रायपुर, धमतरी एवं महासमुंद कृषि विज्ञान केन्द्र को बेस्ट परफाॅरर्मिंग कृषि विज्ञान केन्द्र का सम्मान

 

केन्द्रीय कृषि मंत्री ने की छत्तीसगढ़ के कृषि विज्ञान केन्द्रों की सराहना


रायपुर । असल बात न्यूज।

 छत्तीसगढ़ के रायपुर, धमतरी एवं महासमुंद जिलों में संचालित कृषि विज्ञान केन्द्र को भारत सरकार द्वारा मध्यप्रदेश एवं छत्तीसगढ़ में संचालित ‘‘बेस्ट परफाॅरर्मिंग कृषि विज्ञान केन्द्र’’ के रूप में सम्मानित किया गया है। भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद, अटारी जोन-9 के अंतर्गत संचालित छत्तीसगढ़ एवं मध्यप्रदेश के कृषि विज्ञान केन्द्रों की 28वीं आंचलिक कार्यशाला का शुभारंभ करते हुए केन्द्रीय कृषि मंत्री,  नरेन्द्र सिंह तोमर ने विगत दिवस इन कृषि विज्ञान केन्द्रों को सम्मानित किया।


 इस कार्यशाला में मध्यप्रदेश एवं छत्तीसगढ़ के कृषि विज्ञान केन्द्रों की प्रगति की समीक्षा की गई एवं वार्षिक कार्ययोजना का अनुमोदन किया गया। कृषि मंत्री श्री तोमर ने इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय के अंतर्गत संचालित छत्तीसगढ़ के कृषि विज्ञान केन्द्रों के काम-काज की सराहना करते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ के कृषि विज्ञान केन्द्र देश के अन्य कृषि विज्ञान केन्द्रों के लिए प्रेरणास्रोत बन गए हैं। 

इस अवसर पर भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद, नई दिल्ली के उपमहानिदेशक (कृषि विस्तार) डाॅ. ए.के. सिंह, उपमहानिदेशक (प्राकृतिक संसाधन प्रबन्धन) डाॅ. एस.के. चैधरी, इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय, रायपुर के कुलपति डाॅ. एस.के. पाटील, कृषि विश्वविद्यालय, ग्वालियर, के कुलपति, डाॅ. एस.के. राव, जवाहरलाल नेहरू कृषि विश्वविद्यालय, जबलपुर, के कुलपति, डाॅ. पी.के. बिसेन, अटारी, जोन-9, जबलपुर के निदेशक, डाॅ. एस.आर.के. सिंह उपस्थित थे। 

यहां यह उल्लेखनीय है कि इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय के अंतर्गत संचालित रायपुर, धमतरी और महासमंुद कृषि विज्ञान केन्द्रों ने नवीन कृषि प्रौद्योगिकी के विकास के साथ ही कृषि अनुसंधान को किसानों तक पहुंचाने, किसानों को नवीन तकनीक अपनाने हेतु प्रेरित करने के अलावा उन्हें संगठित एवं प्रशिक्षित करने का कार्य किया है। कृषि विज्ञान केन्द्र रायपुर ने किसानों को संगठित कर दो नये कृषि उत्पादक संगठन गठित किए हैं तथा इन किसानों को कृषि आधारित व्यवसायों से जोड़ने का कार्य किया है। कृषि विज्ञान केन्द्र द्वारा कृषक समूहों एवं महिला स्व-सहायता समूहों को विभन्न कृषि उत्पादों के प्रसंस्करण एवं मूल्य संवर्धन का प्रशिक्षण प्रदान कर नये खाद्य उत्पादों के व्यवसाय हेतु प्रेरित किया है, जिनमें मशरूम पावडर, अचार, चटनी, रेड राईस पोहा, मुेेनगा पावडर, वर्मीकम्पोस्ट आदि शामिल हैं। मछली पालन की नवीन तकनीक बायोफ्लाॅक प्रविधि से मछली पालन हेतु 60 नई इकाईयां स्थापित की है। अलंकृत मछलियों की 13 प्रजातियों का सफलतापूर्वक प्रजनन किया है। कोविड संक्रमण काल में भी आॅनलाईन एवं आॅफलाईन प्रशिक्षण कार्यक्रमों द्वारा छत्तीसगढ़ के 69 एवं अन्य राज्यों के 65 प्रतिभागियों को विभिन्न व्यवसायों को प्रशिक्षण प्रदान किया गया। 

