खाद्य तेल की कीमतों में भारी बढ़ोतरी से आम जनता त्रस्त, मूल्य में कमी के लिए राज्यों और कारोबारियों को कदम उठाने की जरूरत

 


नई दिल्ली, छत्तीसगढ़। असल बात न्यूज़।
देश इस समय कोरोना वायरस के संक्रमण के फैलाव से गंभीर संकट से जूझ रहा है तो दूसरी तरफ लॉकडाउन के बीच आम जनता को भीषण महंगाई ने भी रूलाना शुरू कर दिया है। जमाखोरों और कालाबाजारियों के द्वारा dainik जरूरत की चीजों की कृत्रिम कमी कर जरूरी सामानों की कीमतों में लगातार वृद्धि करने की साजिश की जा रही है। ऐसे संकट में खाद्य तेलों के दामों में भीषण बढ़ोतरी हो गई है।₹90 प्रति किलो की दर से बिकने वाला सोयाबीन खाद्य तेल आज ₹160 रुपए प्रति किलो की दर से बिक रहा है। गेहूं  और चावल के दाम में भी भारी बढ़ोतरी किए जाने की खबर है आम जनता इस समय महंगाई से बुरी तरह से त्रस्त हो गई है। केंद्र सरकार ने आज  खाद्य तेल की कीमतों में स्थिरता लाने के मुद्दे के समाधान के तरीकों और साधनों पर चर्चा के लिए बैठक की है।


 खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण विभागभारत सरकार द्वारा खाद्य तेल की असामान्य मूल्य वृद्धि के मुद्दे को हल करने पर चर्चा करने के लिए आयोजित  बैठक में सचिवखाद्य और सार्वजनिक वितरण विभागभारत सरकारसचिव कृषि मंत्रालयभारत सरकार और सचिवउपभोक्ता कार्य विभागभारत सरकारखाद्य तिलहन के उत्पादकमिल मालिकथोक व्यापारीखाद्य तेल उद्योग क्षेत्र के विभिन्न संघगुजरातमहाराष्ट्रमध्य प्रदेश और तमिलनाडु जैसे राज्यों के वरिष्ठ अधिकारियों ने भाग लिया। उल्लेखनीय है कि पिछले कुछ महीनों के दौरान खाद्य तेल की अंतरराष्ट्रीय कीमतों में वृद्धि की तुलना में भारत में खाद्य तेल की कीमतों में भारी वृद्धि हुई है।

खाद्य और सार्वजनिक वितरण के सचिव ने कहा कि "आत्मनिर्भर भारत" अभियान के लिए देश को खाद्य तेलों में आत्मनिर्भर होने की आवश्यकता है। उन्होने कहा, "आयात पर लगभग 60 प्रतिशत की निर्भरता भारत में खाद्य तेल उद्योग के विकास के लिए उपयुक्त नहीं है। कीमतों को स्थिर बनाए रखने के लिए अल्पकालिक उपायों के बीच संतुलन बनाने और खाद्य तेल उत्पादन में भारत को आत्मनिर्भर को बनाए रखने के लिए जांच और दीर्घकालिक उपाय करने की जरूरत है।"सचिव ने कहा कि सभी राज्यों में खाद्य तेल के व्यापारियों की तरफ से खाद्य तेल की कीमतों में कमी लाने के लिए हर संभव कदम उठाने चाहिए।

यह ध्यान देने योग्य है कि भारत में तिलहन का उत्पादन और घरेलू उपलब्धताखाद्य तेल की घरेलू मांग की आवश्यकता से काफी कम है। हर साल बड़ी मात्रा में खाद्य तेल का आयात किया जाता है। खाद्य तेल की अंतरराष्ट्रीय कीमतों में बदलाव से खाद्य तेल की घरेलू भारतीय कीमत पर असर पड़ता है।