बजट के संकट के चलते राज्य में केम्पा के काम की बुरी हालत,, काम आगे जारी रखे जाएं अथवा नहीं पर निर्णय लेने की नौबत, आगामी 17 नवंबर को executive body की बैठक में हो सकता है इस पर बड़ा फैसला , वन प्रबंधन के लिए काम करने वाली बड़ी योजना राज्य में मृत्यु के कगार पर

 

00 राज्य में कैंपा की योजनाएं लगातार उपेक्षा के शिकार, लगातार होता जा रहा है बजट कम 

00 बजट की राशि नहीं मिल रही है विभाग को, जिससे कई काम आधे अधूरे में अटक रहे

00 मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की की महत्वकांक्षी योजना नरवा के कार्य भी हो रहे हैं प्रभावित 

00 मजदूरी नहीं मिली तो कैंपा के मजदूरों को अंधेरे में मनाना पड़ा दीप पर्व 

00 काम हुए हैं लेकिन भुगतान नहीं, जिससे करोड़ों रुपए की देनदारी भी

रायपुर।

असल बात न्यूज़।।

0 विशेष संवाददाता

राज्य में विकास की जो गाड़ी दौड़ रही है लग रहा है कि सभी तरफ एक समान नहीं चल रही है। कई क्षेत्रों में विकास के कार्य काफी तेज गति से होते नजर आ रहे हैं लेकिन कई क्षेत्रों मे यह काफी पिछड़ गया दिख रहा है और यहां विकास की गाड़ी पटरी से उतर गई नजर आ रही है। ऐसा ही हाल यहां कैंपा की योजनाओ में भी नजर आ रहा है। जानकारी के अनुसार कैंपा की योजनाओं के संचालन के लिए राज्य को बड़े लंबे समय से बजट के अभाव से जूझना पड़ रहा है। हालत  इतनी बिगड़ गई है कि पैसा नहीं है इसलिए इसकी कई योजनाएं ठप्प सी पड़ गई हैं। कैंपा के कार्यों से जुड़े मजदूरों को पिछले दो-तीन महीने से मजदूरी नहीं मिली है तो इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि इन योजनाओं के कार्यों की गति कितनी तेज चल रही होगी। मजेदार बात है कि राज्य में राज्य सरकार और मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की नरवा एक महत्त्व महत्वकांक्षी योजना है और  इसके तमाम बड़े काम भी कैम्पा के तहत हो रहे हैं लेकिन बजट नहीं होने से अब यह सारे काम अटकने लगे हैं।जब मुख्यमंत्री की यह महत्वकांक्षी योजनाएं ठप्प सी पड़ने लगी हैं तो यह कहा ही जा सकता है कि राज्य में विकास की रफ्तार सभी तरफ एक समान नहीं है। बजट के अभाव में कहा जा रहा है कि हालत इतनी बिगड़ गई है कि राज्य में कैंपर की योजनाओं का संचालन किया जाए कि नहीं इस पर आगामी 17 नवंबर को फैसला होने वाला है।

यह उल्लेखनीय है कि कैम्पा  की योजनाओं से वन संरक्षण, वन्यजीव प्रबंधन और देखरेख, उन्नयन के बड़े काम किए जाते हैं।इससे ही वन क्षेत्रों में जल ग्रहण प्रबंधन की योजना भी बनाई गई है। वन क्षेत्रों के लिए पानी कितना महत्वपूर्ण है यह आसानी से समझा जा सकता है। छत्तीसगढ़ राज्य बड़ा वन क्षेत्र वाला इलाका है और यहां कैंपा की योजना की काफी अधिक आवश्यकता महसूस की जाती रही है, और पिछले वर्षों में इस योजना से कई सकारात्मक काम किए गए हैं। इसके अच्छे परिणाम भी देखने में आए हैं। पिछले वर्षों के दौरान इसकी राशि से राज्य के विभिन्न इलाकों में सघन क्षेत्र वाले इलाकों में और प्रबंधन तथा संरक्षण के लिए बड़े काम किए गए हैं। बताया जा रहा है कि कैंपर मच की योजनाओं के संचालन के लिए केंद्र सरकार से पिछले वर्षों में बड़ी राशि मिली है लेकिन कहा जा रहा है कि इस राशि का इसकी योजना के संचालन के लिए आवंटन नहीं किया गया है जिससे इसकी योजनाएं पिछड़ती जा रही हैं।

