शुगर की मिलेगी सस्ती दवाइयां...,ध्यान दीजिए,..., दवा विक्रेता महंगी दवाइयां बेच रहे हों तो आप तुरंत शिकायत कर सकते हैं,, एनपीपीए ने भरोसा दिलाया है कि दवाइयां, महंगी नहीं बेचने देंगे

 देश में प्रत्येक आम परिवार की प्रति महीने दवाइयों पर बहुत बड़ी राशि खर्च होती है। जिस परिवार में 40 वर्ष से अधिक आयु के सदस्य हैं उनमें शुगर, ब्लड प्रेशर , सांस,त्वचा संबंधित बीमारियां तो आम हो गई हैं जिन पर हर महीने बड़ी भारी राशि खर्च होती है। दूसरी तरफ दवा विक्रेताओं के द्वारा मनमाने दर पर दवाइयां बेचने की शिकायतें भी आम होती जा रही है। कोई भी दवाई एमआरपी से कम कीमत पर तो मिलती नहीं। जबकि एमआरपी किसी भी चीज का अधिकतम मूल्य होता है जिससे अधिक कीमत पर वस्तु को बेचना मना होता है। दवाइयों की महंगी कीमतों से आम जनता त्रस्त है। दवाइयों के साथ विभिन्न तरह के परीक्षण, जांच के नाम पर कितनी राशि वसूल कर ली जाती है यहां भी सब भोग रहे हैं।राष्ट्रीय औषध मूल्य निर्धारण प्राधिकरण (एनपीपीए) ने अभी 80 से ज्यादा दवाओं को मूल्य नियंत्रण के दायरे में लाकर आम लोगों को रागिनी कोशिश की है।

छत्तीसगढ़/नई दिल्ली। असल बात न्यूज।

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राष्ट्रीय औषध मूल्य निर्धारण प्राधिकरण (एनपीपीए) ने  मधुमेह रोधी दवाओं सहित 81 दवाओं का मूल्य निर्धारित कर दिया है।देश में अभी सबसे ज्यादा मधुमेह रोगियों के द्वारा हर दिन दवाइयां खरीदी जाती हैं और इनकी दवाइयों की कीमत को नियंत्रित कर एक बड़ा काम किया गया है।माना जा रहा है कि नए कदम उठाए जाने के बाद आम लोगों को कई सारी दवाइयां सस्ते कीमत पर मिल सकेगी


एनपीपीए ने मेसर्स वॉकहार्ट की ‘इंसुलिन ह्यूमन इंजेक्शन, 200 आईयू/एमएल’ और ‘70 प्रतिशत आइसोफेन इंसुलिन ह्यूमन सस्पेंशन + 30 प्रतिशत इंसुलिन ह्यूमन इंजेक्शन 200 आईयू/एमएल’ का खुदरा मूल्य 106.65 रुपये प्रति एमएल (जीएसटी को छोड़कर) और मेसर्स टॉरंट फार्मास्युटिकल्स लिमिटेड की ‘प्रासुग्रेल हाइड्रोक्लोराइड 10 एमजी (फिल्म कोटेड) + एस्पिरिन 75 एमजी (एंट्रिक कोटेड) कैप्सूल’ की कीमत 20.16 रुपये प्रति कैप्सूल (जीएसटी को छोड़कर) तय कर दी है, ये नई कीमतें 17.03.2021 से लागू हो गई हैं।

 दोनों दवाएं क्रमशः 132.50 रुपये प्रति एमएल और 27.26 रुपये प्रति कैप्सूल की एमआरपी पर बिक रही थीं। इस मूल्य नियंत्रण के साथ, एनपीपीए ने जनता को उचित कीमत पर दवाओं की उपलब्धता का फिर से भरोसा दिलाया है।

एनपीपीए ने स्वदेशी स्तर पर शोध एवं विकास के माध्यम से विकसित नई दवा आपूर्ति व्यवस्था के क्रम में ‘औषध मूल्य नियंत्रण आदेश (डीपीसीओ), 2013 के पैरा 32 के अंतर्गत संबंधित कंपनियों को उक्त उल्लिखित फॉर्म्यूलेशंस के लिए’ पांच साल की अवधि के लिए कीमत तय करने की छूट दी थी। छूट की अवधि के दौरान मूल्य नियंत्रण लागू नहीं था। 10.03.2021 को हुई बैठक में एनपीपीए ने छूट की अवधि बीतने के साथ, डीपीसीओ, 2013 के प्रावधानों के तहत इन फॉर्म्यूलेशन की कीमत नियंत्रित करने का फैसला किया।

 इसके परिणाम स्वरूप ‘इंसुलिन ह्यूमन इंजेक्शन 200 आईयू/एमएल’ और ‘70 प्रतिशत आइसोफेन इंसुलिन ह्यूमन सस्पेंशन + 30 प्रतिशत इंसुलिन ह्यूमन इंजेक्शन 200 आईयू/एमएल’ की कीमत मौजूदा मूल्य की तुलना में काफी कम हो गई है। अब ये दवाएं जनता के लिए ज्यादा किफायती हो गई हैं।

एनपीपीए ने 10 मार्च, 2021 को हुई बैठक में पेटेंट रहित मधुमेह रोधी दवा सहित मौजूद विनिर्माताओं द्वारा लॉन्च की जाने वाली 76 नई दवाओं की खुदरा कीमत भी निर्धारित कर दी है, जिससे मरीजों को पेटेंट समाप्त होने का लाभ पहुंचाने का रास्ता साफ हो गया है।

इसके अलावा, एनपीपीए ने एक संक्रमण रोधी फॉर्म्यूलेशन पोविडोन आयोडीन 7.5 प्रतिशत स्क्रब और थॉयराइड से संबंधित बीमारियों के उपचार में इस्तेमाल होने वाली लेवो-थायरॉक्सिन 37.5 एमजी टैबलेट नाम के दो अनुसूचित फॉर्म्यूलेशन का अधिकतम मूल्य तय कर दिया है, जिससे उनकी वर्तमान कीमत में खासी कमी आ गई है।

अनुसूचित फॉर्म्यूलेशन के वर्तमान अधिकतम मूल्य में संशोधन थोक मूल्य सूचकांक (डब्ल्यूपीआई) पर आधारित है, जिसे प्राधिकरण द्वारा ही मंजूरी दी गई थी। संशोधित कीमतें अप्रैल, 2021 से लागू हो जाएंगी।