दारू के अवैध कारोबार में लगे कईयों का कोरोना ने धंधा ठप करा दिया

 रायपुर, दुर्ग, बिलासपुर। असल बात न्यूज़

0  चिंतन / विश्लेषण / जिंदगी बचाने के लिए

0  अशोक त्रिपाठी

छत्तीसगढ़ प्रदेश के 12 जिलों में लॉक डाउन की अवधि में लगातार बढ़ोतरी कर देने पर कहीं कोई सवाल नहीं है। कोरोना वायरस के संक्रमण के फैलाव और उससे लगातार हो रही मौतों से जिस तरह से दहशत का वातावरण है, आतंक का माहौल है लोग इस चिंताजनक हालत से किसी भी तरह से बाहर निकलना चाहते हैं। लगातार हो रही अनहोनी से सब छुटकारा पाना चाहते हैं ।जिसके लिए उन्हें lockdown की अवधि में लगातार बढ़ोतरी के जैसे निर्णय भी बिल्कुल मंजूर है। अभी किसके  साथ कब क्या हो जा रहा है ? कुछ  समझ नहीं आ रहा है। दो दिन पहले आप जिसे एकदम, बिल्कुल भला चंगा देखते  हैं अचानक वह कोरोना से संक्रमित हो जाता है और 5 - 6 दिन के बाद उसके आकस्मिक निधन की खबर आ जाती है। लगभग हर कहीं ऐसा ही हो रहा है। कोरोना का नया mutant अभी बहुत खतरनाक रूप दिखा रहा है। हर कॉलोनी में लोग कोरोना से संक्रमित मिल जा रहे हैं। हर दूसरे- तीसरे परिवार में कोई ना कोई सदस्य कोरोना से संक्रमित है। जो परिवार कोरोना से संक्रमित हो गया है उसके हालात ऐसे हो गए है जैसे सब कुछ छीन गया, लुट गया हो। सब कुछ बिखर सा गया है। कोरोना के चलते समाजिक दूरियां तो स्वाभाविक तौर पर बन गई है। कोरोना के संक्रमण का  इतना डर है कि पीड़ित और उसके परिजनों से हर कोई दूरी बनाने की कोशिश में लग गया है। इस हालत में कई परिवारों में खाने के लाले पड़ने तक नौबत आ गई है। दो जून के भोजन के लिए भटकने तक की नौबत है। जिस परिवार में कोरोना से मुखिया की जान चली गई है उस परिवार के पास  कमाई का अब कोई जरिया नहीं रह गया हैं ऐसे में उसकी हालत कितनी दयनीय हो गई होगी इसे समझना बहुत कठिन है। इस पीड़ा का जो भोग रहा है वही इसकी वास्तविक और व्यावहारिक परेशानियो को समझ सकता है। अभी कई सारी परिस्थितियां हालत शासन प्रशासन के नियंत्रण में भी नजर नहीं आ रही है। अस्पतालों में मरीजों की क्या सिर्फ कोरोना की वजह से ही मौत हो जा रही है ? इसका जवाब देने वाला कोई नहीं नजर आता। कि कोई यह बताए कि अस्पताल में भर्ती होने के सिर्फ तीन चार दिन के बाद मरीज की आखिर मौत क्यों हो रही है। सिर्फ कोरोना ही अभी इन मौतों का जिम्मेदार है अथवा जो तमाम बदइंतजामी है,  अव्यवस्थाये  हैं वह सब भी लोगों की मौतों के लिए जिम्मेदार हैं। कोरोना से नवजवानों की जान चली जा रही है। किशोरों की मौत हो रही है। बड़ी संख्या में महिलाओं की जान चली गई है।इस महामारी के चलते भरा पूरा परिवार तहस-नहस हो जा रहा है। सब कुछ भगवान भरोसे होकर रह गया नजर आ रहा है। पहले अस्पताल में  लोगों को बहुत अधिक ऑक्सीजन जरूरत नहीं पड़ती थी अभी कोरोना के जो संक्रमित आ रहे हैं सभी मरीजों को ऑक्सीजन की निहायत जरूरत पड़ रही है। ऑक्सीजन के बिना उनकी जान बचाना मुश्किल हो रहा है।पहले बहुत अधिक ऑक्सीजन की जरूरत नहीं पड़ती थी इसलिए अस्पतालों में भी ऑक्सीजन बेड की बहुत अधिक उपलब्धता नहीं है। ना ही सरकारी अस्पतालों में और ना ही निजी अस्पतालों में। लेकिन अब हर दिन हजारों मरीज आ रहे हैं और इनमें से ज्यादा लोगों को जिंदगी बचाने के लिए ऑक्सीजन की जरूरत पड़ रही है। जिंदगी बचाने के लिए रोज नए - नए प्रयास करने पड़ रहे हैं।ऐसे  हालात में lockdown से कुछ परिस्थितियां संभलती हैं  तो इसकी अवधि में लगातार बढ़ोतरी करने पर कोई सवाल  खड़ा नहीं किया जा सकता। लोगों को इस महामारी के हालत से बचाने के  लिए जो जरूरी उपाय  हैं वे सब कुछ किए जाने चाहिए। लोगों को मौत के मुंह में जाने से बचाने प्रत्येक प्रयास किया जाना चाहिए। इस समय आम लोगों की मदद करने में लगे, उन्हें दवाइयां भोजन वस्त्र सहित जरूरत  की अन्य सामग्रियां उपलब्ध कराने में लगे समाजसेवी संगठनों, धार्मिक संगठनों   जो कि लोगों की जान बचाने , उन्हें हर संभव सहायता उपलब्ध कराने तत्पर हैं को जितना भी धन्यवाद दिया  जाए कम है। लेकिन इस कठिन समय में भी कई लोग अपनी आदतों से बाज आने से चूक नहीं रहे हैं। अवसर मिलने पर निरीह -  लाचार लोगों से मनमाना पैसा वसूलने का कोई अवसर नहीं छोड़ा जा रहा हैं। कई अस्पतालों, स्वास्थ्य कर्मियों के खिलाफ भी शिकायतें आ रही हैं। लॉकडाउन जैसा अवसर मिलने पर कालाबाजारी, जमाखोरी करने वाले अवसरवादी तत्व भी अक्सर सक्रिय हो जाते हैं। ₹2 की चीज ₹10 में बेची जाने लगती है। जिसको जरूरत होती है उसे किसी वस्तु को खरीदने के लिए ऐसी मनमानी कीमत भी चुकानी पड़ती है। Lockdown को बढ़ाया गया हैं तो इस समय भी ऐसी परिस्थितियां निर्मित होने वाली है। अब  शासन प्रशासन की जिम्मेदारी है कि वह सब संकट के दौर में इस समस्या से कैसे निपट पाती है और जनता का भला कर सकती है। इस चुनौती से सबको जूझना पड़ेगा।

