धुंध छटा, सब स्पष्ट, ढाई ढाई साल वाले नारों के गुब्बारे एक बार फिर पिचक गए, , भूपेश बघेल जस के तस मुख्यमंत्री रहेंगे

 रायपुर, असल बात न्यूज ब्यूरो।

0 अशोक त्रिपाठी

छत्तीसगढ़ के राजनीतिक गलियारे में पिछले कई दिनों से जो तरह तरह की अटकलबाजिया लगाई जा रही थी,अटकलबजियो में तस्वीर बन बिगड़ रही थी, ,जो विभिन्न कयास लगाए जा रहे थे, जो गहमागहमी बनी हुई थी, जो कशमकश का वातावरण था उसके बीच अब यह तो साफ हो गया कि भूपेश बघेल ही छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री बने रहेंगे। कोई फेरबदल अभी नहीं होगा। नए परिदृश्य में भूपेश बघेल समर्थकों में निश्चित रूप से अच्छी खासी खुशी है। पिछले 2 दिनों से छत्तीसगढ़ के राजनीति में दिलचस्पी रखने वाले ज्यादातर लोगों  की नजर दिल्ली क्यों लगी हुई थी। कई का दिल धक-धक कर रहा था कि आगे क्या क्या होने वाला है। राहुल गांधी के साथ चल रही बैठक वैसे तो पूरी तरह से गोपनीय थी तथा भीतर खाने से कोई भी खबर बाहर नहीं आ सकती थी लेकिन फिर भी बैठक में क्या चल रहा है? इसको लेकर हर कोई अपने अपने तरीके से अनुमान लगा रहा था। तरह-तरह के अनुमान लगाए जा रहे थे।हर किसी में इस बैठक में क्या चल रहा है को जानने  को लेकर उत्सुकता बनी हुई थी।यह बैठक बताया जाता है कि लगभग 1 घंटे तक चली और इस दौरान सभी के नजर टेलीविजन तथा समाचार पत्रों पर गड़ी हुई थी। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल अब दिल्ली से वापस छत्तीसगढ़ लौट आए हैं। फिलहाल जो चर्चित मुद्दा था उस पर हर तरह की बैठक और चर्चाएं खत्म हो गई है और हर तरह से स्पष्ट हो गया कि भूपेश बघेल छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री बने रहेंगे।

छत्तीसगढ़ में कांग्रेस को पूर्ण बहुमत में है और उसके पास विधानसभा में इतनी अधिक सीटें हैं कि उसके लिए कहीं कोई खतरा नहीं है। कांग्रेस की सरकार बनने के बाद से यह मुद्दा जोर-शोर से उछला कि यहां मुख्यमंत्री ढाई ढाई साल के लिए बनाए गए हैं। सत्ता में आने के बाद से कांग्रेसी खेमे में यह मुद्दा जोर-शोर से बीच-बीच में उछलता रहा है। उल्लेखनीय है कि ढाई- ढाई साल का पहला ढाई साल खत्म हो गए हैं। ढाई साल पूर्ण होने के दौरान राजनीतिक गलियारे में फिर चर्चा तेज हो गई  कि आखिर ढाई साल वाले मुद्दे पर क्या कुछ हो रहा है कि नहीं। समय बीतता गया तो कुछ नहीं को देखते हुए यह मुद्दा फिर से ठंडे बस्ते में जाता नजर आने लगा। इस मुद्दे से पिछली सरकार के दौरान कांग्रेस के विपक्ष में रहने के दौरान  नेता प्रतिपक्ष के रूप में कांग्रेस पार्टी के लिए महत्वपूर्ण काम करने वाले टी एस सिंह देव सीधे जुड़े हुए हैं। वर्तमान में सरकार में महत्वपूर्ण वरिष्ठ कैबिनेट मंत्री हैं। देखा जाए तो राज्य में उनसे जुड़ा हुआ कोई मामला उछलता है सामने आता है तो ढाई ढाई साल वाला मुद्दा भी जोर पकड़ने लग जाता है।

विधानसभा के मानसून के दौरान जो कुछ हुआ सब ने देखा है। राजनीतिक विश्लेषक इन प्रत्येक घटना पर बारीकी से नजर रख रहे थे। लोगों ने यह भी देखा कि मंत्री श्री सिंह देव, किस तरह से सदन में अपनी ही सरकार से असंतुष्ट होकर सदन से बाहर आ गए। उन्होंने इस दौरान जो कुछ बोला भी उस की एक एक line पर भी राजनीतिक विश्लेषकों की पूरी नजर थी। ऐसे में जब दिल्ली में राष्ट्रीय नेतृत्व के साथ बैठक शुरू हुई तो ऐसी चर्चाएं शुरू होना स्वाभाविक थी कि बैठक में कोई बड़ा निर्णय हो सकता है। हमसे भी कई सारे उत्सुक लोग पूछ रहे थे कि इस बैठक में क्या हो सकता है। अब सारी अटकलबाजियों पर भी विराम लग गया है। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल दिल्ली से वापस लौट आए हैं। उन्होंने यहां कहा है कि कांग्रेस नेतृत्व जिस दिन कहेगा उस दिन पद त्याग देंगे। मतलब साफ है वह यथावत नए उत्साह नई ऊर्जा के साथ अपनी जिम्मेदारियों  पर काम करेंगे। उनका यहां पहुंचने पर माना विमानतल पर कार्यकर्ताओं के द्वारा जोशीला स्वागत किया गया। उस दौरान उनके समर्थकों और कार्यकर्ताओं के चेहरे पर खुशियां देखी जा सकते थी ताजा हालात में कांग्रेस की सत्ता की स्थिति स्पष्ट नजर आने लगी है।। मुख्यमंत्री श्री बघेल ने बताया है कि दिल्ली प्रवास के दौरान उनकी पार्टी के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष राहुल गांधी,प्रदेश प्रभारी पी एल पूनिया और के सी वेणु गोपाल से मुलाकात हुई है।

यह तो तय है कि मुख्यमंत्री श्री बघेल की पार्टी के राष्ट्रीय नेताओं के साथ बैठक काफी पहले से तय थी। बैठक में किन मुद्दों पर चर्चा होने वाली है यह भी उन्हें स्वाभाविक तौर पर बताया गया रहा होगा।लेकिन बैठक में क्या होगा इसको लेकर मुख्यमंत्री श्री बघेल के चेहरे पर कभी, कहीं, कोई शिकन तक नजर नहीं आया।अपने जन्मदिन के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में वे अत्यंत उत्साह पूर्वक शामिल हुए तथा कार्यकर्ताओं से लंबी चर्चा की। संभवत उन्हें एहसास था कि ऐसी बैठकों में क्या हो सकता है और क्या होने वाला है।

दूसरी तरफ खबर है कि वरिष्ठ मंत्री श्री सिंह देव अभी भी दिल्ली में जमें हुए हैं।