मक्का प्रोसेसिंग प्लांट लगने से दुर्ग जिले में मक्का किसानों के लिए आर्थिक संभावनाएं बढ़ेंगी

 

मक्का की फसल की बेहतर आर्थिक संभावनाओं को लेकर होगा  कार्य

दुर्ग । असल बात न्यूज़।

 जिले में मक्का प्रोसेसिंग प्लांट की स्थापना की दिशा में कार्य किया जा रहा है। इससे मक्का की फसल लेने वाले किसानों को काफी राहत मिलेगी। मक्का की फसल के लिए किकिरमेटा से कुम्हारी तक के बेल्ट में किसानों को प्रोत्साहित करने की दिशा में कार्य किया जाएगा। इस संबंध  में कलेक्टर डॉ. सर्वेश्वर नरेंद्र भुरे ने कृषि अधिकारियों की बैठक में विस्तृत रणनीति पर चर्चा की।

 कलेक्टर ने कहा कि मक्का प्रोसेसिंग प्लांट स्थापित होने से क्षेत्र में मक्का लेने वाले किसानों की आर्थिक आय बढ़ेगी। इसके लिए कृषि विभाग का अमला किसानों से संपर्क करें तथा उन्हें मक्का से होने वाले लाभों के बारे में जानकारी दें। इसके बाद तैयार होने वाले किसानों का आकलन कर रकबा निकालकर इसके मुताबिक बीज की व्यवस्था करें। कलेक्टर ने आज समीक्षा बैठक में कृषि अधिकारियों को खाद-बीज की व्यवस्था पर लगातार नजर रखने को कहा। उन्होंने कहा कि खाद-बीज मानकों के मुताबिक हों, इसकी नियमित मानिटरिंग करें। अमानक खाद-बीज की शिकायत पर कार्रवाई करें। कृषि अधिकारी ने बताया कि इस संबंध में दुकानों की जाँच की गई थी। इसकी नियमित रूप से मानिटरिंग की जा रही है। कृषि अधिकारी ने बताया कि इस बार अरहर की फसल में भी काफी किसानों ने रुचि दिखाई है और मेड़ों के अलावा खेतों में भी किसान अरहर की फसल ले रहे हैं।  कलेक्टर ने बोनी एवं रोपाई की प्रगति की जानकारी ली। अधिकारियों ने बताया कि शतप्रतिशत बोनी हो चुकी है और रोपाई में भी काफी प्रगति हो चुकी है। बैठक में सहायक कलेक्टर श्री हेमंत नंदनवार सहित अन्य अधिकारी उपस्थित थे।

*डीएमएफ से प्याज उत्पादन को दिया जा रहा बढ़ावा*- कलेक्टर ने उद्यानिकी की गतिविधियों की समीक्षा भी की। उन्होंने कहा कि सामुदायिक बाड़ियों को बढ़ावा दें ताकि ग्रामीण क्षेत्रों में खेती के साथ ही उद्यानिकी फसलों को भी बढ़ावा मिले। फसल बीमा योजना से ज्यादा से ज्यादा किसानों को पंजीकृत कराएं ताकि किसी भी तरह की क्षति होने की दशा में किसानों को क्लेम मिल सके। कलेक्टर ने कहा कि बाड़ी योजना में सामूहिक बाड़ी के साथ ही हर घर में बाड़ी भी स्थापित करने के लक्ष्य को लेकर कार्य करना है। मुख्यमंत्री महोदय की मंशा है कि ग्रामीण क्षेत्रों में घर-घर में बाड़ी हो। गाँवों में परंपरागत रूप से घर के पीछे बाड़ी होती थी, धीरे-धीरे यह परंपरा घटती गई जिससे ग्रामीण क्षेत्रों में भी शहर से सब्जी आने लगी। ग्रामीण क्षेत्रों में घर-घर में बाड़ी को उत्साहित करेंगे तो न केवल अपने उपयोग की सब्जी उत्पादित कर पाएंगे अपितु व्यावसायिक संभावनाओं की ओर भी बढ़ सकेंगे। उद्यानिकी अधिकारी ने बताया कि इस बार डीएमएफ से प्याज के उत्पादन को बढ़ावा दे रहे हैंं। साथ ही ड्रैगन फ्रूट जैसे फलों के उत्पादन की दिशा में भी कार्य किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि राजपुर स्थित सीडलिंग यूनिट से सब्जी के पौधों की काफी माँग आ रही है और शासन की मंशा के अनुरूप किसानों को बड़ा लाभ यहाँ से हो रहा है।

*कृत्रिम गर्भाधान के लिए अधिकाधिक कार्य करें-* कलेक्टर ने कहा कि किसानों की आय में वृद्धि के लिए पशुपालन सेक्टर का मजबूत होना बेहद जरूरी है। इसके लिए बेहद जरूरी है कि कृत्रिम गर्भाधान के लिए अधिकाधिक कोशिश की जाए। नस्ल वृद्धि से इस लक्ष्य को प्राप्त किया जा सकता है। साथ ही चारागाहों में नैपियर जैसे घास के उत्पादन को बढ़ावा देकर पशुओं के लिए पौष्टिक चारा भी उत्पादित करना जरूरी है। इन दोनों लक्ष्यों पर नजर रखकर बेहतर कार्य किया जा सकता है। कलेक्टर ने बैठक में मत्स्यपालन को बढ़ावा देने के लिए किये जा रहे उपायों की जानकारी भी ली।