स्कूली शिक्षा के लिए समग्र शिक्षा योजना को 1 अप्रैल, 2021 से 31 मार्च, 2026 तक जारी रखने की मंजूरी

 

 

2,94,283.04 करोड़ रुपये का वित्तीय परिव्यय जिसमें 1,85,398.32 करोड़ रुपये का केंद्रीय हिस्सा शामिल है

इस योजना में 11 लाख 60 हजार विद्यालय,  15 करोड़ 60लाख से अधिक छात्र और सरकार एवं सरकार से सहायता प्राप्त विद्यालयों के 57 लाख शिक्षक शामिल 

नई दिल्ली, छत्तीसगढ़। असल बात न्यूज़।

प्रधानमंत्री  नरेन्‍द्र मोदी की अध्‍यक्षता में आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति ने आज संशोधित समग्र शिक्षा योजना को 2021-22 से 2025-26 तक पांच वर्षों की अवधि के लिए जारी रखने को अपनी मंजूरी दे दी है। इसका कुल वित्तीय परिव्यय 2,94,283.04 करोड़ रूपये है जिसमें 1,85,398.32 करोड़ रुपये का केंद्रीय हिस्सा शामिल भी है।

इस योजना में 11 लाख 60 हजार विद्यालय15 करोड़60लाख से अधिक छात्र और सरकार एवं सरकार से सहायता प्राप्त विद्यालयों के 57 लाख शिक्षक ((पूर्व-प्राथमिक से वरिष्ठ माध्यमिक स्तर तक) शामिल किए गए हैं।

समग्र शिक्षा योजना स्कूली शिक्षा के लिए एक एकीकृत योजना हैजिसमें पूर्व-विद्यालय से लेकर बारहवीं कक्षा तक के सभी पहलुओं को शामिल किया गया है। यह योजना स्कूली शिक्षा को एक निरंतरता मानती है और यह शिक्षा के लिए सतत विकास लक्ष्य (एसडीजी -4) के अनुसार है। यह योजना न केवल शिक्षा के अधिकार (आरटीई)अधिनियम के कार्यान्वयन के लिए सहायता प्रदान करती हैबल्कि इसको  यह सुनिश्चित करने के लिए भी राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) 2020 की सिफारिशों के साथजोड़ा गया है कि सभी बच्चों की एक समान और समावेशी कक्षा के माहौल के साथ गुणवत्तापूर्ण शिक्षा तक पहुंच हो और जिसमें उनकी विविध पृष्ठभूमिबहुभाषी आवश्यकताओंविभिन्न शैक्षणिक योग्यताओं का भी ध्यान रखा गया हो और जो   उन्हें सीखने की प्रक्रिया में सक्रिय भागीदार भी बनाएं।

इस योजना के तहत प्रस्तावित स्कूली शिक्षा के सभी स्तरों पर प्रमुख हस्तक्षेप इस प्रकार  हैं: (i) बुनियादी ढांचे के विकास और प्रतिधारण सहित सार्वभौमिक पहुंच; (ii) मूलभूत साक्षरता और संख्याज्ञान, (iii) लिंग और समानता; (iv) समावेशी शिक्षा; (v) गुणवत्ता और नवाचार; (vi) शिक्षक वेतन के लिए वित्तीय सहायता; (vii) डिजिटल पहल; (viii) वर्दीपाठ्यपुस्तक आदि सहित शिक्षा के अधिकार (आरटीई) की पात्रता; (ix) 'प्रारंभिक बाल्यावस्था देखभाल एवं शिक्षा' (ईसीसीई) के लिए सहायता; (x) व्यावसायिक शिक्षा; (xi) खेल और शारीरिक शिक्षा; (xii) शिक्षक शिक्षा और प्रशिक्षण का सुदृढ़ीकरण; (xiii) निगरानी; (xiv) कार्यक्रम प्रबंधनऔर (xv) राष्ट्रीय घटक।

राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 की सिफारिशों के आधार पर संशोधित समग्र शिक्षा में निम्नलिखित नए हस्तक्षेप शामिल किए गए हैं:

• योजना की प्रत्यक्ष पहुंच को बढ़ाने के लिए सभी बाल केंद्रित हस्तक्षेप एक निश्चित समयावधि में सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) आधारित प्लेटफॉर्म पर प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (र्डीबीटी मोड) के माध्यम से सीधे छात्रों को प्रदान किए जाएंगे।

