शासन प्रशासन के साथ आम जनता को भी अपनी जिम्मेदारियो का बखूबी निर्वहन करना जरूरी है

 दुर्ग। असल बात न्यूज़।

0  अशोक त्रिपाठी

0   चिंतन/फैक्ट्स

यह साफ है कि अकेले शासन- प्रशासन के दम पर वैश्विक महामारी कोरोना से नहीं निपटा जा सकता है। आम जनता के सहयोग के बिना कोरोना को नियंत्रित नहीं किया जा सकता। इसके फैलाव को नहीं रोका जा सकता। एक से दूसरे में संक्रमण फैलने से नहीं रोका जा सकता। इन सब चीजों को नियंत्रित करने,  रोकने में आप जनता की अत्यंत ही महत्वपूर्ण भूमिका  है, और जनता का पूरा साथ नहीं मिला तो इस मकसद में, उद्देश्य में सफलता मिलना नामुमकिन के जैसा ही है। शासन प्रशासन के द्वारा प्रतिबंध लगाए जा सकते हैं, प्रतिबंधों को और सख्त किया जा सकता है। संक्रमण के फैलाव के बारे में जानकारी जुटाई जा सकती है। अस्पताल में सुविधाएं उपलब्ध कराई जा सकती है । दवाइयों की उपलब्धता की सुचारू रूप से व्यवस्था की जा सकती है। लेकिन, एक व्यक्ति से दूसरे तक संक्रमण न फैले, संपर्क में आने से दूसरा कोई संक्रमित ना हो सके, परिवार के सदस्य संक्रमण के फैलाव से बच सके, यह एक व्यक्ति ही सुनिश्चित कर सकता है। शासन प्रशासन के द्वारा इस बारे में दिशानिर्देश निर्धारित किये जा सकते हैं लेकिन इस पर व्यवस्थित तरीके से अमल तो व्यक्ति को ही करना पड़ेगा। महामारी के फैलाव को रोकने में व्यक्तिकी भूमिका महत्वपूर्ण हो गई है।आम लोगों ने सावधानी नहीं बरती तो उसी की जान खतरे में पड़ती जाएगी। उसी के ऊपर खतरा बढ़ता जाएगा। दुर्ग जिले में आज पिछले 24 घंटों के दौरान कोरोना के 913 नए संक्रमित मिले हैं। 4 लोगों की जान चली गई है। नए संक्रमित मिलने वालों की संख्या प्रत्येक 24 घंटे में बढ़ती जा रही है। Corona के संक्रमण का फैलाव इतना अधिक कैसे हुआ ?, इतने अधिक लोग कैसे संक्रमित हो रहे हैं ? इसका जवाब आम लोगों को अपने आसपास भी खोजना होगा, और उन्हें यह भी सुनिश्चित करना होगा कि कहीं ऐसी महामारी के फैलाव के पीछे  उनकी भी तो कोई भूमिका, कोई लापरवाही जिम्मेदार ना हो।

सिर्फ आंकड़े बाजी की बात नहीं है कि जिले में कोरोना के संक्रमितों  की संख्या इतनी अधिक बढ़ गई है। प्रत्येक 24 घंटे 200 और अधिक नए संक्रमित बढ़ जा रहे हैं, सिर्फ इसी आंकड़ों को देखकर  माथा पीट लेना पर्याप्त नहीं है। वास्तविकता यह है कि जिस घर में कोरोना के संक्रमित मिल रहे हैं, उस घर परिवार में सब कुछ अस्त-व्यस्त जैसा हो जा रहा है। संक्रमित को अस्पताल पहुंचा दिया जाता है, अथवा home isolation में रखा जाता है जिस से किसी के भी मिलने की मनाही होती है। बहुत सारे परिवार के मुखिया संक्रमित हो गए हैं ऐसे कई घरों में दो समय का चूल्हा जलना मुश्किल हो गया है। वही यह चिंता भी है कि आगे कल क्या होगा ? परिवार के सदस्यों को सबसे बड़ी चिंता यह भी खाए जाती है कि कहीं दूसरा कोई और सदस्य संक्रमित ना निकल जाए। हालात तो ऐसे भी देखने में आए हैं कि Corona positive मिल जाने के बाद परिवार , रिश्तेदारी  के लोग कन्नी काटते नजर आने लग जाते हैं, उनसे कोई मदद की बात तो दूर हो जाती है। ऐसी विषम परिस्थितियां हैं, दिक्कतें हैं तो इससे बचने के लिए सभी को सजग होना भी जरूरी हो गया है।

यह कहा जा रहा है कि जो लोग कोरोना से संक्रमित हुए हैं, कोरोना के संक्रमण की चपेट में आ गए हैं उन्हें ही सबसे अच्छे तरीके से मालूम हो सकता है कि इस संक्रमण की चपेट में वे कैसे आ गए, किस वजह से कोरोना के संक्रमण से बच नहीं सके। कहा जा रहा है कि हम लोग इस पहलू पर चिंतन करने लगे, तथा उसे दूर करने की कोशिश करें तब भी इस कोरोना के संक्रमण के फैलाव को काफी है हद तक नियंत्रित किया जा सकता है।लोगों को जानकारी हो जाएगी कि इस वजह से संक्रमण फैल रहा है, ऐसे कारणों से संक्रमण फैल रहा है तो लोग स्वाभाविक तौर पर उस से बचाव के रास्ते को इस्तेमाल करने लगेंगे। शायद अभी यही हो रहा है कि संक्रमण का फैलाव क्यों शुरू हुआ, वह इसकी चपेट में कैसे आ गए,  संभवत, किसी संक्रमित ने इस ओर बहुत अधिक ध्यान नहीं दिया है और ना ही इससे बचाव के लिए स्वयं ही कोई पहल शुरू की है।

