लिए आज हम सभी साथ बैठे हैं, आप सभी से आग्रह है कि जीएसटी से संबंधित सुझाव अगले 2-3 दिनों में लिखित तौर पर आप सभी का सहयोग अपेक्षित है।

पहले सत्र में छत्तीसगढ़ चेंबर ऑफ कॉमर्स की ओर से कार्यकारी अध्यक्ष राजेंद्र जग्गी ने पत्र सौंपा और अपने सुझाव व्यक्त करते हुए कहा कि एक ही उत्पाद के लिए अलग-अलग टैक्स स्लैब बेहद जटिलता उत्पन्न करता है, उन्होंने उदाहरण देकर बताया कि ₹1000 से कम लागत के कपड़े में 5% एवं ₹1000 से ज्यादा की लागत की कपड़े में 12% जीएसटी का स्लैब निर्धारित है। इसी प्रकार कृषि से जुड़े उपकरणों में 12% और 18% के दो स्लैब और साईकल में 12%, 18% और 28% में तीन स्लैब हैं जिनका सरलीकरण करना आवश्यक है। उन्होंने आगे कहा कि व्यापारी का अधिकांश समय अकाउंटिंग में उलझने की वजह से बर्बाद होता है यदि यह प्रक्रिया सरल हो जाएगी तो वह समय व्यवसाय को बढ़ाने में लगेगा जिससे शासन को अधिक कर उपलब्ध किया जा सकेगा।

इसके उपरांत अगले सत्र में सराफा संघ के प्रतिनिधियों ने कहा कि जीएसटी आने के बाद तो व्यापारी को सुलभता मिली है। जिसमें वन टाइम टैक्स देकर सेटल हो जाता है, अन्यथा पहले अलग-अलग राज्य में अलग-अलग टैक्स देना पड़ता था। सराफा व्यापारियों में सभी लोग रिटर्न भरते हैं और एसोसिएशन लेवल पर भी अवेयरनेस ला रहे हैं। इसके अतिरिक्त उन्होंने सुझाव व्यक्त करते हुए कहा कि नियमों में कुछ परिवर्तन धारा 411 और 412 को लेकर है। इसके साथ ही शंकर बजाज ने अपना सुझाव व्यक्त करते हुए कहा कि कांच की जो बोतल रिसायकिल होती है उसमें 5% टैक्स लगता है अगर उसको पैक्ट बोतल में कन्वर्ट किया जाए तो उसका 18% जीएसटी लगता है। यह परिवर्तन पूरे देश में यह लागू हो गए हैं लेकिन छत्तीसगढ़ में लागू नहीं हुआ है। इस परिवर्तन से राज्य सरकार को लगभग 13% अधिक जीएसटी संग्रहण का लाभ मिलेगा।

इसके साथ ही कैट के व्यावसायिक संगठन प्रतिनिधियों ने सुझाव दिए कि कंसम्पशन दर, आयकर रिटर्न की प्रक्रिया और जीएसटी स्लैब में सरलीकरण किया जाये। प्लाईवुड एसोसिएशन जीएसटी स्लैब के सरलीकरण का सुझाव रखा। कंप्यूटर एसोसिएशन एवं मोबाइल एसोसिएशन ने संयुक्त रूप से ऑनलाइन खरीदी एवं उस पर टैक्स की प्रक्रिया के विषय में पारदर्शिता को लेकर अपना सुझाव दिया। इसके उपरांत अनाज व्यवसाय संघ व राइस मिल संघ के प्रतिनिधियों ने अपने सुझाव व्यक्त करते हुए कहा कि राइस मिल कस्टम मिलिंग लगभग शत प्रतिशत छत्तीसगढ़ शासन के धान को चावल में परिवर्तित करने का काम करती है, जिसे टैक्स से मुक्त रखना चाहिए। इस पूरी बैठक में उपस्थित रहे जीएसटी मंत्री श्री टी एस सिंहदेव ने सभी के सुझावों को ध्यान से सुना एवं जिनके सुझाव लंबित रह गए हैं उनसे अगले दो-तीन दिनों में लिखित सुझाव देने का आग्रह किया जिससे कि राज्य सरकार केंद्र सरकार के समक्ष व्यवसायिक संगठन के प्रतिनिधियों की बात रख सके इस अवसर पर जीएसटी विभाग के प्रमुख सचिव गौरव द्विवेदी और जीएसटी कमिश्नर समीर विश्नोई समेत अन्य अधिकारी उपस्थित रहे।