इस्पात संयंत्रों का मेडिकल ऑक्सीजन कोरोना संक्रमित लोगों की जान बचाने के काम आ रहा है

 

देश में मेडिकल ऑक्सीजन की आपूर्ति के लिए  इस्पात क्षेत्र की कंपनियां अपना अभी कर रही हैं अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन 

 कल इस्पात क्षेत्र ने 3474 मीट्रिक टन तरल मेडिकल ऑक्सीजन का उत्पादन किया 

तरल मेडिकल ऑक्सीजन (एलएमओ) के उत्पादन को बढ़ाने और इसके वितरण के लिए सभी प्रयास किए जा रहे हैं

नई दिल्ली। असल बात न्यूज़।
देश में इस्पात संयंत्रों के द्वारा उत्पादित liquid medical oxygen अब कोरोना संकट में संक्रमित मरीजों की जान बचाने के काम आ रहा है। देश में अभी सार्वजनिक एवं निजी क्षेत्र के 29 इस्पात संयंत्र, मेडिकल ऑक्सीजन का उत्पादन कर रहे हैं जिसमें भिलाई इस्पात संयंत्र भी शामिल है। इन इस्पात संयंत्रों के द्वारा अभी तक 2894 टन तरल मेडिकल ऑक्सीजन की विभिन्न राज्यों को आपूर्ति की गई है। इस्पात संयंत्र  में अभी नाइट्रोजन एवं आर्गन गैस के उत्पादन को कम कर मेडिकल ऑक्सीजन का अधिक उत्पादन करने पर जोर दिया जा रहा है। इस्पात संयंत्रों ने अभी 1300 से अधिक मेडिकल ऑक्सीजन के विभिन्न राज्यों को आपूर्ति की है।


प्राप्त जानकारी के अनुसार इस्पात संयंत्रों की कुल दैनिक ऑक्सीजन उत्पादन क्षमता 2834 मीट्रिक टन है। इस्पात क्षेत्र में 33 ऑक्सीजन संयंत्र (सीपीएसई एवं निजी, दोनों मिलाकर) हैं। इनमें से 29 संयंत्रों का संचालन नियमित तौर पर किया जा रहा है। 24 अप्रैल, 2021 को की गई रिपोर्ट के मुताबिक इस्पात क्षेत्र में एलएमओ उत्पादन की 2834 मीट्रिक टन दैनिक क्षमता की तुलना में एलएमओ का उत्पादन 3474 मीट्रिक टन है। यह एलएमओ उत्पादन क्षमता से अधिक है, क्योंकि अधिकांश इकाइयों ने नाइट्रोजन और आर्गन गैस के उत्पादन को कम कर दिया है और केवल एलएमओ का उत्पादन कर रही हैं। इन सभी प्रयासों के चलते सार्वजनिक एवं निजी क्षेत्र के इस्पात संयंत्रों द्वारा 2894 टन तरल मेडिकल ऑक्सीजन विभिन्न राज्यों में भेजे गए। इससे एक हफ्ते पहले यह आंकड़ा 1500/1700 टन प्रतिदिन था।

इस्पात संयंत्र को कुछ सामान्य उद्देश्यों जैसे; लान्सिंग एवं गैस कटिंग के अलावा मुख्य रूप से इस्पात बनाने और ब्लास्ट फर्नेस में ऑक्सीजन संवर्धन के लिए गैसीय ऑक्सीजन की जरूरत होती है। इसे देखते हुए एकीकृत इस्पात संयंत्र में कैप्टिव ऑक्सीजन संयंत्रों को मुख्य तौर पर ऑक्सीजन, नाइट्रोजन एवं आर्गन के गैसीय उत्पादों के उत्पादन के लिए डिजाइन किए जाते हैं। इसके बाद वांछित दबाव पर प्रक्रिया की जरूरत को पूरा करने के लिए प्रेशर रिडक्शन एंड मैनेजमेंट सिस्टम (पीआरएमएस) के माध्यम से भेज दिया जाता है। इस तरह के संयंत्र अपनी चरम क्षमता पर 5-6 फीसदी अधिकतम तरल ऑक्सीजन (एलओएक्स) का उत्पादन कर सकते हैं, जो औद्योगिक ऑक्सीजन की तुलना में एक अत्यधिक शुद्ध उत्पाद है। ये संयंत्र केवल कुछ गैसीय ऑक्सीजन का त्याग करके और प्रक्रिया मापदण्डों को अनुकूल बनाकर एलओएक्स उत्पादन को सुधार सकते हैं।     

इस बीच तरल ऑक्सीजन के उत्पादन को बढ़ाने और इसके वितरण के लिए सभी प्रयास किए जा रहे हैं। इसके लिए सभी ऑक्सीजन संयंत्र, चाहे वह निजी हो या सार्वजनिक, दिन-रात लगातार काम कर रहे हैं और ऑक्सीजन का वितरण कर रहे हैं। इसके अलावा इस्पात संयंत्र ऑक्सीजन सिलेंडरों को भी भर रहे हैं और राज्यों/अस्पतालों को इनकी आपूर्ति कर रहे हैं।   

सार्वजनिक और निजी क्षेत्र के इस्पात संयंत्र विभिन्न राज्यों में तरल ऑक्सीजन की आपूर्ति के लिए कड़ी मेहनत कर रहे हैं। सेल द्वारा तरल मेडिकल ऑक्सीजन की औसत आपूर्ति 800 टन प्रतिदिन से अधिक हो गई है। 23 अप्रैल को 1150 टन एलएमओ वितरित किए गए थे और बीते कल यानी 24 अप्रैल को वितरित की गई मात्रा 960 टन थी। सेल लगातार एलएमओ की आपूर्ति बढ़ा रहा है।      

वहीं अगस्त, 2020 से 24 अप्रैल, 2021 तक भिलाई, बोकारो, राउरकेला, दुर्गापुर और बर्नपुर स्थित सेल के एकीकृत इस्पात संयंत्रों से कुल 39,647 टन तरल मेडिकल ऑक्सीजन की आपूर्ति की गई। इसके अलावा जहां तक राष्ट्रीय इस्पात निगम लिमिटेड (आरआईएनएल) का संबंध है, पिछले वित्तीय वर्ष 2020-21 में उसने 8842 टन एलएमओ की आपूर्ति की थी। वहीं चालू वित्तीय वर्ष में 13 अप्रैल से आज सुबह तक 1300 टन से अधिक मेडिकल ऑक्सीजन भेजा जा चुका है। इसमें पिछले तीन दिनों में 100 टन से 140 टन तक की वृद्धि हुई है। 22 अप्रैल को पहले ऑक्सीजन एक्सप्रेस को आरआईएनएल विशाखापत्तनम इस्पात संयंत्र से 100 टन तरल ऑक्सीजन के साथ महाराष्ट्र रवाना किया गया था, जिससे वहां के कोविड मरीजों के लिए ऑक्सीजन की तत्काल जरूरतों को पूरा किया जा सके।

 

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