फिर बढ़ सकती है लॉक डाउन की अवधि ?, छत्तीसगढ़ में नहीं सुधरे हैं हालात

 रायपुर, दुर्ग, भिलाई, बिलासपुर। असल बात न्यूज।

0  चिंतन विश्लेषण जिंदगी बचाने के लिए

0  अशोक त्रिपाठी

सबसे पहले हम सभी के लिए अच्छी खबर है कि शासकीय अस्पतालों में अब बेड उपलब्ध हैं, ऑक्सीजन वाले बेड उपलब्ध है। दवाइयां मिल रही हैं। सरकार शासन प्रशासन ने जो नए नियम बनाए हैं उससे रेम डेसीविर जैसी दवाइयां भी अस्पतालों में मिल रही है। यह और खुशी की बात है कि तमाम समाजसेवी धार्मिक संगठन पीड़ित लोगों की तन मन धन से सेवा करने आगे आ रहे हैं। इसमें सिक्ख समुदाय के लोगों ने जरूरतमंदों को, पीड़ित कमजोर वर्ग के लोगों को ऑक्सीजन सिलेंडर उपलब्ध कराने का जिस तरह से काम शुरू किया है वह काफी सराहनीय है। इधर जो हालात हैं छत्तीसगढ़ प्रदेश में कोरोना के संक्रमण का फैलाव थम नहीं रहा है। राजधानी रायपुर में  संक्रमण के फैलाव के मामले में हालत में जरूर सुधार हुआ है लेकिन बिलासपुर कोरबा रायगढ़ कांकेर जसपुर जांजगीर चांपा कांकेर जैसे जिलों में स्थिति बिगड़ती जा रही है। दुर्ग जिले में भी कोरोना के पॉजिटिविटी का प्रतिशत 25% से अधिक है। ऐसे हालात में यह कहना मुश्किल हो रहा है कि आगामी छह मई को lockdown वापस ले लिया जाएगा। स्थितियों को देखते हुए लग रहा है कि लॉकडाउन की अवधि एक बार फिर बढ़ाई जा सकती है। राज्य सरकार ने लॉकडाउन के बारे में फैसला लेने का अधिकार जिले के कलेक्टर को दे दिया है। दूसरी तरफ एक और महत्वपूर्ण बात यह भी है कि कोरोना के संक्रमण के चलते कई सारी नई समस्याएं भी खड़ी हो गई हैं।  कोरोना के संक्रमण की चपेट में आकर जिन घरों में परिवार के मुखिया का निधन हो गया है उन घरों की हालत महा -अंत्योदय जैसी हो गई है.। वहां राशन और दूसरी चीजें कैसे पहुंचेगी ? इसका जवाब किसी के पास नहीं है। निश्चित रूप से सरकार को ऐसे लोगों के लिए नई योजना बनाने पर ध्यान देना होगा।

