निर्णय हाईकमान के पास सुरक्षित है के जैसे बयानों से राजनीतिक गलियारे में बनी हुई है गर्माहट

 

रायपुर, राजनांदगांव।

असल बात न्यूज़।।

0 विशेष संवाददाता

 छत्तीसगढ़ कांग्रेस में चल रही अघोषित खींचतान के बीच दिल्ली पहुंचे विधायकों की  पार्टी के किसी भी शीर्ष नेता से मुलाकात नहीं हुई है, तो वही राज्य के स्वास्थ्य मंत्री जब राजनांदगांव और दुर्ग जिले के दौरे पर थे तो राजनीतिक विश्लेषकों की नजर इस दौरान ताजा राजनीतिक हलचलों की आहट को भी टटोलने में लगी हुई थी। वैसे तो कहा जा रहा है कि श्री सिंह देव ने इस दौरान एक सधे हुए नेता की तरह अपने किसी भी कदम से किसी को कोई अनुमान लगाने का बहुत अधिक कोई अवसर नहीं दिया तो वहीं ऐसा कुछ कहा भी नहीं कि किसी को लगे कि प्रदेश सरकार में वे कहीं नाराज भी हैं। लेकिन मंत्री श्री सिंह देव ने राजधानी रायपुर में बड़ी बात कही है कि अभी फैसला नहीं हुआ है। यह माना जाना चाहिए कि क्या होना है यह निर्णय हाईकमान के पास सुरक्षित है। संभावना बनी हुई है। उनके इस बयान से राजधानी रायपुर में नई सरगर्मी  पैदा हो गई है।

पंजाब में जिस तरह से मुख्यमंत्री को हटाया गया और वहां बगावती सुर तेज होने के साथ घमासान मचा हुआ है  उसके बाद से छत्तीसगढ़ के राजनीतिक गलियारे में भी कयासों का दौर तेज हो गया है और नई हलचल  दिख रही है। छत्तीसगढ़ में राजधानी रायपुर में राजनीतिक हलचलें ऐसी तेज हुई है कि एक खेमे के समर्थक कई विधायक दिल्ली पहुंच गए और उन्होंने पार्टी के शीर्ष नेताओं से मुलाकात करने की लंबी जद्दोजहद की है।

 बताया जाता है कि, रामानुजगंज विधायक बृहस्पत सिंह की अगुवाई में इस खेमे के दिल्ली गए नेताओं ने कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव केसी वेणुगोपाल से समय लेने की कोशिश की। वहां से कोई सकारात्मक प्रतिक्रिया नहीं मिली तो पीएल पुनिया से संपर्क करने की कोशिश की गई। बताया जा रहा है, श्री पुनिया इस समय लखनऊ में हैं। ऐसे में उनसे भी मुलाकात संभव नहीं हो पाई। बृहस्पत सिंह ने कहा, अभी किसी से मुलाकात नहीं हुई है। सभी विधायक अभी अपने निजी काम में हैं। इस तरह की बात किसी के गले के नीचे नहीं उतर रही है और वह भी तब जब सियासी घमासान चरम पर है। छत्तीसगढ़ से विधायकों के दिल्ली जाने पर  स्वास्थ्य मंत्री टीएस सिंहदेव की प्रतिक्रिया रही थी कि कांग्रेस पार्टी एक खुला मंच है। लीडरशिप समय-समय पर परिस्थितिवश समय देता है। अगर यहां से कुछ लोग जाकर मिलना चाहते हैं।  उन्हें समय मिलेगा तो जरूर मुलाकात होगी।

 यह खबर मीडिया की सुर्ख़ियो  में लगातार बनी रही है कि प्रदेश कांग्रेस के 10 से 12 विधायक दिल्ली में बुधवार से डेरा डाले हुए हैं। अंदरूनी सूत्रों  का तो यह भी दावा रहा है कि वे सब अपने साथ 46 विधायकों का समर्थन पत्र भी ले गए हैं।  दिल्ली पहुंचे इस विधायकों के दल में बृहस्पत सिंह, गुरुदयाल बंजारे, मोहित केरकेट्टा, डॉ. विनय जायसवाल, द्वारिकाधीश यादव, यूडी मिंज, पुरुषोत्तम कंवर, रामकुमार यादव, चंद्रदेव राय और प्रकाश नायक इत्यादि विधायकों का नाम प्रमुखता से  गिनाया जाता रहा है। 

