कोरोना काल में प्रिंट मीडिया की विश्वसनीयता बढ़ी:डॉ. सुरेश


समाज में भ्रम पैदा करने वाली पत्रकारिता बिल्कुल ना करें:प्रो. बलदेव

सेंट थॉमस कॉलेज रूआबांधा के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग की विशेष 15 दिवसीय कार्यशाला शुरू


भिलाई।

असल बात न्यूज़।।

 सेंट थॉमस महाविद्यालय रूआबांधा भिलाई के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग की 15 दिवसीय विशेष आनलाइन सर्टिफिकेट कार्यशाला मंगलवार से शुरू हुई। "जनसंचार के विविध आयाम" विषय पर आयोजित इस कार्यशाला का उद्घाटन कुशाभाऊ ठाकरे पत्रकारिता एवं जनसंचार विश्वविद्यालय रायपुर के कुलपति प्रोफेसर बलदेव भाई शर्मा और माखन लाल चतुर्वेदी पत्रकारिता एवं जनसंचार विश्वविद्यालय भोपाल मध्यप्रदेश के कुलपति प्रोफेसर के जी सुरेश ने संयुक्त रूप से किया।

प्राचार्य डॉ. एमजी रोइमोन के मार्गदर्शन एवं विभागाध्यक्ष डॉ. अपर्णा घोष के निर्देशन में आयोजित इस कार्यशाला की शुरुआत में संकाय सदस्य डॉ. अदिति नामदेव ने स्वागत भाषण दिया।

प्राचार्य डॉ. एम जी रोईमोन ने अतिथियों का स्वागत करते हुए कहा मीडिया समाज को बहुत प्रभावित करता है और ऐसे विषय पर कार्यशाला का आयोजन बेहद प्रासंगिक है।उन्होंने कॉलेज के प्रशासक रेवरेंट फादर डॉ. जोशी वर्गीश का विशेष रूप से आभार जताया कि ऐसी सार्थक कार्यशाला आयोजन के लिए हमेशा सहयोग और प्रोत्साहन देते है।

उद्घाटन वक्तव्य देते हुए कुलपति के जी सुरेश ने कहा कि वह अंग्रेजी में बात करने वाले थे लेकिन आज हिंदी दिवस है इसलिए हिंदी का ही उपयोग करेंगे। उन्होंने कहा डिजिटल मीडिया के आने से प्रिंट मीडिया के अस्तित्व पर सवाल उठाया गया है लेकिन प्रिंट मीडिया खत्म नहीं हुआ है। उन्होंने कहा प्रिंट मीडिया हमारे देश में चल ही नहीं रहा है बल्कि नई मंजिलें हासिल कर रहा है। यह गलतफहमी थी कि अखबार की वजह से कोरोना फैलाता है लेकिन जनसमुदाय शिक्षा को लेकर बहुत मुखर होकर मीडिया ने श्मशान से लेकर कब्रिस्तान तक जान जोखिम में रखकर रिपोटिंग की है जिससे प्रिंट मीडिया की विश्वसनीयता बढी है।

कुलपति बलदेव भाई शर्मा ने अपने उद्घाटन वक्तव्य में कहा कि मीडिया में आरामतलब होकर नहीं बल्कि समर्पित होकर काम करना पडता है। सामाजिक जिम्मेदारी बढ़ाए, रचनात्मक पत्रकार बने, समाज के निर्माण के बारे में सोचे और ऐसी पत्रकारिता बिल्कुल भी ना करे जो समाज मे भ्रम पैदा करें। उन्होंने कहा हिंदी पूरे देश मे बोली जाती है, समझी जाती है इसलिए इसे राजभाषा का दर्जा प्राप्त है ।हमारे देश में विभिन्न भाषाएं बोली जाती है लेकिन हिंदी हमारे बीच में संपर्क स्थापित करती है, हिंदी हमारी ताकत है। अंत में विभाग प्रमुख डॉ. अर्पणा घोष ने आभार प्रदर्शन किया। उन्होंने 15 दिवसीय कार्यशाला की रूपरेखा पर प्रकाश डालते हुए उम्मीद जताई कि सभी विद्यार्थियों और बाहर से जुड़े लोगों को इसका लाभ अवश्य मिलेगा। आयोजन में संकाय सदस्य मुहम्मद जाकिर हुसैन और अमिताभ शर्मा सहित विभाग के तीनों वर्ष के विद्याथियों सहयोग रहा।