दुर्ग जिले में पिछले 11 मार्च तक प्रतिदिन 24 घंटे के दौरान सिर्फ 100 तक नए संक्रमित मिल रहे थे। उसके बाद हरदिया संख्या बढ़ती चली जा रही है। अब हाल ऐसा हो गया है कि शायद ही कोई कॉलोनी, मोहल्ला शेष रह गई है, जहां संक्रमित नहीं मिल रहे हैं। जहां सब कुछ samanya होता नजर आ रहा था, आप लोगों की दिनचर्या पटरी पर लौटने लगी थी, सारे कामकाज सामान होने लगे थे, और कोरोना के संक्रमण के फैलाव में लगातार गिरावट दर्ज हो रही थी तथा यह उम्मीद जग गई थी कि कोरोना अब खत्म होने की ओर बढ़ रहा है। बुरे दिन अब समाप्त हो गए हैं। नई उम्मीदों की शुरुआत हो रही थी। नये आशाओ, कल्पनाओ  का संचार हो रहा था। तब यह कोई कल्पना भी नहीं कर सकता था कि कोरोना के इतने जानलेवा, खतरनाक तरीके से वापसी होगी। इस बीच छत्तीसगढ़ प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री, राजस्व मंत्री के साथ दो विधायक भी संक्रमित हो गए। सांसद भी संक्रमित हुए। तब यही लगा कि ऐसे ही हो गया होगा कि संक्रमित हो गए। सब धीरे-धीरे सब ठीक हो जाएगा। Corona खत्म हो रहा है। कोरोना के शीघ्र खत्म होने, नियंत्रित होने का, विश्वास तब और बढ़ने लगा जब हमारे अपने देश में विकसित वैक्सीन को लगाने की सफलतापूर्वक शुरुआत हो गई। तब लोगों ने जो रहा सहा डर था, चिंताएं थी वह भी खत्म होने लगी।

अब जिस तरह से संक्रमित मिल रहे हैं, आज 913 सैंपल मिले हैं, 20 दिनों के भीतर ऐसे हालात हो गए हैं कि प्रत्येक दिन 200 से अधिक बढ़कर नए संक्रमित मिल रहे हैं। ऐसे हालात को देखकर लग रहा है कि हम जहां से चले थे अब फिर वही पहुंच गए हैं। कोरोना की जड़ बदस्तूर वहीं कायम है। ऐसे मेंप्रत्येक जिम्मेदारी सिर्फ शासन प्रशासन के भरोसे में छोड़ देना, थोप देना कतई उचित नहीं कहा जा सकता, उचित नहीं माना जा सकता।जिला प्रशासन के द्वारा अभी तमाम प्रतिबंधात्मक उपायो को सख्त कर दिया गया है। इससे बहुत कुछ होने वाला नहीं है अगर हमें इसका महत्व नहीं मालूम है कि आखिर ये प्रतिबंध लगाए क्यों गए हैं ? और इससे हमें क्या फायदा मिलने वाला है ? और अगर हम इसका उल्लंघन करते हैं तो हमें क्या नुकसान हो सकता है ?इन मुद्दों पर हमें गंभीरता पूर्वक समझने की जरूरत है,.। असल में हमें यह समझने की जरूरत है कि शासन-प्रशासन की लाठी से Corona ड र कर भाग जाने वाला नहीं है कि उसे जिधर हांक दिया गया वह उधर चले जाएगा। हमें कोरोना के संक्रमण से बचना है तो हमें ही बचना होगा।हम स्वयं नहीं बचेंगे तो संक्रमित हो जाएंगे। संक्रमितो के संपर्क में आने से कोरोना एक से दूसरे तक फैल रहा है। हम संक्रमित होने से बचाव का उपयोग नहीं करेंगे को शासन प्रशासन के तमाम प्रतिबंधों से भी कुछ नहीं होने वाला है। संक्रमण के फैलाव को रोकना है तो सबसे पहले हम ही सजग होना होगा। बचाव हेतु जो निर्धारित गाइडलाइन  है उसका अनिवार्य रूप से पालन करना होगा। दुर्ग जिले में जिला प्रशासन के द्वारा मास्क  नहीं पहनने  पर 500 rupaye जुर्माना लगाने की चेतावनी दी है। लगातार प्रत्येक दिन कोरोना के संक्रमितों की संख्या बढ़ती जा रही है तो उसका एक मतलब यह भी निकाला जा सकता है कि जो निर्धारित गाइडलाइन हैं उसका पूर्ण रूपेड़ पालन नहीं हो रहा है। लेकिन अब हमें जरूर सचेत हो जाना है, चेत जाना है, उन उपायों का जरूर पालन करना है जो कि हमारी सु रक्षा, जिंदगी बचाने के लिए  बनाए गए हैं। हम कारगर उपाय करेंगे, प्रयास करेंगे तो निश्चित रूप से संक्रमितो के जो रोज बढ़ते हुए आंकड़े सामने आ रहे हैं उसे हम ही नियंत्रित कर लेंगे। और अभी ऐसी ही ठोस इच्छाशक्ति जरूरत है। संकल्प की जरूरत है। नहीं तो शासन प्रशासन के नित नए नियम कानून लागू होते रहेंगे और कोरोना की रफ्तार बराबर बनी रहेगी।अब हमें ही तय करना है कि हमें किस रास्ते पर आगे बढ़ना है।




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