कोरोना थम नहीं रहा है बल्कि लगातार विकराल होता जा रहा है। रोज हाहाकार मचा रहा है। प्रतिदिन बड़ी संख्या में लोगों की जान ले ले रहा है। कोरोना की चपेट में आकर हजारों लोग अकाल काल के गाल में समा जा रहे हैं। कोरोना को रोकने के लिए नियंत्रित करने के लिए किसी के पास कोई उपाय नहीं दिख रहा है। वैक्सीन लगाई गई है, लॉकडाउन लगातार जारी है, लोग घरों से नहीं निकल रहे हैं, घरों में कम जरूरत के साधनों से जीवन चला रहे हैं लेकिन कोरोना थम नहीं रहा है। प्रतिदिन हजारों की संख्या में संक्रमित मिल रहे हैं। विशेषज्ञों को यह समझ नहीं आ रहा है कि  इतने उपाय कर लेने के बावजूद भी आखिर प्रतिदिन कोरोना के इतने अधिक संक्रमित क्यों मिल रहे हैं। क्या पहले कहीं कोई बड़ी चूक हो गई है जिसकी वजह से हमे इस हालत से जूझना पड़ रहा  है। छत्तीसगढ़ राज्य की बड़ी सीमाएं महाराष्ट्र प्रदेश से सटी हुई हैं। देश में  मार्चमहीने में  महाराष्ट्र प्रदेश में ही सबसे तेजी से कोरोना के संक्रमण फैलाव शुरू हुआ। छत्तीसगढ़ मुंबई हावड़ा मार्ग पर स्थित है। इसके चलते यह आशंका पहले से लगाई जा रही थी कि इस मार्ग पर स्थित छत्तीसगढ़ के शहरों मे भी कोरोना के  संक्रमण का फैलाव काफी तेजी से हो सकता है। और अब हुआ भी ऐसा ही है। मुंबई हावड़ा मार्ग पर स्थित राजधानी रायपुर, दुर्ग राजनांदगांव बिलासपुर रायगढ़ महासमुंद इत्यादि जिलों में कोरोना का संक्रमण इतना अधिक बढ़ गया है कि इन जिलों में हालात पूरी तरह से बेकाबू हो गए हैं। अब तमाम उपाय करने के बावजूद कोरोना थम नहीं रहा है। इन प्रत्येक जिलों में प्रतिदिन हजारों की संख्या में नए संक्रमित मिल रहे हैं। वही यहां मौतों की संख्या भी बढ़ती जा रही है। कोरोना महामारी की त्रासदी झेल रहे जिलों में जगह जगह  मातम छाया हुआ है। हर कोई अनहोनी से डरा हुआ है। कोरोना के संक्रमितो का जीवन बचाने के लिए उनका तथा उनके परिजनों का मनोबल  बढ़ाने की कोशिश की जा रही है। जीवन रक्षक दवाइयों की कमी की शिकायतें तो हर जगह से आ रही है।

