चिंतन,, कोरोना कहर,बिना पहरे के lockdown सफल, चारों तरफ सन्नाटा, लोग घरों से बाहर नहीं निकल रहे हैं, तब कैसे फैल रहा है कोरोना का संक्रमण ?

 रायपुर, दुर्ग, भिलाई, बिलासपुर। असल बात न्यूज़।

0  चिंतन/ विश्लेषण / जिंदगी बचाने के लिए

0  अशोक त्रिपाठी

अप्रैल का महीना बीतने जा रहा है, और इस महीने के अंतिम सप्ताह में भी छत्तीसगढ़ में ज्यादातर इलाकों का तापमान दोपहर में भी 33, 34 डिग्री सेल्सियस तक बना हुआ है। तेज गर्मी नहीं पड़ रही हैं। अमूमन छत्तीसगढ़ राज्य के ज्यादातर हिस्सों में मार्च बीतते - बीतते तेज गर्मी शुरू होने लगती है। और पिछले चार-पांच वर्षों का तो जो रिकॉर्ड रहा है कि अप्रैल महीने में तापमान 40 डिग्री तक पहुंच जाता था अथवा इस से अधिक हो जाता रहा है। ऐसे में दोपहर 9:00 बजे के बाद से ही घरों से निकलना मुश्किल होने लगता था। इसी दौरान स्कूलों  और महाविद्यालयों में बच्चों की परीक्षाये शुरू हो जाती है और छोटे बच्चों को इस गर्मी में परीक्षा देने जाने में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ता रहा है। इस साल मार्च-अप्रैल महीने में छत्तीसगढ़ राज्य में ऐसा तापमान बना हुआ है कि अभी तक तेज गर्मी शुरू नहीं हुई है। अभी हवा में नमी है और ठंडक है। तेज गर्मी नही पडने  से किसी को गर्मी की वजह से कोई दिक्कत नहीं हो रही है। तापमान कम होने की वजह से अभी ज्यादातर घरों में कूलर इत्यादि भी चलने शुरू नहीं हुए हैं। अभी इन महीनों में जैसा वातावरण अक्सर नागपुर गोंदिया के साथ महाराष्ट्र प्रदेश  के अन्य  विभिन्न इलाकों रहता है छत्तीसगढ़ में भी वैसा ही वातावरण बना हुआ है।  मार्च, अप्रैल महीने में मनहूस कोरोना छत्तीसगढ़ में भारी त्रासदी, तबाही लेकर आया है। चारों तरफ मातम फैला हुआ है। हर घर में विपत्ति आ गई नजर आ रही है। कोरोना से संबंधित विभिन्न पहलुओं पर शोध कर रहे विशेषज्ञों के जेहन में अब यह सवाल भी उठत है कि तापमान नहीं बढ़ने की वजह से भी तो कहीं कोरोना के संक्रमण फैलाव अधिक तेज गति से तो नहीं हुआ है और इसी वजह से तो इसका म्युटेंट और अधिक खतरनाक  साबित नहीं हो रहा है। आमतौर पर यह माना जाता है कि तेज गर्मी में संक्रामक बीमारी फैलाने वाले तमाम वायरस स्वयमेव खत्म हो जाते हैं। नष्ट हो जाते हैं। तेज गर्मी नहीं पड़ रहे इसलिए आशंका व्यक्त की जा रही है कि कोरोना का वायरस ऐसे वातावरण में अधिक फल फूल रहा है और लोगों को अधिक नुकसान पहुंचा रहा है। लोगों के लिए घातक व जानलेवा साबित हो रहा है।

