कृत्रिम गर्भाधान से दूध का बड़ा उत्पादक क्षेत्र बनने की ओर बढ़ रहा है कोंडागांव

 0  उन्नत नस्ल की 85 हजार से अधिक गाय तैयार

0  ग्रामीण  बाहर से गाय मंगाने के बजाए अब यही कृत्रिम गर्भाधान से उन्नत नस्ल तैयार करने पर दे रहे हैं जोर

  • जगदलपुर, कोंडागांव।
  • असल  बात  न्यूज़।।

0  विशेष संवाददाता

वन्य क्षेत्रों में पशुपालन को लेकर आम लोगों में बहुत अच्छी धारणाएं ज्यादा नहीं रही है और कहा जाता रहा है कि वन्य क्षेत्र में पशुपालन कभी बहुत अधिक सफल व्यवसाय नहीं रहा है। इसके कई कारण भी गिनाए जाते रहे हैं।अब आप ताजा हालातों और आंकड़ों को देख लेंगे, तो ऐसी धारणाएं बदल सकती है। कोंडागांव जिले के कई सारे गांव में उन्नत नस्ल की गाय का पालन हो रहा है और कई गांवों में पशुपालन ही लोगों के रोजगार का बड़ा साधन बन गया है। यहां से लोगों को पीने के लिए शुद्ध दूध तो मिल ही रहा है पशु पालकों को अच्छी खासी अतिरिक्त आमदनी हो रही है। ऐसे सकारात्मक माहौल में यहां जर्सी, साहिवाल, गिर तथा हलेस्टियान किस्म की गाय आपको गांव गांव में देखने को मिल सकती है।

असल में पशु पालन के व्यवसाय को सफल बनाने के लिए बहुत अधिक देखरेख और धैर्य की जरूरत पड़ती है।  यह माना जाता रहा है कि वन्य क्षेत्रों में आर्थिक आत्मनिर्भरता की कमी होने की वजह से ऐसे व्यापार, व्यवसाय के संचालन में दिक्कतें दिखती रही है। परिस्थितियां बदली है और गांव गांव में भी आर्थिक समृद्धि तथा आर्थिक आत्मनिर्भरता बढ़ी है।सरकार, शासन के द्वारा जो कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं, शुरू किए गए हैं उससे लोगों में पशुपालन के प्रति भी दिलचस्पी बढ़ी है। कोंडागांव जिले के गिरोला जैसे गांव में आपको घर-घर में पशुपालन  दिख जाएगा। यहां भी पहले लोग पशुपालन के लिए उन्नत किस्म केपशु पंजाब हरियाणा गुजरात जैसे राज्यों से लाते थे। लेकिन इन राज्यों से लाए गए पशु किसी न किसी कारण से बीमार पड़ जाते थे तथा बाद में उनकी मृत्यु तक हो जाती रही है। इसकी वजह से ऐसे व्यवसाय में घाटा होने लगा और लोगों की इस काम से दिलचस्पी घटने लगी। पशु स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं अलग-अलग राज्यों की परिस्थिति वातावरण अलग अलग होता है।दूसरे राज्यों के जो उन्नत किस्म के पशु हैं वहीं के वातावरण में पलते और बढ़ते हैं। इन्हें दूसरे प्रदेश में ले जाया जाता है तो वहां का वातावरण उनके अनुकूल नहीं होता और ऐसे में यह उन्नत किस्म के पशु बीमार पड़ने लगते हैं।

कृत्रिम गर्भाधान से इन समस्याओं का हल निकला है। कृत्रिम गर्भाधान से जो उन्नत नस्ल के पशु तैयार होते हैं उनमें उन्नत नस्ल के साथ देसी नस्ल का भी समावेश होता है। ऐसे में कृत्रिम गर्भाधान से तैयार उन्नत किस्म के पशुओं के लिए यहां के वातावरण उनके अनुरूप होता है और उनमें सहज रूप से सरलता के साथ बढ़ोतरी होती है।उनमें अधिक विदेशी गाय के तथा आधे उन्नत किस्म के गुण होते हैं,जिससे उन्हें यहां के मौसम के अनुरूप जिले में आसानी होती है। कोंडागांव के पशु विभाग के डिप्टी डायरेक्टर श्री पांडेय ने हमें बताया कि गिरोला में एक  एक घर में उन्नत नस्ल की 6 पीढ़ियां तैयार हो गई है। इसे बड़ी सफलता के रूप में देखा जाना चाहिए। इस पशुधन में लगातार बढ़ोतरी हो रही है। पशुपालक परिवार समृद्ध हो रहा है आत्मनिर्भर बन रहा है। इसे देखकर उस गांव में हर घर में पशुपालन किया जा रहा है।इस जिले में गिरोंला के साथ चूरे गांव, जुगानी, बोरगांव, माकड़ी, बडेराजपुर बड़े गौपालक क्षेत्र बनते जा रहे हैं।

प्रदेश में गो-धन न्याय जैसी योजना एक ओर जहां पशुपालकों और महिला स्व-सहायता समूहों को आत्मनिर्भर बनाने के साथ आर्थिक रूप से मजबूत बना रही है। वहीं दूसरी ओर इस योजना से युवाओं को पशुपालन करने की प्रेरणा मिलने के साथ उनके आमदनी और रोजगार की संभावनाएं पुनर्जीवित हुई है। 

      इन गांवो में शुद्ध दुग्ध की कमी ने ग्रामीणों को डेयरी उद्योग की ओर आकर्षित किया है। और अब कई दुग्ध उत्पाद इकाइ की स्थापना हो गई है। यहां कई परिवारों के द्वारा गौपालन का कार्य तो पूर्व से किया जा रहा था किन्तु उन्नत नस्ल न होने के कारण पर्याप्त मात्रा में दुग्ध उत्पादन नहीं होता था। पशुपालन विभाग द्वारा उन्हें राज्य डेयरी उद्यमिता विकास योजना के बारे में जानकारी दी गई तो विभाग के सहयोग से देशी नस्ल के उन्नत साहीवाल व गिर नस्ल के  गाय से गौपालन शुरूआत की गई। इसके बाद लोग अपने डेयरी फार्म को उन्नत बनाने में जुटे हुए हैं। 

उन्नत किस्म की गाय तैयार करने में जिले का पशुपालन विभाग ग्रामीणों की सहयोग करने में पूरी तरह से जुटा हुआ है और राष्ट्रीय कृत्रिम गर्भाधान कार्यक्रम के साथ विभिन्न कार्यक्रमों की जानकारी देते हुए ग्रामीणों को इस योजना का लाभ उठाने का आह्वान किया जा रहा है। बताया कि जिले में दूध उत्पादन को बड़ा व्यवसाय बनाने के लिए नई नीतियां बनाई गई है।इसके लिए जिले के कलेक्टर ने प्रत्येक गठान में गाय रखने का भी निर्देश दिया है।इसके तहत 98 सीट बनाया जाएगा दाना लाया जाएगा चारा की व्यवस्था की जाएगी तथा दूध कहां बेचा जाएगा इसका भी इंतजाम किया जाएगा। और पशुपालकों को इस्लाम की प्राथमिक तौर पर ट्रेनिंग भी दी जाएग। जिले में 265 गौठान स्वीकृत हो गए हैं जिसमें 173 बनकर तैयार हैं। इन गौठान में 11881 पशुओं के आने की जानकारी मिली है। पशुओं के चरने के लिए 167 एकड़ क्षेत्र में चारागाह तैयार किया गया है।