सावन में थीर थार। भादो में वर्षा ।। छत्तीसगढ़ में अमृत के जैसी वर्षा

  •  रायपुर दुर्ग।
  • असल बात न्यूज।।

0  विशेष संवाददाता 

लगभग डेढ़ महीने से ज्यादातर इलाकों में हो रही अल्प वर्षा से चिंतित किसानों के चेहरे पर अब मुस्कुराहट लौट रही है। इस season में धान के पौधों को जैसे पानी की जरूरत है वैसा पानी उन्हें मिल गया है। उड़ीसा में निर्मित कम दबाव के क्षेत्र के बनने से हो रही लगातार बारिश है अवध नदी नाले उफान पर आ गए हैं। तालाबों में जो ना के बराबर पानी था अब लबालब भर गए हैं। अल्प वर्षा की सारी शिकायतें लगभग खत्म हो गई है। बल्कि कई जिलों के निचले इलाकों की बस्तियों  को बाढ़ जैसे बुरे हालात से जूझना पड़ रहा है। सबसे अच्छी बात यह है कि यह बारिश खेतों को जो अभी पानी की जरूरत है तब हुई है। खेतों के लिए यह वर्षा, अमृत वर्षा के जैसे साबित हो रही है। छत्तीसगढ़ी में कहावत भी है -  सावन में थीर थार। भादो में वर्षा।। कुंवार में बड़ा ले। कार्तिक में अरसा।।

अभी भादो महीना चल रहा है। इस समय धान के पौधों को पानी की बहुत अधिक जरूरत होती है। कहा जाता है कि इस दौरान धान के खेतों में एक बित्ते से भी अधिक पानी भर जाए तो भी वह फसल को नुकसान नहीं करता बल्कि अधिक फायदेमंद साबित होता है। तो अभी ऐसा ही हुआ है। लगातार हो रही बारिश से धान के खेतों में पानी लबालब भर गया है। लग रहा है इस साल बारिश छत्तीसगढ़ के उक्त कहावत के अनुसार ही हुई है। सावन में थीर थार। अर्थात, सावन के महीने में रिमझिम बारिश होती रहे और कम भी पानी मिले तो चल जाता है। भादो में वर्षा। मथुरा भादो के महीने में खेतों को बहुत अधिक पानी की जरूरत होती है और वर्षा जरूरी होती है।जितनी अच्छी वर्षा होगी तेज वर्षा होगी खेतों को उतना ही फायदा मिलता है। सितंबर महीने में फसल रखने के लिए तैयार होने लगती है। ऐसे समय में उसे बहुत अधिक पानी अधिक पानी की जरूरत पड़ती है। पानी, फसल को कीटों के प्रकोप से भी बचाने का काम करता है। कहा जा रहा है कि अब ऐसी बारिश हो गई है कि फसल को कोई नुकसान नहीं होगा और धान का उत्पादन हर जगह अच्छा होगा।

खेतों में धान की फसल खड़ी है। उसे जितना अधिक पानी चाहिए, वह मिल गया है। ऐसे में फसल लगातार मजबूत होती जाएगी और उत्पादन बढ़ेगा। नदी नालों में इतना अधिक पानी हो गया है कि उन से पानी छोड़ा जाने लगा है। जबकि इसके पहले किसानों के द्वारा पानी की मांग की जा रही थी लेकिन जलाशय में कम पानी होने से खेतों के लिए पानी छोड़ने की स्थिति नहीं थी।

राज्य सरकार अल्प वर्षा से पीड़ित किसानों की फसल की अनावरी रिपोर्ट तैयार करने जा रही थी। अब वर्षा जनित संक्रामक बीमारियों से निपटने के बारे में सोचना है। दुर्ग जिले में तांदुला जलाशय, गोंदली जलाशय, खरखरा, मटिया मोती जलाशय, मोगरा बैराज सभी जलाशयों में क्षमता के अनुसार जल भराव हो जाने की जानकारी मिली है।