अक्षय तृतीया पर बाल विवाह की रोकथाम के लिए दिशा-निर्देश जारी

 


रायपुर,।असल बात न्यूज़।

 प्रदेश में अक्षय तृतीया पर होने वाले बाल विवाहों की रोकथाम के लिए सभी कलेक्टरों पुलिस अधीक्षकों महिला बाल विकास विभाग सहित सभी संबंधित अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए गए हैं। इन अधिकारियों को बाल विवाहों की रोकथाम के लिए कार्ययोजना तैयार कर आवश्यक कार्रवाई करने के लिए कहा गया है। 


सचिव महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा जारी निर्देश के अनुसार ग्राम पंचायतवार होने वाले बाल विवाहों की पूर्व में समीक्षा ग्राम स्तरीय एवं खण्ड स्तरीय बाल संरक्षण समिति के माध्यम से की जाए। बाल विवाह होने के संबंध मंे जानकारी प्राप्त होने पर पहले विवाह रोकने हेतु समझाईश दी जाए एवं नहीं मानने पर कानूनी कार्यवाही की जाए। मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना की जानकारी ग्रामीणों तक पहुंचायी जाए ताकि बाल विवाह की रोकथाम की जा सके। थाना में किसी भी माध्यम से बाल विवाह होने की मौखिक या लिखित सूचना प्राप्त होने पर रोकथाम की तत्काल कार्रवाई की जाए। बाल विवाह की रोकथाम के लिए किशारी बालिकाएं एवं किशोरी बालिका समूहों का सहयोग रोकथाम में अनिवार्य रूप से लिया जाए। इसी प्रकार जिलों में गठित महिला स्व-सहायता समूहों को भी बाल विवाह में रोकथाम की जिम्मेदारी दी जाए। 


बाल विवाह की रोकथाम के लिए कार्ययोजना तैयार करने हेतु प्रदेश में कुछ विशिष्ट जातियों में बाल विवाह के प्रकरण पूर्व वर्षों में प्राप्त होते रहे हैं, सबसे पहले जिलों में ऐसे क्षेत्रों जातियों को चिन्हित कर लिया जाए। इसके लिए पटवारी, कोटवार, शिक्षकों, आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं एवं ग्राम स्तरीय शासकीय अमले को दायित्व सौंपा जाए। प्रत्येक ग्राम/ग्राम पंचायतों में विवाह पंजी निर्धारित की जाए। जिसमें समस्त होने वाले समस्त विवाहों को पंजीबद्ध किया जाए। पंजी संधारण का दायित्व पंचायत सचिव/आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को सौंपा जा सकता है, ताकि प्रत्येक विवाह में वर एवं वधु की उम्र का सत्यापन किया जा सके। 

बाल विवाहों की रोकथाम के लिए प्रत्येक ग्राम पंचायतों में बाल विवाह के कानूनन अपराध होने के संबंध में मुनादी कराई जाए। बाल विवाह की सूचना ग्राम पंचायत के सरपंच, पंचायत सचिव, ग्राम के शिक्षक, कोटवार, आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं के माध्यम से महिला एवं बाल विकास विभाग के पर्यवेक्षक, परियोजना अधिकारी, मुख्य कार्यपालन अधिकारी, खण्ड चिकित्सा अधिकारी, अनुविभागीय अधिकारी राजस्व या सीधे कलेक्टर अथवा पुलिस अधीक्षक को दी जाए। सभी जिलों के सरपंचों को जिले के प्रभारी मंत्री जिला पंचायत अध्यक्ष एवं जिला कलेक्टर की ओर से पत्र लिखकर बाल विवाह रोकने का अनुरोध किया जाए। इसी प्रकार बाल विवाह की रोकथाम हेतु व्यापक प्रचार-प्रसार कराने के निर्देश दिए गए हैं।