मनहूस कोरोना की महामारी ने छत्तीसगढ़ में भारी तबाही मचाई है। पिछले 20 दिनों से प्रतिदिन औसतन 15000 से अधिक लोग इस महामारी के संक्रमण की चपेट में आ जा रहे हैं। और इसकी चपेट में आकर प्रतिदिन दो सौ से अधिक लोगों की मौत हो जा रही है। सभी के मन में किसी अनहोनी की आशंका का डर फैल गया है। कोरोना की चपेट में आने के बाद कई लोगों की दो-तीन दिनों के भीतर ही मौत हो गई है। श्मशान घाटों में हर घंटे में लगभग 10, 15 चिताये जलाई जा रही हैं।  यह हाल प्रत्येक श्मशान घाट में दिख रहा है। कोरोना के संक्रमण के फैलाव और कहर के आगे शासन-प्रशासन सब बेबस नजर आ रहे हैं। आम लोग घर से बाहर नहीं निकल रहे हैं। अपने सीमित संसाधनों  में किसी तरह घरों में ही गुजारा कर रहे हैं। झुग्गी बस्तियों के साथ बड़ी बड़ी कॉलोनी में ऐसा सन्नाटा पसरा है कि कुत्तों के भौंकने और चीखने से ही यह सन्नाटा टूट ता नजर आता है लेकिन इसके बावजूद कोरोना के संक्रमण का फैलाव थम नहीं रहा है। ऐसे हालत में लोगों के जेहन में भी यह भी सवाल तैरने लगा है कि लोग घरों से बाहर निकल रहे हैं, बहुत कम लोग अत्यंत जरूरत पड़ने पर ही घरों से बाहर रहे हैं। सामाजिक दूरियां बढ़ गई हैं। लोगों ने किसी से भी मुलाकात बंद कर दिया है। हालात ऐसे हैं कि सब कुछ ठप्प है। दुकान बंद है मार्केट बंद है लोगों का घरों से बाहर निकाला बंद है। तब फिर कोरोना के संक्रमण का फैलाव बढ़ कैसे रहा है। यह बात अब शासन प्रशासन के लिए भी चिंता का विषय बनी हुई है। आम लोगों को भी यह सवाल चिंतित कर रहा है यह सच्चाई है। सड़कों पर निकल कर देख लीजिए चारों तरफ सन्नाटा पसरा हुआ है। अनजानी अनहोनी की आशंका से पीड़ित सन्नाटा। लोग कई कई दिनों से घरों से बाहर निकल रहा है। अब इस को तो लगभग महीने भर होने जा रहे हैं। तब अभी कोरोना का संक्रमण थम नहीं रहा है। आखिर क्यों ? इतने lockdown, प्रतिबंधों के बावजूद कोरोना का संकरण आखिरकार फैल कैसे रहा है ? अस्पतालों में अभी भी oxygen  वाले बेड के खाली नहीं होने की खबर आ रही है। सबसे बड़ी चिंता की बात यह है कि सहेली ही नहीं प्रत्येक ग्रामीण क्षेत्र में प्रत्येक गांव में कोरोना के नए संक्रमित मिल रहे हैं। ऐसे में कई सवाल उठना स्वाभाविक हैं। आखिरकार कोरोना के संक्रमण का फैलाव वहां कैसे पहुंच जा रहा है। जो गांव ज्यादातर शहरों से कटे रहते हैं, जहां बाहरी लोगों की पहुंच ना के बराबर रहती है उन गांवो में भी एक दो कोरोना संक्रमित  मिल गए हैं। ऐसी स्थितियों से चिंताएं काफी बढ़ गई है।किसी को कुछ समझ नहीं आ रहा है कि कोरोना के संक्रमण का फैलाव सब जगह कैसे पहुंचता जा रहा है। दूर गांव - गांव के लोगों में भी सर्दी, खांसी, बुखार की शिकायतें आ रही हैं और कोरोना की टेस्टिंग कराने के लिए स्वास्थ्य केंद्रों में ग्रामीणों, लोगों की भीड़ लगी हुई है।

कोरोना के संक्रमण का फैलाव हर तरफ कैसे होता जा रहा है ? यह काफी महत्वपूर्ण सवाल है,शायद ही कोई होगा जो इसका जवाब सीधे-सीधे दे सके। लगता तो ऐसा है कि इसका जवाब किसी के पास नहीं है और इसे खोजा जाना चाहिए। इसका जवाब आना चाहिए,। स्वास्थ्य केंद्र में भी इस बात की जांच की जानी चाहिए, यह पता लगाने की कोशिश करना चाहिए और ध्यान दिया जाना चाहिए कि जो नए कोरोना संक्रमित आ रहे हैं उनमें संक्रमण कैसे फैला ? क्या वे अपने परिवार के किसी सदस्य के संपर्क में आने से संक्रमित हो गए अथवा बाहर से कहीं से संक्रमित होकर पहुंचे हैं। जिनके परिवार में कोई संक्रमित नहीं है, और जो घरों से भी बाहर नहीं कर रहे हैं, जो इतने lockdown के बावजूद घर में ही रहकर संक्रमित हो गए हैं उन्हें फ्रेश और नया संक्रमित माना जाना चाहिए। इस तरह से कोरोना के संक्रमितों को जो अलग-अलग वर्गों में विभाजित कर लेना चाहिए। एक वे, जिनके परिवार में कोई संक्रमित नहीं है, परिवार के पहले सदस्य के रूप में वे संक्रमित हुए हैं एक वर्ग इनका, और दूसरा वर्ग जिसके परिवार में पहले कोई संक्रमित हो चुका है और उससे परिवार के अन्य सदस्य संक्रमित होते जा रहे हैं। इसमें पहले वर्ग से कई सारी जानकारी मिल सकती हो और कठिन उपाय जा सकते हैं। यह वर्ग खुराना के संबंध में शोध करने वाले विशेषज्ञ के लिए का तन्हा को साबित हो सकता है। पहले वर्ग के  बारे में गंभीरता पूर्वक पूरी तरह से यह पता करने की कोशिश होना चाहिए कि वह संक्रमित कैसे हो गए।अगर ऐसा किया गया तो कोरोना के संक्रमण के फैलाव के मामले ने कई सारे नए तथ्य सामने आ सकते हैं। रोज लगभग 15000 नए मामले सामने आ रहे हैं और यह निश्चित है कि इनमें से हजारों लोग ऐसे होंगे जिनके परिवार में कोई पहले से संक्रमित नहीं रहा होगा। फिर ये कैसे संक्रमित हो गए ? अगर हम इसकी तह तक पहुंचने की कोशिश करते हैं और इसमें सफल हो जाते हैं तो हमारे सामने निश्चित रूप से कई सारी महत्वपूर्ण जानकारियां आ सकती हैं। यह काम स्वास्थ्य विभाग, स्वास्थ्य केंद्र की मदद के बिना नहीं हो सकता। इसके लिए शासन-प्रशासन सरकार को भी तैयारी करनी होगी। रणनीति बनानी होगी। अभी कोरोना के संक्रमण के फैलाव के मामले में सब बेबस नजर आ रहे हैं। किसी के कुछ समझ नहीं आ रहा है कोरोना का संक्रमण फैलता जा रहा है। लग रहा है कि हम कहीं ना कहीं फेल जरूर हो रहे हैं । बिना सूचना के कोरोना का संक्रमण फैलता जा रहा और लोग संक्रमित होते जा रहे हैं।