Lockdown के चलते आम लोगों को कई सारी दिक्कतों का सामना करना पड़ा है। दुर्ग जिले में लाक डाउन को पूरे एक महीने होने जा रहे हैं। ऐसे में स्वाभाविक रूप से लोगों के घरों का राशन खत्म होने लगा है। अन्य जरूरी चीजें खत्म होने लगी है। और लोगों को इन जरूरी चीजों को जुटाने के लिए घरों से बाहर निकलना पड़ रहा है। लेकिन कोरोना के संक्रमण के फैलाव के हालात से आम लोगों में दहशत है। ढेर  सारी चिंताएं हैं। प्रत्येक वर्ग में अनजानी अनहोनी की आशंका से दहशत है। हर जगह बस्ती और कॉलोनियो में प्रत्येक तीसरे घर में कोई ना कोई संक्रमित जरूर हो गया है। ऐसे हालात में मौका मिलने के बावजूद भी कोई अपने घरों से बाहर नहीं निकल रहा है। लोग अपनी जरूरतों को सीमित कर घरों में ही रह रहे हैं। सारे काम धाम, धंधे तो वैसे ही ठप है। एक बात की और सबका ध्यान जा रहा है कि जो लोग, जो वर्ग रोज कमाने खाने वाला है, उसके समक्ष इस लॉक डाउन ने बहुत अधिक मुसीबत खड़ी कर दी है। नौकरी पेशा वर्ग और वेज रिवीजन की मांग करने वाले लोगों को तो महीने की तनख्वाह मिल जाएगी, लेकिन रोज कमाने खाने वालों को अभी भी कहीं से कुछ नहीं मिल रहा है, ना ही मिलने का कोई रास्ता नजर आ रहा है। यह वर्ग ईश्वर से lockdown के जल्द से जल्द खुलने की प्रार्थना कर रहा है ताकि उनके लिए 2 जून की रोजी रोटी का इंतजाम होना शुरू हो सके। महीने भर से व्यवसाय और कारोबार बंद होने की वजह से व्यापारी वर्ग को भी दिक्कतों से जूझना पड़ रहा है। लॉकडाउन में और बढ़ोतरी, कई वर्ग के लोगों के लिए ढेर सारी मुसीबतें पैदा कर देगी। लेकिन ऐसा लग रहा क्या अभी इंतजार करना होगा। हालात नियंत्रण में नहीं हैं। कोरोना का कहर थम नहीं रहा है। दुर्ग जिले में पिछले 24 घंटों मे 1 हजार 029 नए संक्रमित मिले हैं। इसी दौरान कोरोना के संक्रमण की चपेट में आकर 16 लोगों की जान चली गई है। हालांकि यह अच्छी बात है कि यहां एक्टिव केसेस के मामले 4 हजार 783 तक नीचे चले गए हैं। राजधानी रायपुर में पिछले 24 घंटे के दौरान एक 40 लोगों की मौत हुई है कोरोना के संक्रमण से। बिलासपुर जिले में कोरोना के संक्रमण से लोगों के मौतों की संख्या बढ़ती जा रही है। प्रदेश के 12 जिलों में अभी 6 मई तक लाकड़ौन घोषित किया गया है। तमाम विषम परिस्थितियों  के लोगों के यह सवाल चल रहा है कि क्या 6 मई को लॉकडाउन खत्म हो जाएगा अथवा इसे और आगे बढ़ा दिया जाएगा ? 

लॉकडाउन की अवधि को आगे बढ़ाने अथवा इसे खत्म करने के बारे में जिले के कलेक्टर  अपने-अपने जिलों के स्थितियों को देखते हुए निर्णय लेंगे। इसमें पहली महत्वपूर्ण बात यह है कि इस बात को तो सभी जगह स्वीकार किया जा रहा है कि लॉक डाउन की वजह से ही पॉजिटिविटी रेट में गिरावट आई है। कोरोना के संक्रमण का फैलाव  अपेक्षाकृत कम हुआ है। इसी वजह से कोरोना को काफी कुछ नियंत्रित किया गया है। अब हम उस महत्वपूर्ण पहलू को देखते हैं जिसकी lockdown को लागू करने में महत्वपूर्ण भूमिका मानी जाती है। Active cases।आगर जिले में एक्टिव केसेस बढ़ते जा रहे हैं,कम नहीं हो रहे हैं तो lockdown को वापस लेने का निर्णय अत्यंत जोखिम भरा साबित हो सकता है। जरा फिर से आंकड़ों को देखिए। आंकड़ों के अनुसार दुर्ग जिले में 6 मार्च को पहली बार lock down लगाया गया।इस दौरान इस तारीख को पूरे प्रदेश में सिर्फ 2 हजार 816  एक्टिव केसेस थे। दुर्ग जिले में 612, रायपुर जिले में 866, बिलासपुर जिले में 102, कांकेर में 33, कोरबा जिले में 97, जसपुर जिले में 99 active cases थे। हम प्रदेश के चारों ओर के जिलों के आंकड़े को ले रहे हैं। उस दौरान कोरोना की पॉजिटिविटी रेट सिर्फ 1% के आसपास थी। अर्थात कोरोना के संक्रमण का फैलाव सिर्फ 1% किधर से हो रहा था। जिला प्रशासन को संभवत  इन्हीं सब तथ्यों को देखते हुए लॉकडाउन  के बारे में आगे निर्णय लेना पड़ेगा। ताजा हालात में दुर्ग जिले और राजधानी रायपुर में पिछले 5 दिनों की तुलना में पॉजिटिविटी रेट काफी कम हुई है। लेकिन बिलासपुर जिले मैं 9589, राजगढ़ जिले में 10313, कोरबा जिले में 8548, जांजगीर-चांपा जिले में 8203, जसपुर जिले में 3985, और कांकेर जिले में 4178 1 एक्टिव केसेस हो गए हैं।

