किसानों को जैविक खाद के उपयोग के लिए प्रेरित करने जिला पंचायत सीईओ ने ली ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारियों और सोसाइटी प्रबंधकों की बैठक, कहा -कैंसर जैसी बीमारियों से बचाव के लिए जैविक खाद का उपयोग जरूरी

 

गोधन न्याय योजना के तहत जैविक खेती पद्धति को अपनाने के लिए किसानों को प्रेरित करने की मुहिम

बाजार से कम दर पर उपलब्ध है समितियों में वर्मी और सुपर कम्पोस्ट खाद

रायपुर, । असल बात न्यूज।

छत्तीसगढ  शासन  की महत्वाकांक्षी योजना ‘‘नरवा, गरूवा, घुरूवा एवं बाड़ी’’के सफलतापूर्वक क्रियान्वयन के लिए पाटन विकासखंड में कई सारी योजनाएं तैयार की गई है। इसी कड़ी में किसानों को खेतों में जैविक खाद का अधिक से अधिक इस्तेमाल करने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है।जिला पंचायत दुर्ग के मुख्य कार्यक्रम अधिकारी एस आलोक ने क्षेत्र में जैविक खाद के वितरण के कार्य की प्रगति की समीक्षा की तथा ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारियों और सोसाइटी के प्रबंधकों को किसानों को अधिक से अधिक जैविक खाद इस्तेमाल करने के लिए प्रेरित करने को कहा है। उन्होंने चेताते हुए कहा कि रसायनिक खाद के इस्तेमाल से पूरी दुनिया को कैंसर जैसी घातक बीमारियों से जूझना पड़ रहा है इसलिए अब जैविक खाद का इस्तेमाल आवश्यक हो गया है।

इस समीक्षा बैठक में पूरे पाटन विकासखंड के ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारी और सोसाइटी प्रबंधक उपस्थित थे। सी ईओ श्री आलोक ने सभी से एक एक कर सोसाइटी वार जैविक खाद की बिक्री की प्रगति के बारे में जानकारी ली। इस दौरान कुछ सोसाइ टियो के द्वारा लक्ष्य के अनुरूप शत प्रतिशत जैविक खाद बिक्री के बारे में जानकारी दी गई।कुछ गांव के सोसाइटी प्रबंधकों के द्वारा बताया गया कि कुछ गांव के किसानों मे जैविक खाद का इस्तेमाल करने के प्रति अभी भी जागरूकता नहीं है।