भारत में कुल सक्रिय मामलों की संख्या बढ़कर 28,13,658 हो गई है। यह संख्या देश के कुल संक्रमित मामलों का 16.25 प्रतिशत है। पिछले 24 घंटों के दौरान कुल सक्रिय मामलों की संख्या में 1,30,907 मामलों की बढ़ोतरी हुई है।

भारत के कुल सक्रिय मामलों में आठ राज्यों में- महाराष्ट्र, छत्तीसगढ़, उत्तर प्रदेश, कर्नाटक, राजस्थान, तमिलनाडु, गुजरात और केरल सभी प्रदेशों में कोरोना के संक्रमण का फैलाव काफी तेज गति से हो रहा है। देश में जो कुल कोराना के  संक्रमण फैलाव हुआ है उसमें से कुल मिलाकर 69.67 प्रतिशत फैलाव इन्ही राज्यों में हुआ है।

 

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अभी जो ताजा खबर आ रही है देश में कोविड से जुड़ी राष्ट्रीय मृत्यु दर गिर रही है और इस समय यह घटकर 1.13 प्रतिशत पर सिमट गई  है।

पिछले 24 घंटों के दौरान 2,812 कोविड मरीजों की मौत हुई है। 10 राज्यों का मौत के नए मामलों में 79.66 प्रतिशत योगदान है। महाराष्ट्र में सबसे अधिक 832 लोगों की जान गईइसके बाद दिल्ली में सबसे ज्यादा 350 लोगों की मौत हुई।

पीएम नरेंद्र मोदी ने देश में कोविड-19 से संबंधित स्थिति की समीक्षा के लिए शीर्ष अधिकारियों के साथ एक बैठक की। उन्होंने देश में ऑक्सीजन की उपलब्धता, दवाओं, स्वास्थ्य अवसंरचना आदि से संबंधित स्थिति की समीक्षा की है।

ऑक्सीजन की आपूर्ति बढ़ाने पर काम कर रहे अधिकार प्राप्त समूह ने प्रधानमंत्री को देश में ऑक्सीजन की उपलब्धता और आपूर्ति में तेजी लाने के लिए किए जा रहे प्रयासों के बारे में जानकारी दी। उन्होंने राज्यों को ऑक्सीजन के आवंटन में वृद्धि के बारे में पीएम को बताया। इस पर भी चर्चा हुई कि देश में  एलएमओ का उत्पादन अगस्त 2020 में 5700 एमटी/दिन से बढ़कर वर्तमान में 8922 एमटी (25 अप्रैल 2021 को) हो गया है। एलएमओ का घरेलू उत्पादन अप्रैल 2021 के अंत तक 9250 एमटी/दिन के पार जाने की उम्मीद है।

 

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पीएम ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि वे पीएसए ऑक्सीजन संयंत्रों को जल्द से जल्द शुरू करने के लिए राज्य सरकारों के साथ मिलकर काम करें। अधिकारियों ने भी पीएम को बताया कि वे राज्यों को पीएसए ऑक्सीजन संयंत्र लगाने के लिए प्रोत्साहित कर रहे हैं।