देखा जाए तो छत्तीसगढ़ राज्य के कई जिलों में अभी पॉजिटिविटी रेट और कोरोना के संक्रमण का फैलाव अपेक्षाकृत कम हुआ है। लेकिन बड़ा खतरा अभी भी बना हुआ है। जब यह माना जा रहा है कि लॉक डाउन की वजह से ही पॉजिटिविटी रेट मैं गिरावट आई है, कोरोना के संक्रमण के फैलाव का प्रतिशत कम हुआ है। तब लॉकडाउन हटा लिया जाएगा तो कहीं इसका विपरीत प्रभाव नहीं पड़ेगा।

 लाक डाउन हटा देने के बाद मार्केट में बाजारों में  , अन्य सार्वजनिक स्थलों पर लोगों की स्वभाविक तौर पर भीड़ बढ़ेगी। छूट मिलने के बाद लोगों का घरों से निकलना पड़ेगा। ऐसे में एकाएक कहीं भी भीड़ बढ़ने से कोरोना के संक्रमण के फैलाव पर उसका काफी positive असर पड़ सकता है। तब यह वातावरण भी काफी खतरनाक साबित हो सकता है।

हालात ऐसे हो गए हैं कि दोनों स्थितियों में आम जनता को ही दिक्कतों का सामना करना पड़ेगा। लॉकडाउन नहीं खुलने से दैनिक जरूरत की चीजों का संकट पैदा होने लगेगा। महंगाई और कालाबाजारी बढ़ने लगेगी। जो कि अभी भी काफी हद तक बढ़ गई है। शासन प्रशासन के लिए इसको रोक  पाना, नियंत्रित कर पाना काफी कठिन काम है। ऐसी हालातों को देखकर ही कहा जा रहा है कि अभी सब चीजें हमारे नियंत्रण में नहीं है।

लंबे दिनों से lockdown के चलते तमाम दिक्कतो को झेल रहे आम लोगों के लिए अब lockdown को आगे झेलना आसान नहीं रहेगा। इस दौरान जिला प्रशासन और स्थानीय प्रशासन को भी तमाम नहीं चुनौतियों का सामना करना पड़ेगा। प्रशासन के समक्ष सबसे बड़ी चुनौती तो यही रहेगी कि आम लोगों खास तौर पर कमजोर वर्ग के लोगों को राशन, दैनिक जागरण की चीजें आसानी से, सहजता से सस्ते दर पर उपलब्ध हो सके। यह बहुत आसान काम नहीं है। और तब जबकि कालाबाजारी और जमाखोरी करने तथा कृत्रिम कमी कर महंगाई बढ़ाकर आम जनता को लूटने वाले तत्व काफी पहले से सक्रिय हो चुके हैं। यह तो पहले ही लिखा जा चुका है कि रोज कमाने खाने वाले वर्ग को अभी से ही lockdown में कितनी सारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। लॉक डाउन की अवधि और बढ़ाए जाने पर उनकी दिक्कतें बढ़ती ही जाने वाली है। सरकार के द्वारा सस्ते दर पर चावल नमक उपलब्ध कराया जा रहा है। लेकिन सभी जानते हैं कि इतने बस सामानों से  गृहस्थी नहीं चलने वाली। घर-परिवार चलाने के लिए बहुत सारे साधनो और चीजों की जरूरत पड़ती है। बाजार में गेहूं चावल दाल खाद्य तेल जैसी चीजों के दाम में काफी पहले से बढ़ोतरी की जाने लगी है। शासन प्रशासन को अभी यह तय करने की जरूरत है कि ये चीजें किन-कीमत बिके । और उससे अधिक कीमत पर बेचे जाने पर क्या कार्रवाई की जाएगी। इस समय आम जनता को पूंजीवादी व्यवस्था में बाजार के भरोसे छोड़ देने से कई सारी अव्यवस्थाएं खड़ी हो जाएंगी। इन कठिनाइयों को झेलने के लिए कमजोर वर्ग शायद ही सहन  कर पाएगा।

