पूर्व मुख्यमंत्री डॉ रमन सिंह ने राजनांदगांव में साईं संस्थान खोलने की मांग उठाई, छत्तीसगढ़ में खेलों को बढ़ावा देने के बारे में केंद्रीय खेल मंत्री से बातचीत की


नई दिल्ली, छत्तीसगढ़।

असल बात न्यूज।।

एक समय छत्तीसगढ़ का खेल के क्षेत्र में बड़ा नाम रहा है तथा ओलंपिक गेम में भी यहां के खिलाड़ियों ने करिश्माई प्रदर्शन किया है। लेकिन अभी Olympic game में छत्तीसगढ़ का कोई खिलाड़ी क्वालीफाई तक नहीं कर पा रहा है। ताजा खेलों में, राष्ट्रीय खेलों में भी किसी भी खेल में छत्तीसगढ़ के खिलाड़ियों का बहुत अच्छा प्रदर्शन नहीं कहा जा सकता।इस राज्य में खेलों का स्तर सुधारने और खेलों को बढ़ावा देने के लिए बहुत कुछ करने की आवश्यकता महसूस की जा रही है। पूर्व मुख्यमंत्री डॉक्टर रमन सिंह ने केंद्रीय खेल मंत्री अनुराग सिंह ठाकुर से मुलाकात कर छत्तीसगढ़ में खेलों को बढ़ावा देने के लिए नए सिरे से योजना बनाने का आग्रह किया है तथा राजनांदगांव जिले में साईं संस्थान खोलने की मांग उठाई है।

टोक्यो ओलंपिक संपन्न होने के बाद खेल प्रेमियों के साथ आम लोगों की नजर इस और भी है कि पदक तालिका में किन्नर राजू का प्रदर्शन कैसा रहा है। यह  देखा जा रहा है कि देश के किन राज्यों को कितने पदक मिले हैं। किस राज्य के खिलाड़ी सबसे अधिक पदक जीतने में सफल रहे हैं और किन किन राज्यों के खिलाड़ी ओलंपिक game में बिल्कुल फिसड्डी साबित हुए हैं, कोई भी पदक नहीं जीत सके हैं।  और इस पर भी बात चल रही है कि छत्तीसगढ़ राज्य के खिलाड़ी, ओलंपिक में गेम में कहां हैं,   और क्या यहां का कोई खिलाड़ी ओलंपिक गेम को क्वालीफाई करने तक में सफल हो सका और नहीं तोऐसे कैसे क्या काम कर रही थी यहां का कोई खिलाड़ी ओलंपिक गेम में क्वालीफाई तक करने में सफल नहीं हो पा रहा है और आखिर क्यों ऐसा हो रहा है ?

 दिल्ली में केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण और खेल मंत्री श्री अनुराग ठाकुर से पूर्व मुख्यमंत्री डॉक्टर रमन सिंह की इस मुलाकात को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। खेलों को आगे बढ़ाने का काम करने के लिए साईं संस्थान की अभी देश में काफी महत्वपूर्ण भूमिका है। राजनांदगांव जिले में साईं संस्थान खुलता है तो उसका दुर्ग-भिलाई कवर्धा बालोद मुंगेली धमतरी इत्यादि जिले के खिलाड़ी का फायदा मिलेगा। डॉ रमन सिंह ने केंद्रीय खेल मंत्री से छत्तीसगढ़ में खेल प्रतिभाओं को तराशने प्रशिक्षकों की नियुक्ति समेत छत्तीसगढ़ में खेलों को बढ़ावा देने के संबंध में चर्चा की।