कृषि विज्ञान केन्द्र धमतरी ने छत्तीसगढ़ में मखाना की खेती की शुरूआत करते हुए जिले के किसानों को धान के स्थान पर मखाना की खेती के लिए प्रेरित किया जिसके फलस्वरूप आज धमतरी जिले के 35 किसान 55 एकड़ क्षेत्रफल में मखाना की खेती सफलतापूर्वक कर रहें हैं। कृषि विज्ञान केन्द्र धमतरी से प्रशिक्षण प्राप्त कर रायपुर जिले के एक प्रगतिशील कृषक द्वारा 30 एकड़ क्षेत्र में मखाना की खेती की जा रही है। इसके अलावा कृषि विज्ञान केन्द्र धमतरी ने जल भराव वाले खेतों में सिंघाड़ा एंव कमल ककड़ी की खेती के लिए किसानों को प्रेरित किया जिसके फलस्वरूप आज धमतरी जिले में 16 एकड़ क्षेत्र में सिंघाड़ा तथा 100 एकड़ क्षेत्र में कमल ककड़ी की खेती की जा रही है। 

कृषि विज्ञान केन्द्र महासमंुद ने जिले के किसानों को मशरूम उत्पादन के लिए प्रेरित करते हुए उन्हें आॅयस्टर मशरूम, बटन मशरूम, पैरा मशरूम तथा दूधिया मशरूम के उत्पादन हेतु प्रशिक्षण प्रदान किया और नई इकाईयों की स्थापना करने में मदद की। कृषि विज्ञान केन्द्र महासमुंद ने छत्तीसगढ़ में बटेर पालन की शुरूआत की और जिले के किसानों को बटेर पालन हेतु प्रेरित किया। महासमुंद कृषि विज्ञान केन्द्र को बटेर पालन में मिली सफलता को देखते हुए राज्य के अन्य कृषि विज्ञान केन्द्रों में भी बटेर पालन का कार्य प्रारंभ हो चुका है। कृषि विज्ञान केन्द्र महासमुंद द्वारा लाख उत्पादन कार्यक्रम भी संचालित किया जा रहा है। इसके अलावा यह कृषि विज्ञान केन्द्र फलदार पौधों की रोपणी तैयार कर किसानों को उन्नत पौधे उपलब्ध करा रहा है। 

गौरतलब है कि कृषि विश्वविद्यालय के अन्तर्गत संचालित 27 कृषि विज्ञान केन्द्रों द्वारा किसानों के लिए अनेक योजनाएं एवं गतिविधियां चलाई जा रही है और नवीन कृषि प्रौद्योगिकी का विस्तार किया जा रहा है। कोरोना महामारी के बावजूद वैज्ञानिकों ने किसानों के साथ खड़े होकर उनको खेती में होने वाले नुकसान से न सिर्फ बचाया बल्कि कृषि विज्ञान केन्द्र, दन्तेवाड़ा ने “वेजीटेबल आॅन व्हील“ जैसी योजनाओं के माध्यम से किसानों के शीघ्र नष्ट होने वाले उत्पादों के विक्रय में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। छत्तीसगढ़ में कृषि विज्ञान केन्द्रों के माध्यम से कड़कनाथ मुर्गी पालन, बटेर पालन, बायो फ्लाॅक तकनीक से मछली पालन, बतख पालन, बकरी पालन, हर्बल गुलाल उत्पादन, सामुदायिक खेती, लाख पालन, मातृ वृक्ष वाटिका का निर्माण, सगंध पौधों जैसे- लेमनग्रास की खेती तथा सुगंधित चावल के उत्पादन एवं प्रसंस्करण के माध्यम से रोजगार का सृजन तथा किसानों की आय में बढ़ोतरी हेतु सतत् प्रयास किये जा रहे हैं। कृषि विज्ञान केन्द्र, धमतरी ने मखाना उत्पादन की परिमार्जित तकनीक विकसित कर राज्य के अन्य जिलों के साथ-साथ मध्यप्रदेश के बालाघाट एवं अन्य राज्यों को भी पौध एवं मखाना पाॅप विक्रय कर किसानों को लाभ दिलाने में अग्रणी भूमिका निभाई है।