सी ईओ श्री आलोक ने इस दौरान बताया कि गोधन न्याय योजना से बने  गौठानों में पशुपालकों एवं गोबर विक्रेताओं से गोबर क्रय किया जा रहा है जिसके कारण गांव, गरीब एवं किसानों को आर्थिक सहायता के साथ-साथ गौ संरक्षण में लाभ मिल रहा है एवं फसलों के अकस्मात चराई से भी निजात मिल रही है। छत्तीसगढ़ शासन की इस योजना से गौपालक प्रोत्साहित हो रहे है। गोधन न्याय योजना के तहत गौठानों में निर्मित वर्मी एवं सुपर कम्पोस्ट खाद की शासन द्वारा निर्धारित विक्रय दर खुले बाजार की अपेक्षा कम है, जिससे कम कीमत पर उच्च गुणवत्ता युक्त खाद किसानों के लिए उपलब्ध है।
     किसान निश्चिंत होकर गौठानों में उत्पादित वर्मी कम्पोस्ट खाद एवं सुपर कम्पोस्ट खाद क्रय कर खेतों में उपयोग कर सकते है क्योंकि शासन द्वारा संचालित लैब में गुणवत्ता परीक्षण किये जाने के उपरांत ही गौठानों से पैकिंग कर सहकारी समितियों के माध्यम से खाद का विक्रय किया जा रहा है। वर्तमान में वर्मी खाद का उठाव सोसाईटी के माध्यम से परमिट में कृषकों द्वारा उठाव किया जा रहा है। जो किसान वर्मी खाद खरीदना चाहते है वे निकटतम सहकारी समिति या ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारी से संपर्क कर प्राप्त कर सकते है।
    शासन द्वारा निर्धारित दर पर वर्मी कम्पोस्ट 10 रू. प्रति कि.ग्रा. तथा सुपर कम्पोस्ट 6 रू. प्रति कि.ग्रा. दर से सहकारी समितियों के माध्यम से विक्रय किया जा रहा है जिससे ग्रामीण क्षेत्र के सैकड़ों महिलाओं को रोजगार प्राप्त हो रहा है। वर्मी कम्पोस्ट खाद में 1.5 प्रतिशत नत्रजन, 0.7 प्रतिशत फास्फोरस तथा 0.8 प्रतिशत पोटेशियम उपलब्ध होता है जिससे भूमि की उपजाऊ क्षमता तथा जल संधारण की क्षमता में वृद्धि होती है। भूमि में वर्मी कम्पोस्ट का उपयोग करने से छोटे-छोटे केंचुओं के अण्डे भी खेतों में पहुंच जाते हैं, जिससे भूमि के प्राकृतिक रंध्रों के साथ कार्बनिक क्षमता में वृद्धि होती है एवं ज्यादा मात्रा में उत्पादन के साथ-साथ गुणवत्ता युक्त पैदावार प्राप्त होती है।
धान फसल में 75 प्रतिशत रासायनिक खाद के साथ 250 कि.ग्रा. प्रति हेक्टेयर वर्मी कम्पोस्ट खाद का उपयोग करना लाभप्रद होता है। सभी किसान धान स्वर्णा, महामाया जैसे किस्मों के लिए 163 कि.ग्रा. युरिया 281 कि.ग्रा. एस.एस.पी. एवं 50 कि.ग्रा. पोटाश के साथ 250 कि.ग्रा. वर्मी कम्पोस्ट खाद का उपयोग प्रति हेक्टेयर खेतों में कर सकते है। साथ ही इस प्रकार सुगंधित एवं पतला धान फसल में 98 कि.ग्रा. यूरिया 234 कि.ग्रा. एस.एस.पी. तथा 63 कि.ग्रा. पोटाश के साथ 250 कि.ग्रा. वर्मी कम्पोस्ट खाद का उपयोग प्रति हेक्टेयर खेतों में कर सकते है। इसी तरह से सब्जी उत्पादक किसान रासायनिक खाद के 75 प्रतिशत मात्रा के साथ 500 कि.ग्रा. वर्मी कम्पोस्ट खाद का उपयोग प्रति हेक्टेयर सब्जी फसल में कर सकते है। वर्मी खाद का उपयोग बोनी के समय बेसल डोज के रूप में किया जाता है। साथ ही रोपा लगाने वाले किसान रोपा के समय में तथा रोपा के 30 दिन पश्चात् यूरिया के दूसरे डोज के समय में भी इसका उपयोग कर सकते है।

सीईओ श्री आलोक ने कहा कि प्रत्येक और थानों को गोबर खरीदी का पैसा दिया गया है तो उनसे वर्मी उपलब्ध होना ही चाहिए।अभी तक 5 से 6 करोड रुपए तक गोबर खरीदी के लिए भुगतान किया जा चुका है। जो उम्मीद की गई है 10 किलोग्राम गोबर पर 4 किलो वरमी गौठानो से प्राप्त होना चाहिए। उन्होंने समीक्षा बैठक में अभी बताया कि कुछ लोग गोबर खरीदी के नाम पर फर्जीवाड़ा करने की भी कोशिश कर रहे हैं। ऐसे मामले में सीधे एफ आई आर दर्ज कराया जा रहा है। ऐसे काम है  प्रत्येक खाता लिखित में होना चाहिए।गौठान में कितना गोबर खरीदा गया है और उसे कितना वर्मि  बनना चाहिए उसका पूरा हिसाब है। उन्होंने यह सब काम सभी विभाग के लोगों को मिलजुलकर करने को भी कहा है। श्री आलोक ने कहा कि प्रत्येक काम को शुरू करने में तकलीफ होती है लेकिन पानी के बहाव के विरुद्ध तैर कर जो सफलता मिलती है उसका अलग आनंद होता है। उन्होंने सोसायटियों को वर्मी कंपोस्ट उठाने तथा किसानों को बेचने को कहा है।

समीक्षा बैठक में जनपद पंचायत सीईओ मनीष साहू, क्षेत्रीय कृषि विस्तार अधिकारी श्री प्रसाद,जिला सहकारी केंद्रीय बैंक दुर्ग के सीईओ श्री सोढ़ी भी उपस्थित थे।