• इस योजना में केंद्र और राज्य सरकारों के विभिन्न मंत्रालयों/विकास एजेंसियों के साथ तालमेल की एक प्रभावी व्यवस्था  होगी। व्यावसायिक शिक्षा का विस्तार कौशल विकास और उद्यमिता मंत्रालय और कौशल के लिए वित्तपोषण प्रदान करने वाले अन्य मंत्रालयों के साथ मिलकर किया जाएगा। न केवल स्कूल जाने वाले बच्चों के लिए बल्कि स्कूल से बाहर रह गए बच्चों के लिए भी सुविधाओं का सर्वोत्कृष्ट उपयोग सुनिश्चित करने के लिए स्कूलों और औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों (आईटीआई) और पॉलिटेक्निकों के मौजूदा बुनियादी ढांचे का उपयोग किया जाएगा।

• आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को प्रशिक्षण देने के लिए कुशल प्रशिक्षकों के प्रशिक्षण और 'प्रारंभिक बाल्यावस्था देखभाल एवं शिक्षा' (ईसीसीई) शिक्षकों के लिए सेवाकालीन शिक्षक प्रशिक्षण का प्रावधान।

• सरकारी स्कूलों में पूर्व-प्राथमिक वर्गों के लिए शिक्षण अधिगम सामग्री (टीएलएम), स्वदेशी खिलौने और खेल, खेल आधारित गतिविधियों के लिए प्रति बालक/बालिका  500 रुपये तक का प्रावधान।

• निपुण भारत, मौलिक साक्षरता और संख्या ज्ञान पर एक राष्ट्रीय मिशन है और टीएलएम के प्रावधान के साथ योजना के तहत यह सुनिश्चित करने के लिए शुरू किया गया है कि प्रत्येक बच्चा कक्षा ग्रेड III  और ग्रेड V के बीच पढ़ने, लिखने और अंकगणित में वांछित सीखने की क्षमता प्राप्त कर लेता है। इसके अंतर्गत 500 रुपये प्रति बच्चा प्रति वर्ष, 150 रुपये प्रति शिक्षक, शिक्षक नियमावली और संसाधनों के लिए, 10-20 लाख रुपये प्रति जिला मूल्यांकन के लिए निर्धारित किया गया है ।

• माध्यमिक शिक्षकों और प्राथमिक शिक्षकों को प्रशिक्षित करने के लिए राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (एनसीईआरटी) की योजना निष्ठा (एनआईएसटीएचए) के तहत विशिष्ट प्रशिक्षण मॉड्यूल।

• पूर्व –प्राथमिक (प्री-प्राइमरी) से उच्चतर माध्यमिक (सीनियर सेकेंडरी) तक के स्कूलों के बुनियादी ढांचे को मजबूत करना,  अब से पहले तक पूर्व – प्राथमिक (प्री-प्राइमरी)  को इससे बाहर रखा गया था।

• सभी बालिका छात्रावासों में भस्मक (इनसिनेरेटर) और सैनिटरी पैड उपलब्ध कराने वाली वेंडिंग मशीनें।

•  सभी वर्तमान वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालयों में स्ट्रीम के बजाय नए विषयों को जोड़ना।

• परिवहन सुविधा को 6,000 रुपये प्रति वर्ष की दर से माध्यमिक स्तर तक बढ़ा दिया गया है।

• स्कूली शिक्षा के दायरे से बाहर के 16 से 19 वर्ष की आयु बच्चों को राष्ट्रीय मुक्त विद्यालय शिक्षा संस्थान (एनआईओएस)/ राज्य मुक्त विद्यालय (एसओएस) के माध्यम से उनके माध्यमिक/उच्चतर माध्यमिक स्तर की शिक्षा को पूरा कराने  के लिए अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, दिव्यांग बच्चों को प्रति कक्षा 2,000 रुपये तक की सहायता प्रदान की जाएगी।

• राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग को राज्य में बाल अधिकारों और सुरक्षा के संरक्षण के लिए 50 रुपये प्रति प्राथमिक विद्यालय के लिए वित्तीय सहायता।

• समग्र, 360-डिग्री, बहु-आयामी रिपोर्ट संज्ञानात्मक, भावात्मक और मनोप्रेरणा डोमेन में प्रत्येक शिक्षार्थी की प्रगति/विशिष्टता को दर्शाने वाली रिपोर्ट को समग्र प्रगति कार्ड (एचपीसी) के रूप में पेश किया जाएगा।

• राष्ट्रीय मूल्यांकन केंद्र, परख (प्रदर्शन, आकलन, समीक्षा और समग्र विकास के लिए ज्ञान का विश्लेषण) की गतिविधियों के लिए सहायता

• यदि किसी स्कूल के कम से कम 2 छात्र राष्ट्रीय स्तर पर खेलो इंडिया स्कूल खेलों में पदक जीतते हैं तो उस स्कूल को 25,000 हजार रूपये तक का अतिरिक्त खेल अनुदान।