जानिए क्या है साईं

भारतीय खेल प्राधिकरण (SAI)एक स्वायत्त निकाय है जो कि अभी युवा मामले और खेल मंत्रालय के तत्वावधान में देश में , प्रतिभाशाली खिलाड़ियों की पहचान करने और राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने के लिए खिलाड़ियों को तैयार करने का काम करती है। इसकी उत्कृष्टता के राष्ट्रीय केंद्र (एनसीओई),साई प्रशिक्षण केंद्र (एसटीसी),एसटीसी का विस्तार केंद्र,राष्ट्रीय खेल प्रतिभा प्रतियोगिता (NSTC) की योजना चल रही है।इसकी उप-योजनाएं - नियमित स्कूल, स्वदेशी खेल और मार्शल आर्ट (IGMA) और अखाड़े का संचालन शामिल है।देश भर में उपरोक्त खेल प्रचार योजनाओं को लागू करने के लिए साई ने 23 NCOE और 67 STCs की स्थापना की है। साई की उपरोक्त खेल प्रोत्साहन योजनाओं के कार्यान्वयन के लिए एनसीओई, एसटीसी, विस्तार केंद्र आदि सहित कुल 189 केंद्र कार्यरत हैं। इन केंद्रों में कुल 9025 एथलीट (5579 लड़के और 3446 लड़कियां) को प्रशिक्षित किया जा रहा है।

केंद्र सरकार ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उच्चतम स्तर की उपलब्धि हासिल करने के लिए प्रतिभा की पहचान और खेल प्रतिभा को पोषित करने के लिए 2017 में खेलो इंडिया योजना शुरू की है। इस योजना में अखिल भारतीय अर्थात शहरी और ग्रामीण दोनों क्षेत्रों को शामिल किया गया है।

 वर्तमान में, 2967 (पुरुष: 1494 और लड़कियां: 1473) खेलो इंडिया योजना के तहत अखिल भारतीय स्तर पर खेलो इंडिया एथलीटों का चयन किया गया है।  खेल मंत्रालय ने ग्रामीण, आदिवासी और पिछड़े क्षेत्रों सहित देश में खेलों को बढ़ावा देने के लिए निम्नलिखित योजनाएँ तैयार की हैं: -

 (i) खेलो इंडिया योजना (ii) राष्ट्रीय खेल संघों को सहायता; (iii) अंतर्राष्ट्रीय खेल आयोजनों में विजेताओं और उनके प्रशिक्षकों को विशेष पुरस्कार; (iv) राष्ट्रीय खेल पुरस्कार, मेधावी खिलाड़ियों को पेंशन; (v) पंडित दीनदयाल उपाध्याय राष्ट्रीय खेल कल्याण कोष; (vi) राष्ट्रीय खेल विकास कोष; और (vii) भारतीय खेल प्राधिकरण के माध्यम से खेल प्रशिक्षण केंद्र चलाना।

 

खेलो इंडिया योजना के तहत जमीनी स्तर पर दो श्रेणियों में प्रतिभा खोज शुरू की गई है:-

• खेल संभावित प्रतिभा की पहचान 

• सिद्ध प्रतिभा पहचान

इसके अलावा, प्रतिभा की पहचान करने के लिए भारत को उत्तर, पूर्व, पश्चिम, दक्षिण और उत्तर-पूर्व क्षेत्रों में 05 क्षेत्रों में विभाजित किया गया है। संभावित और सिद्ध एथलीटों को शॉर्टलिस्ट करने के लिए देश के हर कोने तक पहुंचने के लिए ग्रासरूट जोनल टैलेंट आइडेंटिफिकेशन कमेटी का गठन किया गया है। 8 से 14 वर्ष के आयु वर्ग में 20 खेल विधाओं में प्रतिभा पहचान की जाती है, जिसमें देश में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उत्कृष्टता प्राप्त करने की क्षमता/लाभ होता है।खेलो इंडिया योजना के 'प्रतिभा खोज और विकास' वर्टिकल के तहत, इस योजना के तहत पहचाने और चुने गए खेलो इंडिया एथलीटों को प्रति एथलीट प्रति वर्ष ₹ 6.28 लाख की वार्षिक वित्तीय सहायता प्रदान की जाती है।,  खेलो इंडिया योजना के "राज्य स्तरीय खेलो इंडिया सेंटर" वर्टिकल के तहत, इस मंत्रालय ने देश भर में 1000 खेलो इंडिया केंद्र स्थापित करने का निर्णय लिया है।

खेल मंत्रालय ने अभी 14.30 करोड़ रुपये के कुल बजट अनुमान के साथ 7 राज्यों में कुल 143 खेलो इंडिया केंद्र समर्पित किए हैं,लेकिन उसमें छत्तीसगढ़ राज्य को शामिल नहीं किया गया है।