लॉकडाउन की अवधि में लगातार बढ़ोतरी कर देने से यह फायदा मिलने की उम्मीद की जा रही  है कि इससे कोरोना के संक्रमण के फैलाव का चक्र टूटेगा। राजधानी रायपुर दुर्ग बिलासपुर जैसे जिलों में इस अवधि को मिलाकर lockdown को लगभग  1 महीने हो जाएंगे। इतना लंबा लाक डाउन एक साथ लागू होने से स्वाभाविक तौर पर कई सारी दिक्कतें पैदा होंगी। अमूमन लोग अपने घरों में एक महीने का राशन भर कर रखते हैं। अगले महीने में वेतन मिलने पर फिर राशन भरा जाता है । एक महीने तक lockdownहोने से ज्यादातर घरों में घर का राशन खत्म होने लगेगा और आम लोगों को अपने घरों में फिर से राशन  भरने की जरूरत पड़ने लगेगी। कालाबाजारियो और जमाखोरों को लोगों की इस समस्या की समझ है। यहीं से वे सब इसका फायदा उठाने की तैयारियां शुरू कर लेते हैं। वस्तुओं की कृत्रिम कमी शुरू कर दी जाती है। इस कमी से महंगाई अपने आप बढ़ जाती है।लोगों में भी सामान खरीदने की होड़ शुरू हो जाती है। लॉक डाउन की अवधि बढ़ाई गई है तो शासन प्रशासन को भी इन समस्याओ से निपटने पहले से तत्पर रहना होगा। लोगों की जिंदगी बचाने के लिए अभी सबसे अधिक जरूरी है कि अस्पतालो में भी सुविधाएं पर्याप्त उपलब्ध हो। जो oxygen bed की कमी की शिकायतें आ रही हैं उसे प्राथमिकता पूर्वक  दूर करने के प्रयास होना चाहिए। अस्पतालों में इतनी अधिक मौतें क्यों हो रही है ? इस ओर भी गंभीरता पूर्वक चिंता की जानी चाहिए । क्या यह मौतें कोरोना के अधिक घातक होने की वजह से ही हैं अथवा अस्पतालों में पर्याप्त सुविधाएं उपलब्ध करा कर ये जिंदगी बचाई जा सकती थी। अस्पतालों से भी जानकारी आ रहे हैं कि वहां कई चिकित्सक, स्वास्थ्य कर्मी अपनी सेवाएं देने में संकोच कर रहे हैं, हिचक रहे हैं, ड्यूटी पर नहीं आ रहे हैं। उन्हें भी अपनी जिंदगी पर खतरा दिख रहा है। जो जीवन रक्षक दवाइयां  है जो दवाइयां कोरोना से लड़ने में लोगों की जिंदगी बचाने में सहायक है उनकी उपलब्धता सुनिश्चित होनी चाहिए।