लोग घरों से बाहर नहीं निकल रहे हैं। कोरोना की वजह से सामाजिक दूरी बनाए रखना भी जरूरी है। एक दूसरे से संपर्क कट सा गया है। इस कोरोना के संकट में कई परिवारों के मुखिया की मौत हो गई है। कोरोना के संक्रमण ने, अथवा इसकी दहशत ने उन्हें छीन लिया है। जिस घर परिवार में ऐसा मुखिया खाने खाने वाला हूं अकेला व्यक्ति था उस घर की हालत बद से बदतर हो गई है। अंत्योदय की बात की जाती है लेकिन ऐसे परिवारों की हालत  महाअंत्योदय परिवार के जैसे हो गई है। इस घर परिवार के लोगों का भी राशन खत्म होता है। दैनिक जरूरत की चीजें खत्म हो रही है। इस परिवार के लोगों को भी नहीं मालूम है कि राशन खत्म हो जाएगा, दूसरी चीजें खत्म हो जाएंगी तो यह सब उनके घर में कौन लाकर देगा। शायद शासन प्रशासन के पास भी ऐसे परिवारों की मदद के लिए तात्कालिक तौर पर कोई योजना नहीं है। ऐसे परिवार आपदा के चलते गंभीर  संकट में फंस गए हैं। एक जिले में ही ऐसे परिवारों की संख्या s सौ, 200 से अधिक हो सकती है। ऐसे परिवारों में जो मुखिया शासकीय नौकरी में थे, किसी उपक्रम में कार्यरत थे, उस परिवार को एक बड़ी राशि तत्काल मिल जाएगी। पेंशन भी मिलने  लगेगा। लेकिन जो रोज कमान खाने वाले परिवार हैं उनमें अपने मुखिया की मौत से ऐसे परिवार बदहाल हो गए हैं।इन परिवार के सदस्यों को समझ नहीं आ रहा है कि उनके साथ आगे क्या होने वाला है। शासन प्रशासन को इन परिवारों की सुध लेने की जरूरत है। नई व्यवस्था इनके लिए बनाने की जरूरत है।

शासन-प्रशासन की हमेशा कोशिश होती है कि सारे कामकाज, सारी व्यवस्थाये सामान्य रूप से सुचारू तौर पर नियमित रूप से चलती रहनी चाहिए।अभी बार-बार लॉकडाउन की अवधि बढ़ाई जा रही है तो शासन प्रशासन के समक्ष कितनी दिक्कतें होंगी,कितनी कठिनाइयां होगी ?इसे समझा जा सकता है। कोई भी नहीं  चाहेगा कि व्यवस्थाएं अनियमित हो, कामकाज ठप हो जाए, आम लोगों को दिक्कतों का सामना करना पड़े। लेकिन बेबसी है, लाचारी है, ऐसा हो रहा है। जिसकी कल्पना नहीं की जा रही है वह सब हो रहा है। अब सब कुछ भगवान के हाथों में ही हो कर रह गया है।





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