व्यक्तित्व विकास विषय के साथ कार्यशाला का समापन

 

भिलाई। असल बात न्यूज़।

सेंट थॉमस महाविद्यालय के अर्थशास्त्र स्नातकोत्तर विभाग द्वारा आयोजित 5 दिवसीय कार्यशाला का  व्यक्तित्व विकास विषय के साथ समापन समारोह  हुआ।  कार्यशाला की मुख्य अतिथि हेमचंद विश्वविद्यालय दुर्ग की कुलपति माननीय डॉ अरुणा पलटा के सानिध्य एवं आभार के साथ कार्यक्रम की सराहना की गई।

 सेंट थॉमस मिशन के मैनेजर बिशप हिस ग्रेस डॉ जोसफ मार डायोनिशियस एवं महाविद्यालय के प्रशासक फादर डॉ जोशी वर्गिस ने उपस्थित प्रतिभागियों को शुभकामनाएं दी। विशेष अतिथि अधिष्ठाता छात्र कल्याण संघ के माननीय डॉ प्रशांत श्रीवास्तव, महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ एम जी रोईमोन उपस्थित थे। महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ एम जी रोईमोन ने इस पांच दिवसीय कार्यशाला को संबोधित करते हुए कहा की आमंत्रित अतिथियों एवं मुख्य वक्ताओं के द्वारा दिए गए व्याख्यानो मे प्रत्येक विषय पर ज्ञानवर्धक जानकारियां दी गई और उम्मीद करता हूं कि इस कार्यशाला से प्राप्त जानकारियों के माध्यम से, विद्यार्थी वर्ग को अपना कैरियर निर्माण करने में पूरा सहयोग मिलेगा। चौथे  सत्र के मुख्य वक्ता माननीय श्री कौस्तुभ धर्माधिकारी (डायरेक्टर एंड ओनर ऑफ़ कैप्स आइसक्रीम रायपुर ) 'परसूइंग एंटरप्रिन्यरशिप एस ए करियर' पर अपने विचार रखे। उन्होंने कहा कि एंटरप्रेन्योरशिप को कैरियर के तौर पर देखना चाहिए उन्होंने डीएनए, आईडिया,रिस्क, कैरियर, मनी मेकिंग, टाइम, आईडेंटिटी, आदि विषय पर अपने विचार व्यक्त किए। कैप्स का उदाहरण देते हुए अपने जीवन के अनुभव एवं कार्यों को साझा किया। कार्यशाला के पांचवे दिन के मुख्य वक्ता एवं विशेष अतिथि डीन स्टूडेंट्स वेलफेयर हेमचंद विश्वविद्यालय दुर्ग के माननीय डॉ प्रशांत श्रीवास्तव ने 'पर्सनालिटी डेवलपमेंट' पर अपना व्याख्यान प्रस्तुत किया। उन्होंने व्यक्तित्व विकास की चर्चा करते हुए कहा कि क्षमता एवं विशेषताओं से पहचान करें ना कि दिखावे से। किसी की नकल न करें यदि हम नकल करते हैं तो अपनी पहचान खो देते हैं। डर और कुंठा को दूर करने का आव्हान किया और कहां की आत्मविश्वास को बढ़ाएं । अप्रत्याशित भय, गुस्सा, तनाव यह सभी व्यक्तित्व विकास में बाधाक हैं। आत्मविश्वास जागृत करने पर जोर दिया। स्लिम और फैट को परिभाषित किया उन्होंने प्रेम और सकारात्मक दृष्टिकोण  तथा अच्छे वातावरण निर्मित करने, नकारात्मक को सकारात्मक बनाने की क्षमता उत्पन्न करने पर जोर दिया। उन्होंने स्मार्ट गोल की ओर ध्यान आकर्षित करते हुए, यथार्थ की दुनिया से जुड़ने और समय के मुताबिक कार्य करने को कहा। उन्होंने यह भी कहा कि अपने आप में परिवर्तन लाना है तथा चुनौतियों में अवसर की तलाश करना है। गलत कार्य करने का प्रयास ना करें भले ही परेशानियां आए संविधान के दायरे में रहते हुए कार्य करें। प्रयास और सफलता के मध्य सामंजस्य स्थापित करें । तभी सर्वांगीण विकास संभव है।

 अर्थशास्त्र विभाग की विभागाध्यक्ष एवं एसोसिएट प्रोफेसर डॉ मरियम जेकब, कार्यशाला की मॉडिएटर एवं आयोजक सचिव अर्थशास्त्र विभाग की सहायक प्राध्यापक डॉ अपर्णा घोष, प्राध्यापक गण,आयोजक व तकनीकी सदस्य, एवं प्रतिभागी वर्चुअल कार्यशाला मे उपस्थित थे। कार्यशाला का संचालन डॉअपर्णा घोष एवं धन्यवाद ज्ञापन डॉ मरियम जैकब द्वारा किया गया।