कवर्धा में वनों को बचाने वन कर्मियों के लिए विशेष प्रशिक्षण कार्यशाला


रायपुर। असल बात न्यूज़।

वन विभाग के अधिकारियों - कर्मचारियों को पेड़ पौधों को नुकसान पहुंचाने वाले कीट पतंगों को नियंत्रित करने, बचाव के लिए प्रशिक्षित किया जा रहा है।कीट पतंगों से प्रतिवर्ष पेड़ पौधों को बड़े पैमाने पर नुकसान पहुंचता है। कीट पतंगे पेड़ पौधों को पूरी तरह से क्षतिग्रस्त कर देते हैं और नहीं तो इनकी वजह से  इनकी वृद्धि भी रुक जाती है। इसी से बचाव, सुरक्षा के लिए कवर्धा जिले में प्रभावशाली प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया गया।

कीट पतंगे, दीमक, सागौन, साल , कत्था, तेंदू, शीशमजैसे बेशकीमती पौधों को भी नुकसान पहुंचा देते हैं। यह इन पौधों को पूरी तरह से नष्ट कर देते हैं अथवा इनकी जड़ों को खोखला कर देते हैं जिससे इनकी बढ़ोतरी रुक जाती है।

वन क्षेत्रों में दो तरह के जंगल पाए जाते हैं। एक मानव निर्मित वन जिनमें व्यक्ति, वन विभाग के द्वारा पेड़ लगाकर बढ़ाया जाता है दूसरे प्राकृतिक वन जहां प्रकृति सुंदर पेड़ पौधे  देती है। इन दोनों तरह के वनों को कीट पतंगे, दीमक तथा दूसरे से उसमें सूक्म जीव नुकसान पहुंचाते हैं। वन अनुसंधान संस्थान के सहयोग से इन क्षेत्रों में विशेषकर सागौन के पौधों के पत्तों को नुकसान पहुंचाने वाले कीटों के जैविक प्रबंधन के लिए प्रशिक्षण दिया गया। 

 कवर्धा वन मंडल में इन्हीं दिक्कतों को देखते हुए उनके उपचार के लिए सागौन प्रजाति के मानव निर्मित तथा प्राकृतिक वनों के अंदर पाए जाने वाले लीफ डिफोलिएटर तथा स्केलेटनाईजर कीटों को ट्राईकोग्रामा के माध्यम से जैविक नियंत्रण विधि पर TFRI, जबलपुर के वैज्ञानिकों एवं विषय वस्तु विशेषज्ञ के द्वारा अग्रिम पंक्ति के कर्मचारी- वनरक्षक, वनपाल तथा उप वन क्षेत्रपाल के लिए एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया।