नॉन-टॉक्सिक, कोमल, लंबे समय तक चलने वाला हैंड-सेनिटाइजर शीघ्र उपलब्ध होगा बाजार में

 

पुणे स्थित स्टार्ट-अप नॉन-टॉक्सिक, कोमल, लंबे समय तक चलने वाला हैंड-सेनिटाइजर बाजार में उतारने को तैयार

नई दिल्ली।असल बात न्यूज।

बाजार में जल्द ऐसा हैंड-सेनिटाइजर उपलब्ध हो जायेगा, जो पर्यावरण को कोई क्षति नहीं पहुंचाता और जो इतना कोमल है कि उसे लगाने से हाथों में सूखापन भी नहीं आता है। यह सेनिटाइजर अलकोहल मुक्त है। यह न तो ज्वलनशील है और न टॉक्सिक, यानी यह बिलकुल जहरीला नहीं है। इसे पुणे के एक स्टार्ट-अप ने सिल्वर नैनोपार्टिकल्स से विकसित किया है।

कोविड-19 महामारी के दौरान लोगों को sanitizer का बहुत अधिक इस्तेमाल किया है और इसके बाद हाथों के सूखेपन की समस्या देखने में आई है।

वी-इनोवेट बायोसॉल्यूशंस द्वारा विकसित हैंड सेनिटाइजर किटाणुओं से लड़ने की प्रक्रिया को बढ़ा देता है, यानी इसका असर लंबे समय तक कायम रहता है, जिसके कारण इसे बार-बार लगाने की जरूरत नहीं पड़ती। सिल्वर नैनोपार्टिकल्स में सिल्वर आयंस धीमे और सतत तरीके से निकलते रहते हैं और जो भी माइक्रो-ऑर्गेनिज्म संपर्क में आते हैं, वे फौरन मर जाते हैं। इसके अलावा इसे आसानी से रखा जा सकता है।

क्लीनिकल ट्रायल के हवाले से यह हैंड सेनिटाइजरसेंट्रल ड्रग्स स्टैंडर्ड्स कंट्रोल ऑर्गनाइजेशन (केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन-सीडीएससीओ) की कसौटी पर खरा उतरा है और इसने वायरस को मारने में अपनी ताकत भी साबित की है।

वी-इनोवेट बायोसॉल्यूशंस को राष्ट्रीय विज्ञान और प्रौद्योगिकी उद्यमिता विकास बोर्ड (एनएसटीईडीबी) के कवच2020 अनुदान द्वारा समर्थन प्राप्त है। यह संस्था विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग (डीएसटी) के अधीन है। इसे पुणे के उद्यमिता विकास केंद्र (उपक्रम केंद्र) में विकसित किया गया है।इन सबने कोलॉयडल सिल्वर सोल्यूशन आधारित हैंड सेनिटाइजरविकसित किया है। उल्लेखनीय है कि कोलॉयडल सिल्वर सोल्यूशन एक ऐसा घटक होता है, जो बैक्टीरिया को मारने और घाव की मरहम-पट्टी करने के काम आता है। इसमें शुद्ध चांदी का इस्तेमाल होता है। इस सेनिटाइजरकी तकनीक सिल्वर नैनोपार्टिकल्स पर आधारित है, ताकि वायरल निगेटिव-स्ट्रैंड आरएनए और वायरल बडिंग को मिलने से रोकता है। यानी वायरस अपनी तादाद बढ़ाने के लिये पनपने वाले वायरस से मेल न कर पाये।

वी-इनोवेट बायोसॉल्यूशंस की सह-संस्थापक और मुख्य संचालक अधिकारी (सीओओ) ड़ॉ. अनुपमा इंजीनियर ने कहा, “अध्ययन के नतीजों से हम पूरी तरह विश्वास से ओतप्रोत हैं और भारत के सीडीएससीओ से अपने हैंड सेनिटाइजरनुस्खे के लिये लाइसेंस का इंतजार कर रहे हैं। हमें यकीन है कि इस तरह के नवाचार से देश के ‘आत्मनिर्भर भारत’ मिशन को बल मिलेगा और भविष्य में इस तरह की महामारी का सामना करने में भारत खुद अपने बल पर सक्षम होगा।”

सिल्वर नैनोपार्टिकल्स को एंटी-वायरल एजेंट के रूप में कारगर पाया गया है, जो एचआईवी, हेपेटाइटिस-बी, हर्पीज सिंप्लेक्स वायरस, इंफ्लूएंजा वायरस जैसे घातक वायरस के खिलाफ सुरक्षा प्रदान करता है। हाल की रिपोर्टों से पता चला है कि ग्लूटेथियोन कैप्ड-एजी2एस एनसी (सिल्वर नॉन-क्लस्टर्स) कोरोनावायरस के खिलाफ काम करता है। यह काम वह वायरल निगेटिव-स्ट्रैंड आरएनए और वायरल बडिंग को मिलने से रोककर करता है। कोलायडल सिल्वर पर वी-इनोवेट बायोसॉल्यूशंस की प्रौद्योगिकी आधारित है, जो आरएनए को अपनी तादाद बढ़ाने से रोकता है, जिससे कोविड-19 के फैलाव पर अंकुश लगता है। वह कारगर तरीके से सतह पर मौजूद ग्लाकोप्रोटीन्स को भी ब्लॉक कर देता है।

इस समय समूह यह भी मूल्यांकन कर रहा है कि विभिन्न प्रकार के वायरस पर यह हैंड सेनिटाइजरकितना कारगर है।

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