राजनांदगांव जिले में मंत्री श्री टी एस सिंह देव के आगमन और कार्यक्रम के दौरान कार्यकर्ताओं में भारी उत्साह नजर आया। कार्यकर्ताओं ने स्वागत करने में कहीं कोई कमी नहीं की।कार्यकर्ताओं के साथ इस दौरान लोगों की नजर इस पर टिकी हुई थी कि प्रदेश में ढाई ढाई साल के सीएम के मामले में बाबा का यहां क्या  बयान आता है। मंत्री श्री सिंह देव ने यहां कहा है कि उनका शपथ ग्रहण हाईकमान पर निर्भर है। हाईकमान के निर्णय के बगैर वह शपथ कैसे ले सकते हैं। मुख्यमंत्री के बारे में हाईकमान ही निर्णय लेता है। आलकमान जो भी आदेश देगा, उसका पालन होगा। श्री सिंह देव के बयानों से यहां ऐसा भी महसूस हुआ है कि वे पार्टी हाईकमान के निर्णय से पूरी तरह से खुश और संतुष्ट हैं। उनके कुछ बयानों से यह खुशी पूरी तरह से नजर आई। वरिष्ठ कांग्रेसी नेता कपिल सिब्बल के बारे में बोलते हुए उन्होंने पार्टी हाईकमान के समर्थन में ही पूरी बात कही तथा इस दौरान यहां तक कह दिया कि सिब्बल जी पुराने कांग्रेसी हैं। उन्होंने कांग्रेस अध्यक्ष के बारे में यदि ऐसा कहा हैं, तो यह बेहद अनुचित और अशोभनीय है।

श्री सिंहदेव ने इस दौरान राज्य सरकार के खिलाफ एक शब्द नहीं कहा। उन्होंने तो यहां तक कहा कि मुख्यमंत्री जी की अगुवाई में वे स्वास्थ्य विभाग में सुविधाएं बढ़ाने में जुटे हैं। मेडिकल कॉलेजों को सुविधायुक्त बनाने के प्रयासों का जिक्र करते हुए बताया कि  प्रदेश सरकार की कोशिश है कि हर जिले में तमाम सुविधाएं उपलब्ध हों। इनमें डायलिसिस की सुविधा भी शामिल है। श्री सिंहदेव ने यह भी बताया कि लोगों को महंगी जांच से बचाने न केवल अस्पतालों के डायग्नोस्टिक सेंटर्स का उन्नयन सरकार की उच्च प्राथमिकता है बल्कि लक्ष्य ये है कि ग्रामीण क्षेत्रों में भी ब्लड सैंपल्स के संग्रहण की व्यवस्था हो ताकि ग्रामीणों पर भार न पड़े और उन्हें छोटी-छोटी जांच के लिए भी शहरों के चक्कर न लगाने पड़े।

सबको मालूम है कि राजनीति भी कई बार जो कहा जाता है वैसे ही नहीं होता। छत्तीसगढ़ के राजनीतिक गलियारे में इस पर तो लगातार चर्चा चलती रहेगी कि इतने सारे विधायकों को आखिर छत्तीसगढ़ से दिल्ली जाने की जरूरत क्यों पड़ी है। इतने सारे विधायकों का एक साथ दिल्ली पहुंचना महज एक संयोग नहीं हो सकता। जब मंत्री श्री सिंह देव यह कहते हैं कि अभी फैसला नहीं हुआ है। निर्णय आलाकमान के पास सुरक्षित है। तब स्वाभाविक तौर पर ऐसे कयास  शुरू हो जाते हैं कि छत्तीसगढ़ के बारे में भी अभी निर्णय होना बाकी ही है और यह धारणाएं स्वभाविक तौर  पर बनने लगती है कि मामला अभी पूर्णता खत्म नहीं हुआ है। वैसे नई सरकार में मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने गांव को आत्मनिर्भर बनाने की अपनी तमाम योजनाओं से लोगों का अपनी और ध्यान आकर्षित किया है।उन्होंने चुनाव के समय किए गए वादों को भी प्राथमिकता पूर्वक पूर्ण करने का काम किया है। कांग्रेसमें पार्टी हाईकमान का निर्णय अंततः अंतिम होता है। इसका विरोध करने कि कहीं कोई गुंजाइश नहीं रह जाती है। फिलहाल कयासों के दौर के बीच सभी नेता अपने-अपने क्षेत्रों के दौरे में व्यस्त हैं। ऐसी व्यस्तताओ के बीच भी अंदरूनी तौर पर शह और मात का खेल भी जारी है। नई खबर है कि दिल्ली गए विधायक वापस लौटने लगे हैं।