स्वरुपानंद महाविद्यालय में आजादी का अमृत महोत्सव एवं कुष्ठ मुक्त भारत कार्यक्रम का आयोजन

 

भिलाई।

असल बात न्यूज।।

स्वामी श्री स्वरुपानंद सरस्तवती महाविद्यालय हुडको, भिलाई में शिक्षा एवं कला विभाग व चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग,-दुर्ग के संयुक्त तात्वावधान में गॉंधीजी के 152वी जयंती के अवसर पर आजादी के अमृत महोत्सव विषय पर राष्ट्रीय प्रतियोगिता एवं विविध अंतर महाविद्यालयीन प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। राष्ट्रपिता महात्मा गॉंधीजी का सपना था भारत कुष्ठ मुक्त हो राष्ट्रीय कुष्ठ मुक्त कार्यक्रम के अंतर्गत ‘कुष्ठ मुक्त भारत’ विषय पर कुष्ठ प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिता का आयोजन किया गया।

कार्यक्रम संयोजिका डॉ. पूनम शुक्ला ने कहा आयोजन का मुख्य उद्देश्य युवा पीढ़ी को आजादी के इतिहास स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों से परिचित करा उन्हें राष्ट्रप्रेम एवं राष्ट्रभक्ति का नवीन चेतना से परिपूर्ण करना है। साथ ही विद्यार्थियों को कुष्ठ मुक्त भारत बनाने हेतु जागरुक करना।

महाविद्यालय के सीओओ डॉ. दीपक शर्मा ने कहा कि इस प्रकार के कार्यक्रमों के आयोजन के द्वारा हम अपने देश को आजादी दिलाने वाले स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों के त्याग एवं बलिदान को याद कर सकेंगे। गॉंधीजी के सपने कुष्ठ मुक्त भारत को पूर्ण करने हेतु हमें जन-जन को जागृत करना है।

महाविद्यालय की प्राचार्य डॉ. हंसा शुक्ला ने कहा कि महात्मा गॉंधी युवा पीढ़ी के आदर्श माने जाते है, उनके जीवन दर्शन एवं आदर्शो को युवा आत्मसात करके राष्ट्र एवं समाज की उन्नति एवं विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते है।

महाविद्यालय की उपप्राचार्य डॉ. अज़रा हुसैन ने कहा कि गॉंधीजी भारत को कुष्ठ रोग से मुक्त बनाना चाहते थे। प्रश्नोत्तरी कार्यक्रम के माध्यम से विद्यार्थी कुष्ठ रोग के भयावहता के प्रति जागरुक होंगे व उसे दूर करने का प्रयास करेंगे। 

कार्यक्रम में महाविद्यालय के एनएसएस विद्यार्थियों ने अपनी सहभागिता दी एवं कुष्ठ रोग के प्रति लोगों को जागरुक किया। प्रश्नोत्तरी के निर्णायक की भूमिका सहायक प्राध्यापक शिक्षा विभाग श्रीमती उषा साहू ने की। कार्यक्रम का परिणाम निम्न प्रकार है -

प्रथम स्थान - रेणुका - बी.एड. तृतीय सेमेस्टर

द्वितीय स्थान - नैहित चावड़ा - बी.एड. तृतीय सेमेस्टर

तृतीय स्थान - भूमिका साहू - एम.एससी तृतीय सेमेस्टर 

इस अवसर पर दोनों विभाग के समस्त विद्यार्थी एवं प्राध्यापकगण उपस्थित थे।