• बस्ता रहित (बैगलेस) दिनों, स्कूल परिसरों में स्थानीय हस्त शिल्पियों के साथ उनके हुनर को सीखना (इंटर्नशिप), पाठ्यक्रम और शैक्षणिक सुधार आदि के प्रावधान शामिल हैं।

• योजना में भाषा शिक्षक की नियुक्ति का एक नया घटक जोड़ा गया है- शिक्षकों को वेतन सहायता के अलावा शिक्षकों के प्रशिक्षण के घटक और द्विभाषी पुस्तकें और शिक्षण सामग्री जोड़ी गई है।

• सभी कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालयों (केजीबीवी) को बारहवीं कक्षा तक उन्नत  करने का प्रावधान।

• कक्षा IX से XII (कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय (केजीबीवी) टाइप IV) के लिए मौजूदा अलग-थलग पड़े बालिका छात्रावासों (गर्ल्स हॉस्टल) के लिए वित्तीय सहायता को 40 लाख रुपये प्रति वर्ष किया गया (पहले यह राशि 25 लाख रुपये प्रति वर्ष थी) ।

• 'रानी लक्ष्मीबाई आत्मरक्षा संरक्षण' के तहत आत्मरक्षा कौशल विकसित करने के लिए 3 महीने का प्रशिक्षण और इसके लिए राशि 3,000 रुपये से बढ़ाकर 5,000 रुपये प्रति माह की गई।

•  विशेष देखभाल की जरुरत वाली (सीडब्ल्यूएसएन) लड़कियों के लिए पूर्व-प्राथमिक से वरिष्ठ माध्यमिक स्तर तक छात्र घटक के अलावा 10 महीने के लिए 200 रुपये प्रति माह की दर से अलग से छात्रवृत्ति का प्रावधान।

• प्रखंड (ब्लॉक) स्तर पर विशेष देखभाल की जरुरत वाली (सीडब्ल्यूएसएन) लड़कियों के लिए के लिए वार्षिक पहचान शिविरों का प्रावधानI विशेष देखभाल की जरुरत वाली (सीडब्ल्यूएसएन) लड़कियों के पुनर्वास और विशेष प्रशिक्षण के लिए प्रति शिविर 10,000 रुपये और इसके प्रखंड (ब्लॉक) संसाधन केंद्रों को सुसज्जित करना।

• नए राज्य शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद( एससीईआरटी) की स्थापना के प्रावधान को शामिल किया गया है और 31 मार्च 2020 तक बनाए गए जिलों में नए जिला शिक्षा और प्रशिक्षण संस्थान ( डाइट –डीआईईटी)  को शामिल किया गया है।

• विभिन्न उपलब्धि सर्वेक्षण करने, परीक्षण सामग्री और आइटम बैंक विकसित करने, विभिन्न हितधारकों के प्रशिक्षण और प्रशासन के प्रशिक्षण, आंकड़ा संग्रह विश्लेषण और रिपोर्ट तैयार करने आदि के लिए राज्य शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद( एससीईआरटी) में प्राथमिकता के आधार पर मूल्यांकन प्रकोष्ठ (सेल) की स्थापना।

• पूर्व-प्राथमिक और माध्यमिक स्तर के लिए भी प्रखंड संसाधन केंद्र (बीआरसी) और चक्रीय अतिरिक्तता जांच (सीआरसी) के अकादमिक समर्थन को बढ़ाया गया है।

• सरकारी स्कूलों के अलावा सरकारी सहायता प्राप्त स्कूलों को भी व्यावसायिक शिक्षा के तहत सहायता और नामांकन और मांग से जुड़ी नौकरी की भूमिकाओं/अनुभागों की अनुदान/संख्या।

• पड़ोस के अन्य स्कूलों के लिए हब के रूप में कार्यरत स्कूलों में व्यावसायिक शिक्षा के लिए कक्षा सह कार्यशाला का प्रावधान। स्पोक के रूप में कार्यरत विद्यालयों के लिए परिवहन एवं मूल्यांकन लागत का प्रावधान किया गया है।

• डिजिटल बोर्ड, स्मार्ट कक्षाओं (क्लासरूम) आभासी  कक्षाओं (वर्चुअल क्लासरूम) और डीटीएच चैनलों के प्रसारण के लिए सहायता सहित सूचना संवाद और प्रशिक्षण (आईसीटी) प्रयोगशाला, स्मार्ट क्लासरूम का प्रावधान भी किया गया है।

• सरकारी और सरकारी सहायता प्राप्त स्कूलों के छात्रों के लिए बच्चे कहाँ पर है (चाइल्ड ट्रैकिंग) का प्रावधान शामिल है।

• प्रति वर्ष 20% स्कूलों के सामाजिक लेखा परीक्षा के लिए सहायता ताकि सभी स्कूलों का पांच साल की अवधि में सामाजिक लेखा परीक्षण किया जा सके।