हालात ऐसे बिगड़ते जा रहे हैं, दयनीय होते जा रहे हैं कि मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की महत्वकांक्षी योजना नरवा प्रोजेक्ट के कार्य भी बजट के अभाव में अटक गए हैं । यह माना जाता है कि वन प्रबंधन में नरवा प्रोजेक्ट की अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका है। इसके तहत वन क्षेत्रों में नदी नालों पर स्टॉप डेम,बोल्डर चेक डैम, तलाब इत्यादि बनाए जा रहे हैं और उनके संधारण का कार्य किया जा रहा है। इससे वन क्षेत्रों में जानवरों को तो पानी मिल ही जाता है जलस्तर बढ़ने से वन क्षेत्रों में नामी में बढ़ोतरी होती है जो कि वन्यजीवों के लिए अत्यंत जरूरी है।  एक बार वृक्षारोपण किया जाता है तो उसके मेंटेनेंस के लिए भी करीब 9 साल तक देखने की जरूरत पड़ती है। इसको आगे बढ़ाने में नरवा योजना की उल्लेखनीय भूमिका मानी जाती है। बताया जा रहा है कि अभी नरवा के तहत चल रहे तमाम कार्य बजट के कारण अटकने लगे हैं।

 सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार केंद्र सरकार के द्वारा कैंपा मद में अगस्त 2019 के दौरान लगभग 5 हजार 591 करोड रुपए की राशि आवंटित की गई थी। इस राशि से आगामी 10 वर्षों के लिए केंपा योजना के तहत विभिन्न कार्य किए जाने थे। कहा जा रहा है कि राज्य में कैंपा को यह राशि प्राप्त नहीं हुई जिसकी वजह से इसके काम अटकने लगे हैं। बताया जाता है कि राज्य में कैंपा की योजनाओं के संचालन के लिए वर्ष 2019,20 में 500 करोड़ रुपए, वर्ष 2020, 21 में 700 करोड रुपए और वर्ष 2022 के दौरान अभी तक सिर्फ 325 करोड रुपए मिले हैं। इससे साफ साफ नजर आ रहा है कि यह राशि कैंपा मद के लिए हर साल दर साल कम होती जा रही है। यह आसानी से समझा जा सकता है कि पर आधारित राशि  से ही बजट नहीं हासिल होगा तो काम कैसे किया सकेंगे। बजट की राशि नहीं मिलने से इतना अधिक नुकसान हुआ है कि यहां जो काम हुए हैं उसमें भी काम करने वाले मजदूरों को  उनकी मजदूरी नहीं दिय सकी है। बताया जाता है कि दीपावली त्यौहार के अवसर पर भी मजदूरों को उनकी मजबूरी नहीं दी गई और यहां काम करने वाले को अंधेरे में अपना दीप पर्व मनाना पड़ा है।

हालात बिगड़ते जा रहे हैं। ऐसे में कहा जाने लगा है कि राज्य में कैंपा का काम आगे किया जा सकेगा कि नहीं इस पर अब फैसला लेने की नौबत आ गई है। प्राप्त जानकारी के अनुसार आगामी 17 नवंबर को कैंपा की योजना के संचालन के संबंध में अत्यंत महत्वपूर्ण बैठक होने जा रही है। कैंपा क्रियान्वयन समिति की एजुकेटिव बॉडी की इस बैठक में प्रधान मुख्य वन संरक्षक, सचिव आवास एवं पर्यावरण, सचिव वित्त एवं योजना विभाग, सचिव पंचायत एवं ग्रामीण विकास, सचिव राजस्व, सचिव कृषि, सचिव आदिम जाति कल्याण विभाग, सचिव विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग जैसे महत्वपूर्ण प्रतिनिधि हिस्सा लेंगे। इस बैठक में वर्ष 2022, 23 के एनुअल प्लान ऑपरेशन पर चर्चा होगी। कहा जा रहा है कि कैंपा क्रियान्वयन समिति को अभी कैंपा के कार्यो के संचालन के लिए अभी जिस तरह से बजट के संकट से जूझना पड़ रहा है, काम अटक रहे हैं  उससे उसमें इससे बैठक में यह भी निर्णय लिया जा सकता है कि कैंपा के कार्यों को राज्य में आगे संचालित किया जाए अथवा नहीं। वस्तु स्थिति यह है कि कैंपा के कार्यों का संचालन नहीं होगा तो वन प्रबंधन, वन्यजीव प्रबंधन को बड़ा नुकसान होने की आशंका तो बढ़ेगी ही और  स्वाभाविक तौर  पर बनी जीवो को कई तरह के खतरे से जूझना पड़ेगा। उम्मीद यह भी की जा रही की कैंपा के लिए बजट की व्यवस्था की जाने लगेगी।